भूपेंद्र सिंह : मोहन यादव विवाद, आरोप ज्यादा या तथ्य?

अयोध्या, मथुरा, विन्ध्याचल, उज्जैन ही नहीं हर हिन्दू तीर्थ पर प्रापर्टीज के दाम बढ़ रहे हैं। साथ ही हर शहर में जमीन का दाम तेजी से बढ़ रहा है। बनारस में तो आस-पास यदि आप बिना विवाद की जमीन खरीदना चाहते हैं तो करोङों रुपये जेब में होकर भी आपको तीन चार साल इंतजार करना पङ सकता है। इसमें कहीं कोई नयी बात मुझे नहीं दिखाई पङता।
जो लोग रियल एस्टेट का काम करते हैं उनका धन्धा ही यह है की उस जगह की पहचान करना जहां विकास होना है और जल्द से जल्द वहां जमीन खरीदना। ऐसे में यह शोर मचाना की फला मुख्यमंत्री के परिवार वाले जमीन खरीद लिये और उसका दाम बढ़ गया। तो मेरे भाई, कौन आदमी ऐसा इस धरती पर है जो जमीन खरीदते समय यह ध्यान नहीं देता?
लोग कह रहे हैं की उन्हें पहले से पता था की कहा विकास होना है। पहले से पता तो पूरे लखनऊ वालों को है की नया विधानसभा कहां बनना है, नया मंत्री आवास कहां बनना है, जाईये खरीद लिजिये, लेकिन आप खरीदेंगे नहीं, क्योकि हमारी आपकी न इतनी हैसियत है और न प्राथमिकता। जिसका यह धंधा है उसने पता नहीं कब से यह काम शुरु कर दिया है।
रियल एस्टेट में मोहन यादव कोई नया नया नहीं उतरे हैं, वह जीवन भर यहीं काम किये हैं और सच बात ये है की उनका वजूद भी इसी से बना। यह बात अलग है की रियल एस्टेट में काम करने वाले अधिकांश लोग हर जगह से फेल्योर लोग होते हैं लेकिन जो व्यक्ति थोङा चालाक और मेहनती होता है, वह इसी सेक्टर में सबसे तेज बढ़ता है। मोहन यादव आज जहां पहुंचे हैं वह ये बताने के लिये काफी है की वह चालाक व्यक्ति हैं।
मेरा स्पष्ट मानना है की कभी भरत तिवारी का मुद्दा तो कभी मोहन यादव का मुद्दा स्पष्ट रुप से अयोध्या मुद्दे को पीछे धकेलने के लिये लाया गया है। अयोध्या का मुद्दा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, यह पूरी तरह से प्राथमिकता में रहना चाहिए। इसके दोषियों की तलाश करना आवश्यक है।
मेरी उज्जैन में केवल एक चिंता है और वह ये की बंगाल चुनाव परिणाम के बाद से फेसबुक पर सदैव उग्र रहने वाले श्री मंगल कसेरा जी गायब दिख रहे हैं। कोई उज्जैन में उनका जानने वाला हो तो उनका हालचाल बताने का कष्ट करे।

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