प्रहलाद सबनानी : अर्थ के लगभग समस्त क्षेत्रों में भारत की प्रगति अतुलनीय
कुछ माह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डॉनल्ड ट्रम्प ने भारत एवं रूस की अर्थव्यवस्थाओं पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि ये अर्थव्यवस्थाएं मृतप्राय हैं और दोनो मिलकर भी अमेरिकी अथवा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं डाल सकती हैं। परंतु, वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम तिमाही में भारत द्वारा सकल घरेलू उत्पाद में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करते ही अमेरिका ने यू टर्न लेते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ की है एवं वहां के कुछ अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को चलायमान बनाए रखने में भारतीय अर्थव्यवस्था का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। वृद्धिगत आधार पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो चीन की हिस्सेदारी के बहुत करीब पहुंच गई है।
भारत में भी कुछ वर्गों को भारतीय अर्थव्यवस्था में आए इस उछाल पर आश्चर्य हो रहा है एवं वे यह विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि वैश्विक स्तर पर बिगड़े हुए हालातों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था कैसे बनी रह सकती है। इस तरह के प्रशन्नों का उत्तर पाने के लिए हाल ही के समय में भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे परिवर्तनों को हमें समझना होगा।
वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही (अप्रेल-जून 2026) के दौरान भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की गई है, इसमें अर्थव्यवस्था के समस्त क्षेत्रों का योगदान स्पष्टतः दिखाई दे रहा है। उक्त वृद्धि दर किसी एक विशेष कारण के चलते सम्भव नहीं हुई है। विनिर्माण के क्षेत्र में वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत से बढ़कर 9.2 प्रतिशत की रही है, निर्माण के क्षेत्र में वृद्धि दर 5.2 प्रतिशत से बढ़कर 7.7 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र में 8 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत, निजी उपभोग में 6.8 प्रतिशत से बढ़कर 7.1 प्रतिशत, सकल पूंजी निर्माण में 5.8 प्रतिशत से बढ़कर 11.9 प्रतिशत, वित्तीय क्षेत्र में 12.1 प्रतिशत, व्यापार, होटेल एवं यातायात के क्षेत्र में 8.5 प्रतिशत, कृषि के क्षेत्र में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि दर रही है। इसी अवधि में सकल घरेलू उत्पाद का आकार भी 80.32 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 88.27 लाख करोड़ रुपए का हो गया है। इस प्रकार के विकास को विस्तृत आधार वाला विकास कहा जाता है।
किसी भी देश में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि का आश्य यह है कि उस देश में आर्थिक गतिविधियाँ तेजी पकड़ रही हैं। आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने से उस देश में कर संग्रहण की राशि में भी वृद्धि दृष्टिगोचर होनी चाहिए। भारत में हाल ही के समय में कर संग्रहण में भी सराहनीय सुधार हुआ है। वस्तु एवं सेवा कर संग्रहण माह अगस्त 2026 में 14.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2 लाख करोड़ रुपए के स्तर तक पहुंच गया है। आंतरिक वस्तु एवं सेवा कर संग्रहण 9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.37 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंचा है तो वहीं आयात वस्तु एवं सेवा कर संग्रहण 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 0.62 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया है। इसी प्रकार, आय कर की विवरणी फाइल करने वाले नागरिकों की संख्या में भी अतुलनीय वृद्धि दर्ज हुई है और वित्तीय वर्ष 2025-26 वर्ष के लिए आय कर की विवरणी फाइल करने वाले नागरिकों की संख्या 7.80 करोड़ के स्तर को पार कर गई है, जो पिछले वर्ष 7.30 करोड़ के स्तर तक ही पहुंच सकी थी।
अन्य देशों में सकल घरेलू उत्पाद में दर्ज की गई वृद्धि दर की तुलना यदि भारत में दर्ज हुई वृद्धि दर से करते हैं तो ध्यान में आता है कि भारत में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत की रही है, सिंगापुर में 5.9 प्रतिशत, चीन में 4.3 प्रतिशत, दक्षिणी कोरीया में 3.7 प्रतिशत, अमेरिका में 2.1 प्रतिशत, यूनाइटेड किंगडम में 2.1 प्रतिशत, जर्मनी में 1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। वैश्विक स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद में औसत वृद्धि दर लगभग 3 प्रतिशत की रही है। इसी कारण से यह कहा जा रहा है कि पूरे विश्व में भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गई है। और तो और, भारत ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों (विश्व व्यापार संगठन, विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, ऐशियन विकास बैंक) द्वारा पूर्व में दिए गए अनुमानों से भी आगे बढ़कर आर्थिक विकास दर को हासिल किया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया था एवं भारतीय अर्थशास्त्रियों ने 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया था। उक्त समस्त अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए भारत ने आर्थिक विकास किया है।
