कौशल सिखौला : झारखंड में विपक्षी दलों का दोहरापन, न बसें जलीं, न शीशे टूटे , छात्रों ने दिखाया आंदोलन का नया रास्ता
शाबास झारखंड में प्रदर्शन कर रहे लाखों छात्रों ! आपको साधुवाद .. साधु साधु । न बसें तोड़ी , न पुलिस जीप या वैन पलटी , न सरकारी वाहनों के शीशे तोड़े , न वाहन फूंके । पुलिस की लाठियां खाईं , पानी की बौछार झेली , आँसू गैस के गोलों से नयन भिगोये पर धैर्य न छोड़ा । सैल्यूट देवेंद्र महतो ! आमरण अनशन के नौवें दिन खुद उठकर आंदोलन को लीड किया ।
वरना हमने तो एक ही दिन में आमरण अनशन करने वाले जंतर मंतर के नौजवान को अनशन समाप्त कर पीजा बर्गर खाते देखा है । हमने तो आमरण अनशन के पंद्रहवें दिन सोनम वांगचुक को यह कहते सुना है — अरे बेशर्मो जो अनशन पर है , उसी के सामने ठूंस ठूंसकर खा रहे हो ? कुछ तो शर्म करो अरे काकरोचों ?
रांची में छात्रों ने कल विधानसभा का घेराव किया । रोका गया तो दूसरा रास्ता पकड़ा । न किसी को गाली दी , न लड़कियों ने तरह तरह के ड्रेस पहनकर घिनौनापन दिखाया । मंच से पहले की घोषणा कर दी गई थी कि राजनैतिक नारेबाजी नहीं होगी । इसीलिए तमाशा खड़ा करने आई अर्बन वामपंथन को छात्रों ने पहले ही भगा दिया था ।
विधानसभा घेरी , रास्ता नहीं मिला तो दूसरे रास्ते से गए , पुलिस ने रात लाठियां भांजी , देर रात लौट भी आए । जाहिर है केजरीवाल की छद्म पार्टी काकरोच ने दिल्ली में जो जो बवाल काटा , रांची में उससे पूर्ण परहेज किया गया । झारखंड ने दिखा दिया कि समस्याएं गंभीर हैं । पर देश हमारा है , तोड़फोड़ और जिदबाजी बिल्कुल नहीं ।
एक गंभीर सवाल झारखंड ने छोड़ा है । वह यह कि सरकार कोई भी हो , छात्रों के भविष्य से न खेले , वरना आगे मुश्किल होगी । इस पर कल हमने विस्तार से बात की थी । यह वास्तविकता है कि बेरोजगारी देश के बहुत बड़ी समस्या है । इसके मूल में है 150 करोड़ हो चुकी आबादी । 150 करोड़ में यदि युवाओं की संख्या 40 करोड़ है तो रोजगार भी 40 करोड़ चाहिएं ।
कहां से आएंगे इतने रोजगार यह सरकार जानें । इसकी शुरुआत छात्रों से करनी पड़ेगी । आजकल छात्र संघर्ष का मूल कारण है सीट बिक्री , पेपर लीक , पेपर आउट , नौकरी बिक्री । युवाओं के अधिकार युवाओं को लौटाए बिना यह आग बुझने वाली नहीं । राजनीति जितनी जल्द समझ ले उतना अच्छा है । अब अपना पॉलिटिकल एजेंडा चलाकर युवाओं को भड़काया या भटकाया नहीं जा सकता ।
छात्र अच्छी तरह जानते हैं कि जंतर मंतर के काकरोच मंच पर आने वाली राजनीति झारखंड क्यों नहीं आई ? एक बयान तक जारी नहीं किया । राजनीति के असली मकसद यदि युवा पीढ़ी के साथ साथ जेन जी और जेन अल्फ़ा को भी समझ आ गए तो न कुर्ता टोपी काम आएंगे , न पीले पटके और न सफेद गुलाबी शर्ट ? नाटक छोड़िए । युवा सब जानते हैं कि लोग प्रयागराज क्यों चले गए , रांची क्यों नहीं आए ? होंठ क्यों सिले हैं यह भी ?


