अमित सिंघल : भारत एवं चीन के आंकड़े, व्हाट्सएप वाला “ज्ञान” ना दे
सोशल मीडिया पर एक चार्ट घूम रहा है जिसमे G20 राष्ट्रों की जीडीपी वृद्धि (compound annual growth rate) दर की वर्ष 2004-14 एवं 2014-26 के मध्य तुलना की गयी है। भारत एवं चीन के आंकड़े मैंने स्वयं चेक किये है, अतः व्हाट्सएप वाला “ज्ञान” ना दे।

स्पष्ट है कि जिस अवधि (2004-14) में चीन 18.30 प्रतिशत से बढ़ा था, उसमे भारत की जीडीपी 7 वें नंबर पर केवल 10.90 प्रतिशत से बढ़ी थी। दूसरे शब्दों में, चीन के विकास ने अन्य देशो के विकास दर को भी बढ़ा दिया था जिसका कारण था अधिक खनिज एवं कच्चे तेल (commodities) का चीन द्वारा आयात। तभी भारत के ऊपर ब्राज़ील, रूस, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना एवं सऊदी बैठे हुए थे।
लेकिन वर्ष 2014-26 के दौरान भारत 6.10 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि (compound annual growth rate) दर से टॉप पर है। चीन दूसरी पायदान पर है और अभी भी भारत की पकड़ से बहुत दूर है। मोदी सरकार को दो वर्ष कोरोना महामारी से भी जूझना पड़ा था।
दोनों अवधी के आंकड़े नॉमिनल जीडीपी के है जिसमे मंहगाई (अर्थात, बाजार भाव) से हुई वृद्धि भी काउंट की जाती है (जैसे कि अगर कोई उत्पाद एक वर्ष पूर्व 10 रुपये का थे और अब 12 रुपये का, तो 12 काउंट होगा)। दूसरे शब्दों में, अगर मंहगाई बढ़ी हुई है, तो जीडीपी भी बढ़ी हुई देखेगी। रियल जीडीपी दर नहीं, जिसमे मंहगाई को नहीं जोड़ा जाता है (अगर कोई उत्पाद एक वर्ष पूर्व 10 रुपये का थे और अब 12 रुपये का, तो भी 10 काउंट होगा)।
यह अंतर आवश्यक है क्योकि सोनिया-मनमोहन-चिदंबरम के दस वर्ष में औसत सालाना महंगाई दर 8.2% थी जबकि मोदी सरकार में 4.6% है। रियल जीडीपी की तुलना के लिए दोनों अवधी के बेस ईयर को एक करना होगा (अभी अलग-अलग है)। अतः, इस विश्लेषण को अभी नहीं करते है।
कहने का मतलब यह है कि चीन तथा अन्य उभरते हुए देश भी प्रगति कर रहे थे जिसका लाभ सोनिया सरकार को मिला था। सोनिया सरकार के समय में भारत की दर अन्य विकासशील देशों के दर से भी कम थी और चीन से कहीं बहुत कम थी।
लेकिन मोदी सरकार के समय में क्या स्थिति है? मोदी सरकार के दौरान विश्व में मंदी छाई हुई है जबकि भारत प्रगति कर रहा है और सबसे तेज प्रगति कर रहा है।
अनुकूल वैश्विक आर्थिक स्थिति के बाद भी सोनिया की अक्षमता के कारण भारत ने एक दशक खो दिया था।
वास्तव में, आमजन यह नहीं समझता कि 2004 से 2014 के समय ग्लोबल आर्थिक प्रगति कितनी भव्य थी। इस अवधी में कई देशों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धी का सृजन किया था।
और इसी अवधी में, हमें सोनिया के समय NPA (अत्यधिक खराब लोन), माल एवं सेवा के निर्यात से अधिक आयात (अधिक current account deficit), अधिक महंगाई, शीर्ष पर अत्यधिक भ्रष्टाचार, अर्थव्यवस्था में नक्सली विचारधारा, और ‘ट्विन बैलेंस शीट’ (जब बैंकिंग एवं कॉर्पोरेट वर्ल्ड, दोनों की वित्तीय स्थिति दुर्बल हो) की समस्या मिली।
क्या यह संभव नहीं था कि अगर चीन 18.30 प्रतिशत की दर से प्रगति कर रहा था, तो भारत अपनी वृद्धि दर को – कुछ नहीं तो -18.50 प्रतिशत ले जाता। लेकिन जो लोग घोटाला, तुष्टिकरण, परिवारवाद, नक्सलवाद, नारेबाजी, मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को “फिक्स” करने के अभियान में लिप्त हो, वे चीन से कम्पटीशन के बारे में सोचेंगे ही क्यों?
इसीलिए 2004 -14 का समय हमारे लिए ‘खोया हुआ दशक’ है।
क्या आप उसी “खोये हुए दशक” को वापस लाना चाहते है?


