श्रद्धांजलि की लौ से खेल का उजाला, सुनील जैन ने पिता की स्मृति को युवाओं के भविष्य से जोड़ा
पिता की खेल विरासत को पुत्र ने मैदान पर दी नई उड़ान
स्व. जसराज जैन की स्मृति में अंतरजिला फुटबॉल टूर्नामेंट, कोरबा एफसी ने पेनल्टी शूटआउट में जीता खिताब
सुनील जैन का प्रयास बना खेल प्रतिभाओं के लिए मंच, स्मृति को सेवा और संकल्प में बदलने की प्रेरक पहल
कोरबा। कुछ विरासतें संपत्ति की नहीं होतीं, विचारों की होती हैं। कुछ स्मृतियां तस्वीरों और शब्दों में नहीं, बल्कि उन कामों में जीवित रहती हैं जिन्हें अगली पीढ़ी आगे बढ़ाती है। वरिष्ठ पत्रकार एवं खेलप्रेमी स्व. जसराज जैन की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित अंतरजिला फुटबॉल टूर्नामेंट इसी भावनात्मक विरासत की एक खूबसूरत तस्वीर बनकर सामने आया।

एसईसीएल कोरबा खेल मैदान में आयोजित इस प्रतियोगिता का रोमांचक फाइनल मुकाबला कड़े संघर्ष के बाद पेनल्टी शूटआउट तक पहुंचा, जहां कोरबा एफसी ने बाजी मारते हुए खिताब अपने नाम किया। मैदान में खिलाड़ियों का जोश था, दर्शकों की तालियां थीं और वातावरण में उस व्यक्ति की स्मृति थी, जिसने कभी कोरबा के स्कूली मैदानों पर फुटबॉल की प्रतिभाओं को अवसर देने का सपना देखा था।

स्व. जसराज जैन का फुटबॉल से गहरा लगाव रहा। रोटरी क्लब के माध्यम से उन्होंने लंबे समय तक शालेय स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया। दो दशक से अधिक समय तक उन्होंने बच्चों और युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए प्रयास किए। उनके लिए खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन और आत्मविश्वास का माध्यम था।
आज उनके जाने के बाद उसी सोच को आगे बढ़ाने का बीड़ा उनके पुत्र सुनील जैन ने उठाया है। पिता की स्मृति में अंतरजिला स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित करना केवल एक आयोजन करना नहीं, बल्कि उस अधूरे सफर को आगे बढ़ाने का प्रयास है, जिसकी शुरुआत कभी जसराज जैन ने की थी।
सुनील जैन की यह पहल इसलिए भी अनुकरणीय कही जा सकती है कि उन्होंने स्मृति को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने उसे युवा प्रतिभाओं के लिए अवसर, खिलाड़ियों के लिए मंच और समाज के लिए प्रेरणा में बदलने का प्रयास किया। ऐसे आयोजन उन खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, जिन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बड़े मंच का इंतजार रहता है।
महापौर संजू देवी सिंह राजपूत ने कहा कि स्व. जसराज जैन फुटबॉल के प्रति विशेष लगाव रखते थे। उन्होंने रोटरी क्लब के माध्यम से कोरबा में लगातार शालेय स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया। उनकी स्मृति में खेल भावना को आगे बढ़ाने वाला यह आयोजन सराहनीय है।
टूर्नामेंट का शुभारंभ कोरबा प्रेस क्लब अध्यक्ष नौशाद खान ने किया। उन्होंने कहा कि स्व. जसराज जैन अपनी निर्भीक पत्रकारिता के साथ-साथ खेलप्रेम के लिए भी सदैव याद किए जाएंगे। उन्होंने लंबे समय तक स्कूल स्तर पर फुटबॉल प्रतियोगिताओं के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और युवाओं को खेलों से जोड़ने का कार्य किया।
दूसरे सेमीफाइनल में पूर्व महापौर जागेश लांबा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने स्व. जसराज जैन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनसे जुड़े संस्मरण साझा किए।
फाइनल अवसर पर सभापति नूतन सिंह ठाकुर, चेंबर अध्यक्ष योगेश जैन, प्रेस क्लब संरक्षक कमलेश यादव, वरिष्ठ पत्रकार किशोर शर्मा, सादिक शेख, महावीर इंटरकॉन्टिनेंटल सर्विस के अध्यक्ष महावीर जैन, रोटरी क्लब अध्यक्ष सतनाम सिंह, प्रवीण अग्रवाल, राज सिंह सहित बड़ी संख्या में नागरिक एवं खेलप्रेमी उपस्थित रहे। वरिष्ठ खिलाड़ी धन बहादुर एवं सुभेंदु दास ने भी खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील जैन ने उपस्थित दर्शकों एवं नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन स्व. जसराज जैन के खेलप्रेम और युवाओं को खेलों से जोड़ने की सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है। संतोष जैन ने मैदान एवं खेल व्यवस्था तथा अनुराग जैन ने आयोजन एवं संचालन की जिम्मेदारी संभाली।
दरअसल, किसी व्यक्ति को याद करने के अनेक तरीके हो सकते हैं। कोई तस्वीर पर पुष्प चढ़ाता है, कोई श्रद्धांजलि सभा करता है और कोई उसकी स्मृतियों को समाज के लिए उपयोगी कार्यों में बदल देता है। सुनील जैन ने अपने पिता की स्मृति को खेल के मैदान तक पहुंचाकर तीसरा रास्ता चुना है।
आज जब मैदान में युवा खिलाड़ी पूरी ऊर्जा के साथ गेंद के पीछे दौड़ रहे थे, तो यह केवल एक फुटबॉल मुकाबला नहीं था। यह उस सोच की निरंतरता थी, जिसने कभी कोरबा के बच्चों के हाथों में किताबों के साथ फुटबॉल थमाने और उन्हें मैदान तक लाने का सपना देखा था।
जसराज जैन नहीं हैं, लेकिन उनके सपनों की गेंद अभी भी मैदान में है। उसे आगे बढ़ाने का प्रयास सुनील जैन कर रहे हैं। यही पिता की स्मृति को जीवित रखने का सबसे सुंदर और सार्थक तरीका है।


