प्रसिद्ध पातकी : विष्णु सहस्रनाम में “सुव्रत” नाम की व्याख्या

आज से करीब दस बरस पहले स्वामी गिरीशानंद जी के साथ सत्संग लाभ का सौभाग्य बना. आप वृंदावन वाले स्वामी

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कमलकांत त्रिपाठी : तुलसी का योगदान भाग-13.. तुलसी का काव्य-सौष्ठव

तुलसी का योगदान-तेरह तुलसी का काव्य-सौष्ठव एक-रामचरितमानस का लोक-रूपक: धान (चावल) रूपी सत्कर्म का फलित सुमति भूमि थल हृदय अगाधू।

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प्रसिद्ध पातकी : एक अद्भुत व्याख्या विष्णु सहस्रनाम के एक अंश की

कानों में जरा कह दे कि आएं कौन दिशा से हम? ————————— विष्णु सहस्रनाम में वैसे तो भगवान श्रीमन्नारायण के

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सर्वेश तिवारी श्रीमुख : कैसे आते हैं श्रीराम!

कैसे आते हैं श्रीराम! १- उस घने वन में एक ओर सीधे सादे भीलों की बस्तियां होतीं थीं, तो दूसरी

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सर्वेश तिवारी श्रीमुख : मनुष्य के सबसे सुंदर अंग पांव.. इतने सुंदर कि उन्हें पूजा जाता है…

पुरुष की प्रतिष्ठा उसकी स्त्री तय करती है और स्त्री का सौंदर्य उसका पुरुष। कुछ तस्वीरें बहुत सुन्दर होती हैं।

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कमलकांत त्रिपाठी : याद हो कि न याद हो..सनातनी आस्था और भौतिकवादी अनास्था…

याद हो कि न याद हो: सनातनी आस्था और भौतिकवादी अनास्था (तिवारी जी से बातचीत) तिवारी जी संकल्प सत्ता और

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डाॅ. चन्द्र प्रकाश सिंह : हमारे पूजन में कैसा विज्ञान अंतर्निहित है…

हम रोज नारा सुनते हैं दुनिया हमसे सीखने को तैयार है, लेकिन प्रश्न उठता है कि दुनिया हमसे क्या सीखने

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योगी अनुराग : ये पुरी के श्रीजगन्नाथमन्दिर का बड़-देउल है, यानी गर्भगृह का यशस्वी शिखर!

वैसे तो श्रीमन्दिर में प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह तक कुल पांच (या चार) शिखरनुमा निर्माण दीखते हैं, किन्तु ज़ाहिर

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भारत के वैदिक अनुसंधान से मिलती आधुनिक प्रेरणा

वैदिक काल से ही हमारे अनुसंधान अत्यंत समृद्ध थे। महर्षि भारद्वाज के विमान प्रौद्योगिकी पर किए गए शोध तो सदैव

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इसी शिला पर श्रीकृष्ण का जन्म हुआ

श्रीकृष्णजन्मभूमि में यही कंस के कारागृह में यही वह शिला है जिसपर भगवान् श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। जहाँ पर भगवान

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आज समाप्त हुआ चातुर्मास.. आशुतोष अब कैलाश चले

ब्रह्मांड पर अब विष्णु भगवान का साम्राज्य आज समाप्त हुआ चातुर्मास देव जागरण के साथ मांगलिक कार्य प्रारम्भ विष्णु और

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आत्मा को विद्युत प्रवाह (बिजली) माने तो उसी से प्रकाशित “बल्ब” शरीर के सामान है

 शरीर सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) में वर्णन है कि संसार से बंधी हुई आत्मा, “मृत्यु लोक”, (अर्थात ब्रह्माण का वो

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दीपपर्व पर विष्णुजी के स्थान पर महालक्ष्मी के संग मां सरस्वती-श्रीगणेश का पूजन क्यों..?

दीपपर्व पर मां महालक्ष्मी के संग मां सरस्वती-श्रीगणेश का पूजन किया जाता है लेकिन श्रीहरि विष्णुजी का नहीं… इसका कारण

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वेदों से कुछ ज्योतिष प्रमाण

यानि नक्षत्राणि दिव्यन्तरिक्षे अप्सु भूमौ यानि नगेषु दिक्षु। प्रकल्पयंश्चन्द्रमा यान्येति सर्वाणि ममैतानि शिवानि सन्तु।। (अथर्व. 19/9/1) जिन नक्षत्रों को चंद्रमा

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डाॅ. चन्द्र प्रकाश सिंह : कोई भी पूर्ण रूप से नास्तिक नहीं होता..

दुनिया में कोई भी व्यक्ति पूर्ण नास्तिक न हुआ है न हो सकता है। नास्तिकता का अभिप्राय मात्र ईश्वर की

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डाॅ. चन्द्र प्रकाश सिंह : भोग के प्रतीक रावण का दग्ध होना भारत की चेतना का प्रतिबिम्ब

आज रावण को जलाने का दिन है, लेकिन कुछ लोग रावण को नहीं जलाना चाहते। रावण जलता तो बहुतों का

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योगेश किसले : दुर्गासप्तशती मार्कण्डेय पुराण का एक अंश है

दुर्गाशप्तशती के बारे में पहले भी बता चुका हूँ कि इसमें केवल उपासक और उसके परिजनों के कल्याण की कामना

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प्रसिद्ध पातकी : पितृ पक्ष और विष्णु सहस्रनाम

‘‘आया कनागत बंधी आस, बामन उछलें नौ-नौ बांस’’….लोक में यह कहावत पितृ पक्ष को लेकर आम है। यह पक्ष आने

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देवांशु झा : वाल्मीकि रामायण.. भारत का पितृसत्तात्मक समाज…!!

इस मनुवादी सभ्यता-संस्कृति पर एक आरोप यह भी लगता रहा है कि यह पितृसत्तात्मक या पुरुषवादी संस्कृति है। बल्कि हिन्दू

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