सुरेंद्र किशोर : पद्म सम्मानों के बारे में गृह मंत्री अमित शाह की राय
केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कल अहमदाबाद में कहा कि ‘‘पद्म श्री,पद्म भूषण,पद्म विभूषण और भारत रत्न उनके लिए नहीं हैं जिन्हें आप जानते हैं।यह किसी परिवार के लिए भी नहीं है।यह उनके लिए है,जो किसी प्रशंसा की उम्मीद के बिना भारत माता के गरीबों के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं।’’
गृह मंत्री ने सन 2022 के पद्म श्री अवार्डी सावजी भाई की चर्चा करते हुए बताया कि सावजी भाई ने कहा है कि मैंने तो पद्म श्री अवार्ड के लिए आवेदन पत्र भी नहीं दिया था,फिर भी मुझे अवार्ड मिला।
खुद मुझे (यानी सुरेंद्र किशोर को)जब 2024 में पद्म श्री अवार्ड मिला तो गृह मंत्री अमित शाह ने मुझे एक पेज का व्यक्तिगत पत्र लिखा।(उससे पहले या बाद में अमित शाह जी से मेेरी कभी कोई मुलाकात तक नहीं है।फोन पर उनकी शुभकामनाएं अब जरूर मिलती हैं पद्म श्री अवार्ड मिलने के बाद।)
हमारे अत्यंत व्यस्त गृह मंत्री जी के पत्र की भाषा-शैली-उद्गार से आपको लग जाएगा कि यदि मुझे सिफारिश पर यह अवार्ड मिला होता तो कोई केंद्रीय गृह मंत्री ऐसी चिट्ठी नहीं लिखते।
मैंने तो पद्म श्री अवार्ड मिलने के बाद ही जाना कि इसके लिए आवदेन देने के लिए एक फार्म भी भरना पड़ता है।संभवतः किसी अन्य ने मेरे लिए फार्म भर दिया होगा।
सन 1954 में पद्म सम्मान की स्थापना भारत सरकार ने की थी।
तब से आज तक बिहार में कार्यरत किसी बिहारी पत्रकार को यानी मुझे पहली बार पद्म श्री अवार्ड मिला।यह सम्मान बिहार के पत्रकार जगत का भी है, इसे कम ही लोगों ने याद रखा।

मुझे अवार्ड मिलने के बाद स्वाभाविक ही है कि इस पर तरह- तरह की प्रतिक्रियाएं आईं।मिश्रित,सुखद,उत्साहबर्धक और कुछ पीड़ाजनक भी।ईष्र्यालुओं को यह नहीं मालूम कि मैंने किसी से कभी नहीं कहा था कि मुझे यह अवार्ड चाहिए।
मैंने हमेशा यह माना कि किसी पत्रकार के आम पाठक ही उसके बारे में सही आकलन करते हैं।उनकी सराहना ही सबसे बड़ा पुरस्कार है।
बाकी तो संस्थानों के आकलन कई बार आब्जेक्टिव भी हो सकते हैं और सब्जेक्टिव भी।
अवार्ड मिलने पर नाहक आप ईष्र्यालुओं, जातिवादियों के द्वेष -ईष्र्या-जलन के पात्र भी बन जाते हैं।यह सब बोनस में मिलता है।इससे आप बच नहीं सकते।
इसलिए जब मुझसे पूछा गया था तो मैंने कहा था कि मैं अपने परिवार खास कर पत्नी की खुशी के लिए पद्म श्री अवार्ड स्वीकार कर लूंगा।
जब आडवाणी साहब उप प्रधान मंत्री थे तो उनके अत्यंत करीबी व राज्य सभा के सदस्य दीनानाथ मिश्र (जो नव भारत टाइम्स के पटना संस्करण के स्थानीय संपादक भी रहे चुके थे।मेरा काम देख चुके थे।)ने मुझे दिल्ली से फोन किया–‘‘आडवाणी जी आपको एक बड़ा सम्मान देना चाहते हैं ,क्या आप उसे स्वीकार करेंगे ?
मैंने विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया था।ऐसे अन्य उदाहरण भी हैं।
सन 1983 में बाॅबी हत्या कांड को उजागर करने के लिए मुझे ‘‘श्रमिक अवार्ड’’ के लिए चुना गया।
वह पुरस्कार मुझे व दैनिक प्रदीप के परशुराम शर्मा को संयुक्त रूप से मिलना चाहिए था।क्योंकि हम दोनों ने मिलकर खतरा उठाकर उस कांड को उजागर किया था।जिस हत्याकांड का एफ.आई.आर.करने के लिए उसका परिजन तैयार नहीं था,उसे उजागर करना खतरनाक था।पर वरीय एस.पी.किशोर कुणाल और डी.एम.आर.के.सिंह के कारण हम बचे गये।कलक्टर ही कब्र से लाश निकालने का आदेश देते हैं।
पुरस्कार समिति के प्रमुख साहित्यकार व पूर्व सांसद शंकर दयाल सिंह थे ,उन्होंने नाम तय करने से पहले मुझसे मेरी राय भी नहीं पूछी थी।
मैंने श्रमिक पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया ।क्योंकि वैसा न करने से कुछ लोग
सवाल उठा सकते थे कि शंकर दयाल बाबू ने स्वजातीय को तो पुरस्कृत कर दिया,पर परशुराम शर्मा को छोड़ दिया।
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पुनश्चः–भारत सरकार -बिहार सरकार के ध्यानार्थ
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पद्म सम्मान अवार्डियों के लिए केंद्रीय स्तर पर मानदेय का प्रावधान नहीं है।
अब नरेंद्र मोदी जी के शासनकाल में आर्थिक रूप से अत्यंत विपन्न लोगों को भी पद्म अवार्ड मिलने लगा है। उनकी विपन्नता देखकर ओडिशा-30 हजार रुपए मासिक,तेलांगना –25 हजार रुपए मासिक और दो अन्य राज्य सरकारें 10 -10 हजार रुपए मासिक अपने यहां के अवार्डियों को मासिक मानदेय देना शुरू कर दिया।
बिहार में भी ऐसे कुछ पद्म श्री अवार्डी हैं जिनकी मासिक आय 5 हजार रुपए से भी कम है।उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
इसी साल जदयू के नीरज कुमार की ध्यानाकषण सूचना पर सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चैधरी ने 25 फरवरी 2026 को बिहार विधान परिषद में कहा कि पद्श्री अर्वाडियों को मानदेय या आर्थिक सहायता देने पर सरकार विचार करेगी।
25 मई 2026 को मुख्य मंत्री सम्राट चैधरी ने एक समारोह में कहा कि ‘‘पद्म पुरस्कार पाने वालों ने अपने असाधारण योगदान से न केवल अपने क्षेत्र को
गौरवान्वित किया,बल्कि भारत की प्रतिभा ,संस्कृति व सामथ्र्य को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई।’’
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आयकर दाता अवार्डियों को छोड़कर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मानदेय देने के बारे में बिहार सरकार विचार करे।
भारत सरकार भी मानदेय के बारे में पूरे देश में समरुपता लाने पर विचार करे।


