कौशल सिखौला : ब्रिक्स की थाली में भारत की संस्कृति, शाकाहार पर क्यों मचा हंगामा ?

उन्हें यह गम है कि विदेशी मेहमानों को शाकाहारी खाना क्यूँ परोसा गया ? भारत के अतिरिक्त पूरी दुनिया मांसाहारी है । भारत में भी शाकाहारियों की संख्या घट रही है । साहेब ने पूछा मेहमानों को छोले भठूरे , ढोकला और इडली डोसा क्यों खिलाए ? भारत में मांसाहारी भी बहुत बढ़िया बनता है ? महाराष्ट्र के एक दिमागी नक्सल ने पूछा कि क्या भारत एक मंदिर है जो शाकाहारी मंदिर फूड खिलाकर विदेशियों को बरगलाया गया ? बहुत से फूफाओं को आपत्ति है भारत को मिला क्या ? जब भारत में भी 70% लोग मांसाहारी है , कैबिनेट के अधिकांश सदस्य मांस खाते हैं तो अतिथियों के साथ यह अन्याय क्यों ?

इस बात में कोई शक नहीं कि मांसाहारी फूड आप कहीं भी खाएं । लेकिन बढ़िया पूर्ण शाकाहारी भोजन भारत के अलावा कहीं नहीं मिल सकता । यह भारत ही है जहां एक ही थाली में अनेक दाल सब्जियां और पकवान परोसे जा सकते हैं । मांसाहारी भोजन में वैरायटी बहुत कम है । जानी मानी शैफ तरला दलाल के अनुसार पूरी दुनिया में मांसाहार की जितनी भी डिशेज हैं उतनी तो भारत के दो प्रांतों राजस्थान और यूपी में शाकाहारी मिल जाएंगी ? मांसाहार का स्रोत जीव है , शाकाहार का स्रोत अनंत प्रकृति है । मांसाहार मुग़लों के साथ भारत आया और हिन्दू रियासतों में प्रवेश कर गया ।

Veerchhattisgarh

जो लोग वेदों में मांसाहार ढूंढते हैं वे 100% गलत हैं । उदाहरण के लिए वेदों में जहां पशु भक्षण लिखा गया है उसका संबंध पशु से नहीं है । गुरुकुल कांगड़ी विवि पूर्व वेद विभागाध्यक्ष प्रकांड वैदिक विद्वान वेदमार्तंड पंडित भगवद्गत वेदालंकार कहा करते थे कि वेदों के पशु का अर्थ सूर्य और चन्द्रमा की रश्मियों के भक्षण से है , मांसाहार से नहीं । ब्राह्मण उन्हीं रश्मियों का पान किया करते थे जो अनंत से आती हैं । वेदों में सोमरस का अर्थ भी चन्द्र रश्मियों से जुड़ा है , सुरा अथवा मद्यपान से नहीं । भारत सरकार ने यदि ब्रिक्स के माध्यम से विश्व को शाकाहार का संदेश दिया है तो बहुत बड़ा संदेश है । जीव हत्या पाप है । शाकाहारी सदा सुखी ।

खैर ! ब्रिक्स सम्मेलन में शाकाहार परोसने पर आते हैं । भारत सरकार यदि हजारों शाकाहारी डिशेज , फास्ट फूड , शरबत , अचार , चटनी , सलाद आदि विदेशी मेहमानों को खिलाती है तो यह उनके लिए नया अनुभव है । उन्हें इंडियन फूड यदि तीन दिन मिल भी गया तो कौनसा पहाड़ टूट पड़ा ? विदेशी डेलिगेशन ने भोजन को लेकर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई । फिर भी नाराज फूफा हलकान हो रहे हैं ? दोस्तों आदिम युग में तो सारी दुनिया मांसाहारी ही थी । जैसे जैसे मनुष्य सभ्य होता गया , शाकाहार आता गया और पसंद किया जाता रहा । अब भारत सरकार ने यदि इतने बड़े वैश्विक समारोह में शाकाहार परोसा है तो हम उसकी जी भरके सराहना करते हैं ?

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