बिलासपुर से लेह तक रेललाइन, सेना की ताकत और पर्यटन की रफ्तार को मिलेगी नई उड़ान
552 किलोमीटर के प्रस्तावित रेल कॉरिडोर में सुरंगों और पुलों का होगा अद्भुत संसार, सेना के लिए रणनीतिक तो पर्यटन के लिए वरदान,
42 नए स्टेशन,74 सुरंगें,124 बड़े पुल 396 छोटे पुल
नई दिल्ली। कल्पना कीजिए, पंजाब के भानुपल्ली से ट्रेन में सवार हों और हिमालय की ऊंची चोटियों, बर्फीली वादियों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों को पार करते हुए सीधे लेह पहुंच जाएं। भानुपल्ली से बिलासपुर और फिर मनाली होते हुए लेह तक प्रस्तावित रेल संपर्क भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण और रोमांचक रेल परियोजनाओं में शामिल है।

भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी नई रेललाइन की लंबाई करीब 63 किलोमीटर है। इस परियोजना का विस्तृत अनुमान ₹6,753 करोड़ स्वीकृत किया गया है, जिसमें भूमि लागत भी शामिल है। वहीं इसके आगे बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन 489 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित रणनीतिक रेल परियोजना है। दोनों हिस्सों को जोड़ने पर प्रस्तावित कॉरिडोर की लंबाई करीब 552 किलोमीटर बैठती है।
489 किलोमीटर में 270 किलोमीटर सुरंग!
इस परियोजना की सबसे रोमांचक विशेषता इसका दुर्गम हिमालयी भूगोल है। रेलवे के अनुसार बिलासपुर-मनाली-लेह लाइन में करीब 270 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों में होगा। परियोजना की अनुमानित लागत ₹1.31 लाख करोड़ है।

रेललाइन का प्रस्तावित मार्ग बेरी, सुंदरनगर, मंडी, मनाली, सिस्सू, दारचा, कीलोंग, सरचू, पांग, रुमत्से, उपशी और खरू होते हुए लेह तक पहुंचेगा।
यानी ट्रेन का सफर केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं होगा, बल्कि हिमालय की गहराइयों से होकर गुजरने वाला एक अद्भुत अनुभव बन सकता है।
सेना के लिए रणनीतिक महत्व
बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन को रक्षा मंत्रालय द्वारा रणनीतिक रेललाइन के रूप में चिन्हित किया गया है। दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों तक परिवहन और रसद पहुंचाने के लिहाज से इसका महत्व काफी बड़ा है।
जहां सड़क मार्ग पर बर्फबारी और मौसम की कठिन परिस्थितियां चुनौती बनती हैं, वहीं रेल संपर्क भविष्य में वर्षभर कनेक्टिविटी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पर्यटन को भी मिलेगी नई उड़ान
मनाली, लाहौल-स्पीति और लद्दाख पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों के पसंदीदा गंतव्य हैं। रेल संपर्क बनने से इन क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सकती है और पर्यटन, स्थानीय व्यापार तथा रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
सबसे खास बात यह होगी कि रेल यात्री एक ही यात्रा में पंजाब के मैदानी क्षेत्र से निकलकर हिमाचल की पहाड़ियों और फिर लद्दाख के ऊंचे, बर्फीले भूभाग तक पहुंच सकेगा।
अभी सपना है, लेकिन तैयारी आगे बढ़ चुकी है
यह ध्यान रखना जरूरी है कि भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी 63 किलोमीटर की परियोजना स्वीकृत होकर निर्माणाधीन है, जबकि 489 किलोमीटर लंबी बिलासपुर-मनाली-लेह लाइन के लिए सर्वे पूरा कर DPR तैयार किया जा चुका है। इसलिए इसे फिलहाल पूरी तरह बनकर तैयार रेललाइन के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े प्रस्तावित रणनीतिक रेल कॉरिडोर के रूप में देखना चाहिए।
जब कभी यह रेललाइन पूरी होगी, तो यह केवल पटरियों का विस्तार नहीं होगा। यह हिमालय की दुर्गम भौगोलिक सीमाओं को आधुनिक भारत की रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने वाली एक ऐतिहासिक परियोजना साबित हो सकती है।
भानुपल्ली से लेह तक ट्रेन… सोचिए, खिड़की के बाहर बदलते जाएंगे मैदान, पहाड़, बर्फ और फिर लद्दाख का विराट आसमान!


