विद्यासागर वर्मा : ईंश्वर प्रदत्त वेद स्वत: प्रमाण

वेदों के यथार्थ स्वरूप को जानने के लिए निम्न पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है , अन्यथा अर्थ का

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सर्वेश तिवारी श्रीमुख : स्त्री दिवस ! विश्व अंधेरे में था तब हमारी संस्कृति की बेटियां वेद रच रही थीं..

सोच कर ही गर्व होता है कि आज से दस हजार वर्ष पूर्व जब अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप में सभ्यता बसी

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वैदिक माइक्रोबायोलॉजी एक वैज्ञानिक दृष्टि रमेश चन्द्र दुबे

वेदज्ञान किसी भी एक ॠषि नही अपितु अनेक ॠषियों के ज्ञान का समूह है जो कई सहस्र ॠचाओं के रूप

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वेदों में अग्नि.. सिगरेट पीने वालों…

अग्नि की प्रार्थना उपासना से यजमान धन, धान्य, पशु आदि समृद्धि प्राप्त करता है। उसकी शक्ति, प्रतिष्ठा एवं परिवार आदि

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वेदों में मेधा, विचार शक्ति के लिए प्रत्यक्ष देव सूर्यदेव से विनय

गहनता से सोचने और उस इच्छित फल के लिए अपनी सम्पूर्ण ध्यान -शक्ति समर्पित कर देने से विचार बलवान हो

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विद्यासागर वर्मा : वैदिक मान्यताएं कर्म सिद्धांत..कर्म और पुनर्जन्म..कर्म और भाग्य

महाभारत में इस आशय को इस प्रकार स्पष्ट किया गया है  — “केवलं ग्रहनक्षत्रं न करोति शुभाशुभम् । सर्वमात्मकृतं कर्म

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ॐ अभय कीजिये.. वेंदो में सूर्यदेव से शत्रु विनाश आह्वान के सूक्त

लोग सोचते हैं कि हम मंत्रो का जप करेंगे और शत्रुओं का नाश हो जाएगा। ऐसा नहीं होता। शत्रु वास्तविक

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विद्यासागर वर्मा : 22 दिसंबर से उत्तरायण तथा मकर संक्रान्ति आरंभ..

उत्तरायण तथा मकर संक्रान्ति की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।              ( तमसो मा ज्योतिर्मय !

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एक वेद सूक्त प्रतिदिन व्हाट्सएप पर इस लिंक पर पाएं..

यस्य॑ सं॒स्थे न वृ॒ण्वते॒ हरी॑ स॒मत्सु॒ शत्र॑वः। तस्मा॒ इन्द्रा॑य गायत॥ – ऋग्वेद (1.5.4) (जुड़ने के लिए इस लिंक https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=374288617719032&id=166351765179386 में जाएं) Whatsapp

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वैदिक मान्यताएँ जीव (36) मरणोपरान्त जीव की गति (भाग-1)

शोक / श्रद्धांजलि सभाओं में दिवंगत आत्मा के लिये सद्गति की प्रार्थना की जाती है। प्रार्थना का अभिप्राय होता है

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योगेश्वर श्रीकृष्ण : विराट भारतीय संस्कृति, जीवन दर्शन के अतुलनीय महानायक

सुदृढ़ राष्ट्र स्थापना..लगभग 70 वर्ष की उम्र में महाभारत युद्ध के दौरान श्री कृष्ण के विचार थे कि धर्म स्थापना

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क्या वेदों में पशुबलि, मांसाहार आदि का विधान है ?

वेदों से ही महामृत्युंजय-गायत्री मंत्र आएं हैं। किसी भी पंथ-मत के लोगों को पूछिए, वे अपने पूजनीय ग्रंथ का नाम

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अनंत नेत्रों से देख कर्मानुसार फल देते हैं सूर्यदेव

सूर्य देव मानसिक शांति प्रदान करके वे सब प्रकार का सुख प्राप्त कराते है। जो मानव को अभीष्ट हैं और

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वैदिक मान्यताएँ : ईश्वर व ईश्वर का स्वरूप (भाग 2)

वह परमपुरुष बिना शरीर के, बिना इन्द्रियों के ऐसे काम करता है मानो उसके असंख्य सिर हों, असंख्य आँखें हों

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वेदों में सूर्यदेव का आह्वान..

वैदिक वाङ्मय सूर्यदेवता के महात्म्य, उनकी विश्व संचालन में चेतनात्मक भूमिका तथा सूर्योपासना के लाभों के विवरणों से भरा पड़ा

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ईश्वर की सत्ता के प्रमाण – 03

सृष्टि की रचना के लिये प्रवृत्ति (चेष्टा, इच्छा, संकल्प) की आवश्यकता होती है जो जड़ प्रकृति में नहीं है। उदाहरणार्थ

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वैदिक मान्यताएं

द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परि षस्वजाते। तयोरन्य: पिप्पलं स्वाद्वत्तयनश्ननन्यो अभिचाकशीति ।। — ऋग्वेद 1.164.20 दो पक्षी, सुन्दर पंखों

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वेदों में पितरों का आह्वान : समृद्ध, सरल जीवन के लिए ये करें पितृ पक्ष में..

इस बार पितृ पक्ष 16 द‍िन की अवधि में 2 सितंबर से17 सितंबर तक है। इसमें सनातन धर्म के लोग

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वेदों में नारी – गुरु, शिष्य, माता, योद्धा, राजा, सम्राट और क्या क्या ?

वेद नारी को अत्यंत महत्वपूर्ण, गरिमामय, उच्च स्थान प्रदान करते हैं। वेदों में स्त्रियों की शिक्षा- दीक्षा, शील, गुण, कर्तव्य,

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