कौशल सिखौला : संसद में दो तिहाई बहुमत के लिए गोलबंदी की बड़ी जबरदस्त प्लानिंग
संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है और यह 14 अगस्त तक चलेगा । इस सत्र के लिए सत्तारूढ़ एनडीए खेमा अपनी पॉवर बढ़ाने में जुटा है । महिला आरक्षण को लेकर पिछले सत्र में विपक्ष ने बीजेपी नेत्रित एनडीए को जिस तरह शिकस्त दी थी , दो तिहाई बहुमत जुटाकर मानसून सत्र में कईं बिल पास कराने की तैयारी है । बंगाल में बदले परिदृश्य को देखकर कांग्रेस से नाराज डीएमके भी बिल पास कराने में सहयोग दे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए । पांच महीने पहले बजट सत्र के बाद बीजेपी ने बिहार और बंगाल में चुनाव जीतकर रोटी ही नहीं पलटी , अपितु विपक्ष का तवा ही उलट दिया है।

जाहिर है विपक्ष एसआईआर और चढ़ावा चोरी को लेकर केंद्र सरकार की घेराबंदी करेगा । पर इंडी अलायंस की रणनीति बनाएगा कौन ? राहुल गाँधी शायद दो हफ्तों से विदेश में हैं , तेजस्वी बुझ गए हैं , केजरीवाल और ममता विक्षिप्त से हो गए हैं , अखिलेश चढ़ावा चोरी में टिन्नु यादव की नजदीकियों की तोड़ ढूंढने में लगे हैं । इंडी गठबंधन का कोई नेता नहीं , खड़गे की कोई सुनता नहीं । उद्धव पार्टी गँवाने के सदमे में डूबे हैं , शरद बाबू अपनी बेटी को स्थापित कर रहे हैं । तो घेरने की रणनीति कौन बनाए ? दूसरी तरफ पिछले सत्र की पराजय से बिलबिलाए सत्तारूढ़ नेताओं ने संसद में दो तिहाई बहुमत जुटा ही लिया समझो । गोलबंदी बड़ी जबरदस्त है।
देखिए एसआईआर मुद्दे को फ्लॉप कर बीजेपी अब अयोध्या की चढ़ावा चोरी से निपटने को तैयार है । नया खेल पंजाब से शुरू हुआ है जहां यूपी ,उत्तराखंड , मणिपुर ,गोवा , गुजरात और हिमाचल प्रदेश के साथ 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।
पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री अकालतख्त पर माथा टेक माफी मांगने में जुटे हैं । मुख्यमंत्री भगवंत मान के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं । उधर चन्नी खेमा बगावत पर उतारू है । वे किसी भी सूरत में नए घोषित अध्यक्ष कांग्रेस अध्यक्ष राजा बाड़ींग को अध्यक्ष मानने को तैयार नहीं हैं । आलाकमान से नाराज चन्नी ने पांच दिनों तक केंद्रीय पर्यवेक्षक भूपेश बघेल से बात नहीं की । बघेल चंडीगढ़ में उनके इंतजार में बैठे रहे और निराश लौट गए।
पंजाब में बीजेपी यद्यपि बहुत प्रभावशाली नहीं रही है । अकाली दल से तालमेल भी नहीं हो पाया । इसके बावजूद बीजेपी ने कांग्रेस की बगावत को हवा देने का काम शुरू कर दिया है । इस बार शहरी क्षेत्रों में ही नहीं , बीजेपी देहातों में भी जा घुसी है । इन तमाम हरकतों का मतलब यह है कि यदि बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए ने संसद के मानसून सत्र में दो तिहाई बहुमत जुटाकर सचमुच बिल पारित करा लिए तो एक बड़ा खेला शुरू हो जाएगा।
मॉनसून सत्र में डीएमके ने इंडिया गठबंधन के दलों से अलग बैठने के लिए संसद प्रशासन को पत्र लिख दिया है । डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं । मॉनसून सत्र में एनडीए की रणनीति ये है कि तृणमूल कांग्रेस के टूटे धड़े के 20 सांसदों और उद्धव ठाकरे के टूटे 6 सासदों मिलाकर एनडीए की संख्या 318 तक पहुंचती है। उसमें यदि डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन मिल जाए तो 340 की संख्या हो जाएगी । लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा 363 है।
निश्चय ही आने वाले दिनों में संसदीय परिदृश्य काफी बदला हुआ नजर आएगा।
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