अमित सिंघल : हिंसा विरोध में कट्टर विपक्षी भी सरकार के साथ

फ्रांस में एक पखवाड़े से हाई स्कूल (भारत के इंटर कॉलेज के समकक्ष) छात्रों के विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। संभव है कि छात्रों की मांगे वास्तविक हो; संभव है कुछ वास्तविक, कुछ अतिश्योक्ति।

लेकिन विषय यह नहीं है।

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महत्वपूर्ण यह है सरकारी अधिकारियों ने कट्टर वामपंथी जां-ल्यूक मेलांशों पर छात्रों को भड़काने एवं अशांति फैलाने का आरोप लगाया है।

मेलांशों स्वयं तीन बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुके है और अगले वर्ष चौथी बार चुनाव लड़ेंगे। पूर्व में वह कह चुके है कि कि फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान, कोई “गंभीर घटना या हत्या” होगी जिसका प्रयोग “मुसलमानों पर उंगली उठाने और गृहयुद्ध भड़काने” के लिए किया जाएगा। और राष्ट्रपति चुनावो के पूर्व ऐसी आतंकी घटनाओं को उन्होंने सत्तारूढ़ पक्ष द्वारा चुनाव को अपने फेवर में करने से लिंक किया था।

मेलांशों एक सीमा से अधिक आय कमाने वालो पर 100 प्रतिशत आयकर लगाना चाहते है। एक सीमा से अधिक चल-अचल संपत्ति पर 100 प्रतिशत inheritance tax या उत्तराधिकार कर के पक्षधर है। इजराइल के कट्टर विरोधी है।

फ्रांस के प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने फाइनेंसियल टाइम्स को बताया कि इंटेलिजेंस सर्विस का आंकलन है कि छात्र आंदोलन मेलांशों की पार्टी “और उसके कट्टर वामपंथी प्रॉक्सी” द्वारा आयोजित “एक चाल” है, जो अब शहरी हिंसा में कन्वर्ट हो गयी है।

लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रपति एमानुएल माक्रों की मुख्य प्रतिद्वंदी, मरीन ल्यो पैं ने भी अशांति के लिए मेलांशों को जिम्मेवार ठहराया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव में ल्यो पैं ओपिनियन पोल में निकटतम प्रतिद्वंदी से दोगुना बढ़त बनाये हुए है और राष्ट्रीय असेंबली में उनकी पार्टी के सबसे अधिक सांसद है।

ल्यो पैं ने एक नए “दंगा-रोधी” कानून की मांग करते हुए कहा, “ये अब स्टूडेंट विरोध प्रदर्शन नहीं हैं। ये प्रोफेशनल लोगों द्वारा आयोजित और मेलांशों के संसद सदस्यों की देखरेख में किए जाने वाले दंगे हैं।”

ध्यान दीजिये, मरीन ल्यो पैं फ्रेंच राष्ट्रपति एमानुएल माक्रों की मुख्य प्रतिद्वंदी ही नहीं, बल्कि उनका मानना है कि माक्रों के कारण उन्हें चुनावी फंडिंग में तथाकथित अनियमितता के लिए चार साल की जेल और पांच साल तक किसी भी राजनीतिक पद के लिए चुनाव लड़ने पर रोक की सज़ा सुनाई गई थी, जिससे वह 2027 के फ्रांसीसी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गई थीं। अपील की सुनवाई के बाद, उन्हें दोषी तो माना गया, लेकिन सज़ा को सस्पेंड कर दिया गया या कम कर दिया गया, जिससे उन्हें 2027 में चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई है।

इतनी कड़वी प्रतिद्वंद्विता के बाद भी मरीन ल्यो पैं इस हिंसक प्रदर्शन के विरोध में खड़ी है। माक्रों सरकार का समर्थन कर रही है। क्योकि यह चुनाव जीतने का विषय नहीं है; यह फ्रांस को कट्टर वामपंथी हिंसा से बचाने का प्रश्न है। यह फ्रांस की सुरक्षा, एकता एवं अर्थव्यस्था को अक्षुण्ण रखने का संकल्प है।

क्योंकि मरीन ल्यो पैं राष्ट्रवादी है।

यही अंतर है मरीन ल्यो पैं एवं राल-कजरी में।

यही अंतर है राष्ट्रवादियों एवं तिचट्टों में।

जब राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता एवं अर्थव्यस्था को अक्षुण्ण बनाये रखने का गंभीर काल होता है, तब नक्सली लोग तिलचट्टों के साथ खड़े हो जाते है।

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