भारतीय कम्पनियों द्वारा अपने व्यवसाय एवं लाभप्रदता में हासिल की गई वृद्धि दर से भी यह झलकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक तरह से अपने सुनहरे दौर से गुजर रही है। निजी गैर वित्तीय कंपनियों के परिचालन लाभ में आकर्षक 19.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। स्टॉक मार्केट में सूचिबद्ध विनिर्माण इकाईयों के परिचालन लाभ में 21.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। यात्री वाहनों की जुलाई 2026 माह में बिक्री 34.3 प्रतिशत की महत्वपूर्ण वृद्धि के साथ 4.58 लाख इकाईयों के स्तर को पार कर गई है। ट्रैक्टर की बिक्री भी 28.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 1.17 लाख इकाईयों के स्तर से ऊपर रही है। दो पहिया वाहनों की बिक्री 28.3 प्रतिशत की आकर्षक वृद्धि दर्ज की गई और यह 18.18 लाख इकाईयों के स्तर से ऊपर निकल गई है। डिजिटल भुगतान की संख्या में 16.6 प्रतिशत की वृद्धि एवं राशि में 18.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई हैं। जुलाई 2026 माह में ही बिजली की मांग में 10.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। डीजल की खपत में भी 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। उक्त समस्त आंकड़ों से यह सिद्ध होता है कि भारत में आर्थिक गतिविधियाँ अपने चरम स्तर पर पहुंच रहीं हैं और इनमे आकर्षक वृद्धि दर लगातार बनी हुई है। इसी के चलते ही भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर होते हुए दिखाई दे रही है। इस आलेख में दिए गए आकड़ों को किसी एक संस्थान ने नहीं जारी किया है बल्कि अलग अलग विभिन्न संस्थानों द्वारा इन्हें जारी किया गया है और यह भारत के विकास को एक ही दिशा में अर्थात ऊपर की ओर जाता हुआ दिखा रहे हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशक जो अभी तक भारत के पूंजी बाजार से अपने निवेश को निकाल रहे थे उन्होंने भारत के शेयर बाजार में जुलाई 2026 माह में 210 करोड़ अमेरिकी डॉलर एवं अगस्त 2026 माह में 310 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है, जबकि मार्च से जून 2026 की अवधि में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय पूंजी बाजार से 2700 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि निकाल ली थी। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि विदेश संस्थागत निवेशक भारतीय पूंजी बाजार में लौट आए हैं, परंतु इस संदर्भ में ट्रेंड तो परिवर्तित होता हुआ दिखाई दे रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के शेयर बाजार से 1.53 लाख करोड़ रुपए की राशि निकाली थी। स्ट्रेट ओफ होर्मुज लगातार कुछ माह तक बंद रहा है, तुलनात्मक रूप से तेल के बहुत कम जहाज इस मार्ग से निकल पाए हैं जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति बहुत बड़े स्तर पर प्रभावित रही है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत सहित विश्व के कई देशों द्वारा अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात के उत्पादों पर भारी मात्रा में आयात कर लगाए हैं।
उक्त वर्णित समस्त विपरीत परिस्थितियों के बीच न केवल भारत सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि हो रही है बल्कि भारत से विभिन्न उत्पादों के निर्यात में भी आकर्षक वृद्धि दर्ज हो रही है, और निर्यात के क्षेत्र में भी भारतीय उत्पाद धूम मचाते हुए दिखाई दे रहे हैं। जुलाई 2026 माह में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात 57.4 प्रतिशत से बढ़ा है, केमिकल उत्पादों का निर्यात 14.4 प्रतिशत बढ़ा है, मशीनरी एवं इक्विप्मेंट उत्पादों का निर्यात 12.1 प्रतिशत बढ़ा हैं, पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 16.1 प्रतिशत बढ़ा है, बिजली के इक्विप्मेंट का उत्पाद 28.3 प्रतिशत से बढ़ा है। विश्व व्यापार संगठन ने तो वैश्विक व्यापार के अनुमानों को 2.5 प्रतिशत से घटाकर 0.5 प्रतिशत कर दिया था, अर्थात 80 प्रतिशत की कमी, परंतु भारत के निर्यात तेजी से बढ़ रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के केएलईएम द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 सहित पूर्व के 9 वर्षों में भारत में 1.9 करोड़ रोजगार के अवसर प्रतिवर्ष निर्मित किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में निर्मित रोजगार के अवसरों में मातृशक्ति की भागीदारी 41.7 प्रतिशत की रही है। भारत में प्रति व्यक्ति आय भी लगभग 2900 अमेरिकी डॉलर के स्तर पर शीघ्र ही पहुंचने वाली है। विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हो रही है। भारत ने 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते सम्पन्न कर लिए हैं अथवा सम्पन्न करने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2027-28 में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
भारत की अर्थ के लगभग समस्त क्षेत्रों में आकर्षक वृद्धि हम समस्त भारतीयों के लिए गर्व एवं आनंद का विषय होना चाहिए एवं इसमें और अधिक सुधार करने की दृष्टि से भारतीय अर्थव्यवस्था में हमें किसी भी प्रकार का व्यवधान खड़ा नहीं करना चाहिए, विशेष रूप से भारत के युवाओं (जेन-जी) को तो भारत की आर्थिक प्रगति में अपने योगदान को बढ़ाने के लिए गम्भीरता से विचार करना चाहिए।
प्रहलाद सबनानी
सेवानिवृत्त उपमहाप्रबंधक,
भारतीय स्टेट बैंक
के-8, चेतकपुरी कालोनी,
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