अमित सिंघल : थर्ड जेंडर के बाद अर्थशास्त्र में ‘थर्ड इकोनॉमिस्ट’ का स्वागत..! अर्थव्यवस्था के मैदान में अब ‘तीसरे’ का भी पदार्पण..

अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन को अर्थशास्त्री कुछ समझा रहा था। अर्थशास्त्री ने अपना दायां हाथ लहराया और कहा कि ‘on the one hand…’ अगर आप ऐसा करे तो वैसा होगा; फिर उसने अपना बांया हाथ उठाया और कहा कि ‘but on the other hand …’ अगर आप वैसा करे तो ऐसा होगा।

राष्ट्रपति ट्रूमैन पहले भी ऐसी “सलाह” पा चुके थे। वे खीझकर बोले: “Give me a one-handed Economist”, अर्थात मेरे पास एक हाथ वाला (लूला) अर्थशास्त्री लेकर आओ।

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उपरोक्त तथ्य है।

लेकिन एक जोक भी चलता है। अगर एक कमरे में दो अर्थशास्त्री है, तो वहां पर तीन विचार होंगे।

लेटेस्ट आर्थिक विकास दर के आंकड़ों (व्याप्त बाजार भाव के अनुसार 10 प्रतिशत से अधिक) ने अर्थशास्त्रियों के बारे में उपरोक्त जोक को सत्य ठहरा दिया है।

ऐसे अर्थशास्त्री इन आकड़ो से ऐसे जल-भुन गए है कि वे ऐसे विचार प्रस्तुत कर रहे है, जिनका गणित, सांख्यिकी, आर्थिक विश्लेषण से कुछ लेना-देना नहीं है।

यह लोग सारे डेटा को नकार रहे है। वाहनों की बिक्री, बिजली एवं ईधन की खपत, बंदरगाह एवं रेल से माल की ढुलाई, औद्योगिक उत्पादन एवं मैन्युफैक्चरिंग, विदेशी मुद्रा भंडार, पूंजीगत निवेश, मैन्युफैक्चर्ड गुड्स के निर्यात को इग्नोर कर रहे है।

यह प्रजाति दो अर्थशास्त्रियों के मध्य “तीसरे” विचार के रूप में अपनी उपस्थिति रजिस्टर करवा रही रही है।

अभी तक हमें थर्ड जेंडर के बारे में पता था। अर्थशास्त्र की विधा में भी इस “तीसरे” का स्वागत कीजिए।

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