सर्वेश तिवारी ‘श्रीमुख’ : फर्जी जातीय आईडी का खेल, गालियों से कमाई और समाज में नफरत की खेती
अब यह स्पष्ट दिखने लगा है कि यदि आप सोशल मीडिया की गालीबाजी पर नकेल नहीं कसते तो समाज को टूटने से नहीं रोक सकते। यह सचमुच गंदा नाला बन चुका है, जहां हर व्यक्ति अपनी गंदगी बहा रहा है।
देश में ऐसा कोई जाति वर्ग नहीं है, जिसके नाम से बनी आईडी से दूसरों को गाली न दी जा रही हो, और कोई जाति ऐसी नहीं है जिसे गाली न पड़ रही है। दलित आईडी से सवर्ण गाली खा रहे, ब्राह्मण आईडी से ठाकुर को गाली दी जा रही है, ठाकुर आईडी से यादव को, यादव आईडी से किसी और को… यह लगातार और धड़ल्ले से चल रहा है।

हर आईडी मॉनिटाइज है और लोग गालियों से भी डॉलर कमा रहे हैं। बहुजन आईडी से ब्राह्मण को गाली दी गई, बदले में ब्राह्मण उस पोस्ट पर विरोध करें तो पोस्ट की रीच बढ़ जाती है और आ जाते हैं दस बीस डॉलर… यह सोशल मीडिया का मजबूत धंधा बन चुका है। एक ही व्यक्ति दो जाति की आईडी बना कर बैठा है और एक से दूसरे को गाली देता है और एक दूसरे की स्क्रीन शॉट लगा कर लड़ाई भी लड़ता है। भीड़ दोनों जगह आती है और डॉलर बरसने लगता है…
आप सोशल मीडिया के हिसाब से अंदाजा लगाएंगे तो लगेगा जैसे देश में हर जाति एक दूसरे को नोचने के लिए तैयार बैठी है। सभी एक दूसरे से घृणा ही करते हैं, एक दूसरे से शत्रुता का भाव ही रखते हैं। पर यह धरातल का सच नहीं है। पिछले दो चार साल में ऐसा कुछ नहीं बदल गया कि लोग अपना मूल स्वभाव छोड़ कर घृणा का व्यवसाय करने लगे। गांव देहात में, दैनिक जीवन में लोग अब भी प्रेम और सहयोग का भाव लेकर ही जी रहे हैं। पर आज नहीं तो कल सोशल मीडिया का संक्रमण लगना ही है… इसे किसी भी तरह रोकना ही होगा।
यह जरूरी नहीं कि राहुल पटेल नामक आईडी से ठाकुरों को गाली दे रहा युवक राहुल ही हो, वह रईस भी हो सकता है। संभव है कि मनोज यादव बन कर ब्राह्मणों को गाली दे रहा युवक भी मंजीत पाण्डेय ही निकले… डॉलर के लोभ में सभी नंगे हो गए हैं। कौन जानता है कि दलित साम्राज्य की आईडी चला रहा व्यक्ति दुबई बैठा है या पाकिस्तान में है… लेकिन इनकी लगाई आग में कूदने के लिए तैयार लोगों की बड़ी संख्या है।
यह देवी देवताओं को गाली देने का आत्मविश्वास कैसे आया है? फर्जी आईडी से दी जा रही गालियों को देख कर लोगों को लगता है कि यह सहज है, हम भी कर सकते हैं। अटेंशन मिलता है, लाइक बरसता है, पैसे मिलते हैं… लड़के शुरू हो जाते हैं। इस असभ्य चलन को रोकना ही होगा…
इसे रोकना बहुत कठिन काम नहीं है। साइबर सेल को थोड़ा मजबूत करने की जरूरत है। यदि दस अपराधी भी ठीक से दंडित हो गए, तो यह खेल रुक जाएगा। सरकार चाहे तो आसानी से कर सकती है। नहीं करेगी तो उसका भी नुकसान होना तय है।


