कौशल सिखौला : सनातन में प्रश्न करने की स्वतंत्रता, राजनीति में अपमान की छूट!

पुस्तकों में कुछ गलत लगे तो अधिकृत विद्वानों अथवा शिक्षकों से समझ लेना चाहिए । स्कूल कालेजों में यही होता है । जब कोई पाठ , फॉर्मूला या समीकरण समझ न आए तो गुरुजी उसका समाधान करते हैं । धार्मिक पुस्तकों अथवा अध्यात्म में कुछ गलत लगे तो समझाने के लिए बहुत से गुरुजन मौजूद हैं । खासकर हमारी प्राचीन आध्यात्मिक पुस्तकों में जो लिखा है वह बड़ा गूढ़ है । मंत्रों के अर्थ ढंग से नहीं समझ पाएं तो सवाल उठाइए । सनातन में जिज्ञासा शांत करने पर प्रतिबंध नहीं है । यह धर्म जो लिखा है उस पर प्रश्न करने की अनुमति देता है । सनातन जीवंत , जागृत और चैतन्य धर्म है । यहां कुछ भी थोपा नहीं गया , समाधान विद्यमान है ।

मनुस्मृति अथवा मानस से संबंधित प्रकरणों का अपमान राजनीति सदा करती आई है । बार बार इन्हें गलत ठहराने का प्रयास किया जाता है । अफसोस की बात है कि यह काम विभिन्न राजनीतिक दलों के हिन्दू नेता अधिक करते हैं । किसी भी मुस्लिम नेता ने कभी भी हिन्दू देवताओं और महापुरुषों पर कोई टिप्पणी नहीं की । उदाहरण के लिए बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर और यूपी के स्वामीप्रसाद मौर्य ने मानस को गलत ठहराया । यह और बात है कि उसी दिन से वे राजनैतिक रंगमंच पर उदित राज की तरह महाशून्य हो गए । दोबारा पनपे ही नहीं । ताजा बयान जिन श्रीमान का है उन्हें हिन्दू नेता तो नहीं कहा जा सकता । लेकिन उनके पास संसद में संवैधानिक पद है जिसकी गरिमा बनाना उन्हीं के हाथ है । उनसे गांभीर्य की उम्मीद की जाती है ।

Veerchhattisgarh

राहुल गांधी हों या कोई और विपक्षी नेता ; किसी में हिम्मत नहीं कि वे कुरान या हदीस के खिलाफ एक लफ़्ज़ भी बोल सकें । लेकिन जिस मनुस्मृति में — यत्र नारियस्त पूज्यंते रमंते तत्र देवता – लिखा है , उसे स्त्री विरोधी ठहराने से उन्हें जरा भी गुरेज नहीं । वे ही नहीं , घोर आश्चर्य की बात यह है कि देश के और भी कईं नेता 110 करोड़ हिन्दुओं को आहत करने वाली आदि पुस्तकों का उपहास उड़ाने से उन्हें जरा भी परहेज नहीं करते । यही वजह है कि लोग कहने लगे हैं कि इससे तो उनके स्थान पर प्रियंका को एल ओपी बना दिया जाता ।

खैर ! यह राजनीति है प्यारे इसके रंग हजार हैं । देश में अब ऐसा ही चलना है कर भी क्या सकते हैं । हम पहले भी कह चुके हैं आने वाले चुनाव अब खासे गर्म होते जाएंगे । विपक्ष के पास सवालों के भंडार हैं , बीजेपी के सत्ता में होने की विवशताएं हैं । पिछले कुछ समय से कांग्रेस या विपक्ष के आईटी सेल काफी तीखे हो गए हैं । लेकिन बीजेपी आईटी सेल जवाब देने में पिछड़ गया है । दरअसल इसे बीजेपी की स्ट्रेटजी कहें या वीकनेस , अभी समझना पड़ेगा । इतना जरूर है कि आने वाले दिनों में दलीय संघर्ष और बढ़ेगा । शब्द बाण तीखे और कडुए होते जाएंगे । माहौल का इस दरदा बिगाड़ना , इतना कटु होना लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं । तो संभालिए मित्रों सत्ता में कोई रहे , देश तो रहना चाहिए ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *