अतिथि संपादक
योगी अनुराग : पिनडैड एसएस-टू वी-फ़ोर
ये नाम उस ब्लैक-ब्यूटी का है, जिसे पीएम मोदी ने थाम रक्खा है! आमतौर पर, बंदूक़ें इस तरह नहीं पकड़ी
Read moreवफ़ा फ़राज़ : कहते हैं विधवाएं तो अपना वैधव्य काट लें पर विधुर काटने दें तब ना।
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में यह कहावत ठेठ देसी अंदाज में दूसरे ही शब्दों में कही जाती है (राँडें
Read moreराजीव मिश्रा : विषैला वामपंथ.. मां मुझे बंदूक दिला दो, दुश्मन को मार भगाऊंगा…
एक मैडम शिक्षिका हैं. वे बच्चों को एक ट्रेनिंग कैंप में कविता के माध्यम से गतिविधि करा रही थीं. कविता
Read moreनितिन त्रिपाठी : कैडर नारेबाज़ी करता है, नेता कार्य.. यदि मुझे मोदीजी बना दें तो शाम 8 बजे ये घोषणा कर दूं…
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता हैं, नाम लेना उचित नहीं. मंत्रि मण्डल में विस्तार के समय उनकी खूब चर्चा थी
Read moreसुरेंद्र किशोर : अमेरिका व भारत में अंतर.. जेल होने पर अफसर निलंबित लेकिन कैदी चुनाव लड़ सकता है…
दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन विचाराधीन कैदी के रूप में महीनों से जेल में हैं। फिर भी उन्होंने मंत्री
Read moreजयराम शुक्ल : राष्ट्रीय प्रथम, यही हमारा धर्म
राष्ट्र हमारे राजनैतिक समाज की व्यवस्था है जबकि धर्म हमारे जीवन की मर्यादाओं व प्रवृत्ति के अनुशासन को तय करता
Read moreNRI अमित सिंघल : देश की समस्याओं का स्थाई समाधान कर रही है मोदी सरकार
जिन लोगों में राजनीतिक स्वार्थ के लिए शॉर्ट-कट अपनाकर, समस्याओं को टाल देने की प्रवृत्ति होती है, वो कभी समस्याओं
Read moreNRI अमित सिंघल : मोदी सरकार में भगोड़े उद्योगपतियों के लोन माफी का असली सच
समय-समय पर अर्बन नक्सल, पत्रकार का रूप धारण करके, मोदी सरकार पर आरोप लगाते रहते हैं कि उन्होंने भगोड़े उद्योगपतियों
Read moreटीशा अग्रवाल : राष्ट्रधर्म सर्वोपरि.. बाकी तो…आल इज वेल!
राष्ट्र या धर्म ? तिरंगा या भगवा? क्या यह वाकई बहस का विषय होना चाहिए? हम जिस सनातन से हैं
Read moreसुरेंद्र किशोर : कुत्ते को तीन मंजिले पर बैठा दो..वह कुत्ता ही रहेगा।’’.. दो शब्द पत्रकारिता पर.. ‘बर्बादी ब्रिगेड’ शिक्षा की आधी बर्बादी कर चुके…
एक पुरानी कहावत है– ‘‘बंगाल जो आज सोचता है,भारत उसे कल सोचेगा।’’ पार्थो चटर्जी आदि ने मिलकर बंगाल की स्कूली
Read moreदेवेंद्र सिकरवार : थिंक टैंक… और गालियों का केंद्र थी ‘माँ’
हिंदुओं के आधुनिक प्रकार के संगठनों में सदैव से एक कमजोर मनोवृत्ति रही है और वह है, विचारकों के प्रति
Read moreसुरेंद्र किशोर : ये नोट असली हैं.. जरूरत लोहे के हाथों की…
इस देश के भ्रष्ट व वोटलोलुप नेताओं और घोटालेबाज अफसरों-व्यापारियों को देसी-विदेशी राष्ट्रद्रोहियों के हाथों पूरी तरह बिक जाने से
Read moreसतीश चंद्र मिश्र : उन जैसा ना कोई था, ना कोई होगा..
चंद्रशेखर आजाद का इतिहास प्रसिद्ध माऊज़र गरजने लगा था और अगले ही क्षण चनन सिंह की लाश सड़क पर बिछ
Read moreदेवेंद्र सिकरवार : नियति का वचन..जाति और राष्ट्र के प्रश्न शास्त्रार्थों से निर्धारित नहीं होते…
“आर्य! यहाँ…. यहाँ कोई जीवित है।” एक सैनिक ने आवाज दी। रावी का तट सहस्त्रों सैनिकों से अटा पड़ा था।
Read moreनितिन त्रिपाठी : भारत से महापलायन, अरबपति भी छोड़ रहे देश..?
हर साल लगभग डेढ़ लाख लोग भारत की नागरिकता छोड़ रहे हैं जिनमे ज़्यादातर लोग अमेरिका की नागरिकता ले रहे
Read moreदेवेंद्र सिकरवार : शीतकालीन सत्र या बजट सत्र से भारत की जनता इन धमाकों के लिये तैयार रहे…
“जिसका कब्जा भारत के वाणिज्य पर होगा, वह विश्व पर राज करेगा।”—18वीं सदी में रूस के पीटर महान ने कहा
Read moreNRI अमित सिंघल : मेरे लेखो में संजीदगी और मुद्दे
मैं अपने लेखो को बुनने के लिए तीन धागो का अधिकतम प्रयोग करता हूँ। प्रथम, अभिजात वर्ग के कुकर्म एवं
Read moreसतीश चंद्र मिश्र : निर्दयी हैं PM मोदी.. प्रधानमंत्री पद से मोदी और मप्र के मुख्यमंत्री पद से शिवराज सिंह चौहान कल सुबह इस्तीफा दे देंगे…
बड़ा निर्दयी प्रधानमंत्री है… चौबीसों घंटे ब्रेकिंग न्यूज और Exclusive न्यूज का नगाड़ा बजाने वाले न्यूजचैनली गिरोहों के पास ना
Read moreसुरेंद्र किशोर : इंटेलिजेंस ब्यूरो की ही तरह ‘स्पेशल ब्रांच’ को भी कार्य कुशल बनाने की जरूरत
(केंद्रीय) इंटेलिजेंस ब्यूरो और राज्य पुलिस के स्पेशल ब्रांच की सतर्कता और गुणवत्ता में भारी फर्क है। ( आई.बी. को
Read moreNRI अमित सिंघल : राहुल के झूठ का सच..ये है 2014 में UPA सरकार की 56 लाख करोड़ बनाम 2022 में मोदी सरकार की 139 लाख करोड़ रुपयों की उधारी का असल सच
राहुल का ट्वीट किया हुआ पोस्टर – कि वर्ष 2014 में केंद्र सरकार की उधारी 56 लाख करोड़ थी; जो
Read moreसुरेंद्र किशोर : महंगाई के कारण बने 4 भाई 2 बेटों के परिवारवाद का सिंहासन खाली .. जनता आती है.. श्रीलंका की घटनाओं से सबक लेने का वक्त…
श्रीलंका सरकार में एक ही परिवार(राजपक्षे परिवार) के पांच सदस्य शीर्ष पदों पर विराजमान थे। वे थे– 1.-गोटाबाया राजपक्षे-राष्ट्रपति (
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