परख सक्सेना : भारत में जन आंदोलन क्यों सफल नहीं हो सकता, एक राजनीतिक विश्लेषण

एक जन आंदोलन कब असफल होता है? तब ज़ब जनता खुद सामने खड़ी हो जाए, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान मे तख्तापलट हुए क्योंकि नेताओं के पास ज़नाधार उतना बड़ा नहीं था।

लेकिन ईरान मे यह तख्तापलट असफल भी रहा, रूस मे भी सफल नहीं हो पाया। इस साल तीन देशो मे मुख्य रूप से जन आंदोलन के संकेत है एक अमेरिका, दूसरा फ़्रांस और तीसरा भारत।

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2014 मे ज़ब मोदी सरकार आयी तो आशा यही थी कि बुलेट ट्रेन की रफ्तार से काम होगा। लेकिन 2018 तक तो वैसे ही हाथ बंधे हुए थे क्योंकि राज्यसभा मे कोई बहुमत नहीं था। ज़ब बहुमत आया तो कोरोना भी आया, उसके बावजूद जो प्रगति हुई वो कमाल की थी। जिस स्तर पर स्टार्टअप आये और डिजिटलीकरण हुआ वो अद्भुत था।

मगर हमारी आबादी बहुत ज्यादा है, जितनी नई नौकरिया एक साल मे पैदा नहीं होती उससे ज्यादा बच्चे स्नातक हो जाते है। कही ना कही बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है, मोदी सरकार ने घर घर शिक्षा तो पहुंचा दी लेकिन ये शिक्षा बस गुलाम पैदा करती है उद्यमी नहीं।

बिहार और बंगाल जैसे बड़ी आबादी वाले राज्यों मे हम उस स्तर पर रोजगार नहीं ले जा सके, इसके विपरीत महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तरप्रदेश और तमिलनाडु मे बहुत रोजगार आये भी सही लेकिन आबादी हमारी इतनी ज्यादा हो गयी है कि इतना काफ़ी नहीं है।

कही ना कही बीजेपी सरकार को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। CJP आंदोलन के बाद अब थोड़ा मुश्किल है कि ऐसा उन्माद दोबारा हो, सरकार ने जिस तरह गिरफ्तारी की है और दंगाईयों को तोड़ रही है वह आगे सबक बनेगा।

लेकिन यदि भारत मे गृहयुद्ध की कोशिश होती भी है तो ये नेपाल, बांग्लादेश की तरह नहीं है जहाँ सत्ता पक्ष सिर्फ पुलिस और सेना के भरोसे हो। RSS ने चीन और पाकिस्तान युद्ध मे सेवाएं दी है, जैसे ही गृहयुद्ध की आहट भी होंगी पूरा संघ एक्टिवेट हो जाएगा।

संघ के अलावा एक बड़ी आबादी वैसे ही है जो सरकार के समर्थन मे है, इसलिए मानसिक रूप से तैयार रहिये ऐसे दंगे या आंदोलन हो सकते है। अच्छी बात बस ये है कि ये सफल नहीं होंगे और यदि हो गए तो उसके बाद जो होगा उसे भी किसी तराइन या पानीपत की तरह याद रखना।

अब जहाँ तक बढ़ती बेरोजगारी वाली समस्या है, युवाओं से सहानुभूति है मगर आबादी सच मे इतनी बड़ी है कि समस्या बन ही रही है। सरकार यदि परीक्षाओ की आयु सीमा बढ़ा दे तो ये उन्माद रोका जा सकता है।

✍️परख सक्सेना✍️
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