सर्वेश तिवारी : एक युवा संत की 4 मिनट की अभिव्यक्ति और सनातन के हजार रंगों का अनकहा दर्द

पश्चिम बंगाल में एक सनातनी संप्रदाय है मतुआ संप्रदाय। गूगल बता रहा है कि मूल रूप से वहां के अनुसूचित जाति वाले हिन्दुओं का ही यह सम्प्रदाय है… सन अठारह सौ साठ के आसपास हरिश्चंद्र ठाकुर जी ने बंगाल के फरीदपुर(अब बंगलादेश में पड़ता है) से एक सामाजिक धार्मिक आंदोलन चलाया था, उनके अनुयायी मतुआ संप्रदाय से जुड़े हैं।

Veerchhattisgarh

बांगलादेश के हिन्दुओं में भी इनकी बड़ी संख्या है। सन सत्तर के बाद बांगलादेश से भाग कर आये हिन्दुओं में सबसे बड़ी संख्या इन्ही की है।
काशी में गंगा महासभा के तत्वावधान में आयोजित संस्कृति संसद में देश भर से साधु संत पधारे हैं। यहीं मतुआ संप्रदाय के एक प्रतिनिधि संत को सुनने का अवसर मिला। उनका नाम सुने पर भूल गए। हाँ उनके चार मिनट के सम्बोधन में जो बात याद रह गयी वो यह है कि “पहली बार ऐसे किसी बड़े धार्मिक आयोजन में हमें बुलाया गया है, हमें बहुत अच्छा लग रहा है। सत्य सनातन धर्म की रक्षा के लिए ऐसे आयोजन देश के हर राज्य में होने चाहिए।”
उस युवा सन्यासी की इस बात पर देर तक सोचता रहा हूं। हिन्दू धर्म किसी एक संप्रदाय का नाम नहीं है, इसके हजार रूप हैं। देश के अलग अलग क्षेत्रों में जाने कितने ही सनातनी संप्रदाय हैं। उनकी पूजा पद्धति अलग है, उनका रहन सहन अलग है, आध्यात्मिक मान्यताओं में भी थोड़ा भेद हैं। हाँ इतना जरूर है कि सबकी आत्मा एक है, और सभी मिल कर ही विराट हिन्दू धर्म बनाते हैं। क्या समय समय पर इन सभी को एक साथ, एक मंच पर लाने की आवश्यकता नहीं?
मैं अपनी कहूं तो पहले कभी इस समुदाय का नाम नहीं सुना था। केवल इनका ही क्यों, ऐसे अनेक सनातनी संप्रदाय होंगे जिनके बारे में हम नहीं जानते। अपनी ही उलझनों को सुलझाने में लगे रहने वाले हम सामान्य गृहस्थ सबको जान भी नहीं सकते। हाँ इतना जरूर याद रहना चाहिए कि हमारे हजार रंग हैं। इतनी साहिष्णुता हम सभी में होना चाहिए कि हम हर रंग का सम्मान करें, अपनी हर आध्यात्मिक धारा का आदर करें।
किसी एक परम्परा के साधु सन्यासी की ठिठोली से असहमत हो कर गाली गलौज पर उतर आने वाले युवकों में थोड़ा धैर्य होता तो कितना अच्छा होता। अपनों से थोड़ी सी असहमति हो, तब भी उनके विरुद्ध नहीं जाना चाहिए।
संस्कृति संसद की अनेक उपलब्धियों में एक उपलब्धि उस युवा सन्यासी के मुख पर पसरा संतोष भी है, जो इस आयोजन में आने के बाद आया है। बहुत बहुत बधाई गंगा महासभा को…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *