सुरेंद्र किशोर : जब राजनीति व्यापार बन जाए !

अयोग्य नेतृत्व के कारण अनिल अंबानी का रिलायंस कंपनी दिवालिया
होने को है।
इस कारण अनिल अंबानी किसी अन्य व्यक्ति को दान में अपनी कंपनी तो नहीं दे देंगे !
इस देश के कुछ वंशवादी-परिवार वादी राजनीतिक दल अयोग्य नेतृत्व के कारण चुनाव दर चुनाव हारते जा रहे हंै।इस पर कुछ लोग चाहते हैं कि ऐसे दल के अन्य नेता लोग मिलकर ,वंश-परिवार के बाहर के किसी योग्य नेता को दल का नेतृत्व सौप दें।
ऐसी सदिच्छा रखने वाले लोग यह मूल बात समझ नहीं पा रहे हैं कि रिलायंस कंपनी व अधिकतर वंशवादी-परिवारवादी पार्टी के स्वरूप में अब कोई खास अंतर नहीं रह गया है।
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एक बात और
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कुछ लोग इस बात की चिंता कर रहे हैं कि संसद में आज जो कुछ हो रहा है,वह लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।
कुछ सांसदों ने लोकतंत्र के मंदिर को चंडूखाना बना दिया है।सदन की कार्यवाही शुरू होते ही चीख-चिल्लाहट भी शुरू हो जाती है।
इससे देश के आम लोगों में निराशा पनपेगी और परिणामस्वरूप तानाशाही आ सकती है।
अब सवाल है कि जिस ‘‘ज्ञान-विज्ञान में माहिर ’’लोगों को जनता चुन कर संसद में भेज रही है,वे लोग उन्हीं ज्ञान-विज्ञान का तो प्रदर्शन करेंगे,और दूसरा ज्ञान कहां से लाएंगे ?
शास्त्रीय संगीत वाला कहीं भी जाएगा शास्त्रीय संगीत गाएगा,पर जिसने कर्कश ध्वनि वाला कानफाड़ू संगीत सीख रखा है,संसद में भी वह वही राग अलापेगा,
चाहे, वह आपको कर्णप्रिय लगे या नहीं।

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