सर्वेश तिवारी श्रीमुख : हनुमान अंश
संतों पर फिल्म बनाना तनिक कठिन काम तो है ही। क्या दिखायेंगे आप? उनके आसपास होने से जिस आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है, उसे कोई निर्देशक कैसे दिखाएगा भला? हां आप चमत्कारों को, ऊपरी चीजों को दिखा सकते हैं। हनुमान अंश में भी अधिकतम यही दिखाया जा सका है। उसके बाद भी फिल्म दर्शनीय बन पड़ी है।

निर्माताओं ने जो सबसे अच्छा काम किया है वह यही है कि उन्होंने बाबा की भूमिका के लिए किसी स्थापित अभिनेता को नहीं लिया। हमने अटल जी की भूमिका में पंकज त्रिपाठी और कपिल देव की भूमिका में रनवीर सिंह जैसे बड़े अभिनेताओं को असफल होते देखा है। पर बाबा की भूमिका में दिख रहे शोभिनव सत्य पूरी तरह सफल हुए हैं। बाबा के वृद्धावस्था की तस्वीर देखी है लोगों ने, उस हिसाब से लगता है कि वे युवा होंगे तो वैसे ही दिखते होंगे। और अभिनय? सर हिला हिला कर बात करते शोभिनव सत्य उस संत के भोलेपन को उतारने में पूर्ण सफल हुए हैं। उनका अभिनय आपके भीतर करुणा जगाता है…
फिल्म में लगभग एक दर्जन गीत हैं। क्या ही सुंदर भजन बने हैं। यह फिल्म केवल संगीत के लिए भी देखी जा सकती है। केवल इकतारा के संगीत पर गाया गया “मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान…” तो बिल्कुल गांव गांव में घूम कर सूरदास, भरथरी के गीत गाने वाले साधुओं की याद दिलाता है। संगीत के लिए साधु तिवारी बधाई के पात्र हैं। हालांकि कुछ गीत पारंपरिक हैं, पर इन्होंने भी अच्छे ढंग से बनाया है।
नीम करौरी बाबा ने सन तिहत्तर में देह त्यागा था, और यह भी सत्य ही है कि उनकी महिमा की चर्चा पूरे देश में इधर ही एक दशक से हुई है। इसमें सोशल मीडिया की भी बड़ी भूमिका है। तो उनको लेकर हमारे पास जो भी जानकारी है, वह सोशल मीडिया से ही आई है। ऐसे में यह फिल्म महत्वपूर्ण तो हो ही जाती है।
मात्र दो करोड़ के बजट में बनी फिल्म बीस बाइस करोड़ कमा चुकी है। पर इस फिल्म की सफलता कमाई नहीं है। यह फिल्म लंबे समय तक देखी जाएगी। सोशल मीडिया में, टीवी पर, ओटीटी पर… एक बार आपने अपने फोन पर देखना शुरू किया तो पूरा देख ही लेंगे…हां इतना अवश्य है कि यह एक कम बजट की फिल्म है, तो हल्की ही है। यदि आप कला समीक्षक होने का भरम त्याग कर हल्की फुल्की फिल्में भी देख लेते हैं तो जरूर देख लीजिए…


