अमित सिंघल : 15 अगस्त, PM मोदी के सवा घंटे के सम्बोधन के बीच छुपे सन्नाटे की “आवाज” सुनिए
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के सम्बोधन में चार चुनौतियों का उल्लेख किया है।
प्रथम, नशा, या ड्रग्स। मोदी जी ने कहा कि देश के नौजवानों के सामने नशा एक बहुत बड़ा संकट बनता जा रहा है। नशा मुक्त भारत, यह हम सबका सामूहिक दायित्व होना चाहिए। इसलिए नशा मुक्त भारत, का 100 सप्ताह का एक कार्यक्रम तय किया है।
गृह मंत्री अमित शाह ने जून अंत में कहा था कि हम ड्रग्स के कारोबार के पूरे इकोसिस्टम पर अगले 3 वर्षों में ऐसा प्रहार करेंगे, कि यह दशकों तक उठ न पाए।
द्वितीय, दिमागी नक्सल की बारे में चेतावनी दी है जो हिंसा अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं। समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए भांति-भांति के दांव कर रहे हैं। इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा। इन दिमागी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा और राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।
ध्यान देने की बात है कि मोदी सरकार ने नक्सली माओवादी हिंसा को लगभग समाप्त कर दिया है। वही हिंसा जिसके सामने चिदंबरम ने घुटने टेक दिए थे (चिदंबरम का बयान देख सकते है जिसमे वे अपील कर रहे है कि सोनिया सरकार नक्सलियों से हथियार डालने के लिए नहीं कह रही है)।
मेरा मानना है कि इस दिमागी नक्सल विषाणु को भी मोदी सरकार समाप्त कर देगी। सोशल मीडिया में कॉक्रोचो के बारे में जो खुलासे हो रहे है, कुछ लोग ऐसा कहते है कि उसमे सरकार का हाथ है। आईटी सेल का अर्थ यह नहीं होता कि अमित मालवीय स्वयं खुलासा करने लगेंगे।
तृतीय, कोचिंग क्लासेस की स्पर्धा के कारण आम परिवार पर आर्थिक बोझ की समस्या। अतः सरकार ने विभिन्न परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग करने का निर्णय किया है। यह मूव कोचिंग माफिया को निष्प्रभावी कर देगा।
चतुर्थ, युद्ध के बदलते स्वरुप की चुनौती के बारे में आगाह किया है। उन्होंने कहा कि अब युद्ध सीमा पर ही होता है यह गारंटी नहीं है। आज युद्ध सीमा के अंदर कहीं रिफाइनरी में, कहीं बैंकिंग सेक्टर, कहीं डाटा सेंटर पर अटैक करके, फैक्ट्रियां तोड़ी – एक प्रकार से लड़ाई का नया रूप इंफ्रास्ट्रक्चर तोड़ने का हैं। उससे निपटने के लिए सरकार ने मिशन सुदर्शन चक्र की पिछले सालों घोषणा की थी; बहुत तेजी से उस पर काम चल रहा है।
इसी वक्तव्य में निहित है कि अगले युद्ध के समय सरकार शत्रु पर कैसा प्रहार करेगी।
साथ ही, याद करिए लोग अग्निवीर को लेकर कितने क्रोधित थे।
अंत में, प्रधानमंत्री मोदी ने सीमापार से “प्रेषित”आतंकवाद या आतंकी देश का नाम, अप्रत्यक्ष रूप से भी, एक बार भी नहीं लिया। ऐसा क्या हो गया है?
सवा घंटे के सम्बोधन के बीच छुपे सन्नाटे की “आवाज” सुनिए।


