सर्वेश तिवारी श्रीमुख : जेन जी ? ये वर्दी बरसों पसीना बहाने के बाद देह पर आई है

हालांकि यह सत्य नहीं है, फिर भी कभी कभी लगता है जैसे बदतमीज होने के लिए बदसूरत होना पहली शर्त है। वैसे यह बात गलत ही है…
कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां शत्रु देश के षड्यंत्रों के कारण हमेशा ही आम नागरिकों और सैनिकों की जान जाती रही है, वहां सेना की व्यवस्था को अभद्रता के साथ तोड़ने का प्रयास करने वाले को आम लोगों द्वारा ही सबक सिखा दिया जाना चाहिए था। समझ नहीं आता, कोई इतना असभ्य कैसे हो सकता है?


“वी आर जेन जी, वी कांट टॉलरेट दिस…” वाह! जैसे युवा होना ही अपने आप में कोई उपलब्धि हो। निजी जीवन में भले एक बाल न उखाड़ा हो, पर व्यवहार ऐसे करेंगे जैसे दुनिया इनकी उंगलियों के इशारे पर चले। क्यों भाई? ऐसा कौन सा कद्दू में तीर मार दिया है तुमने कि तुम्हारे लिए सारे नियम कानून ताक पर रख दिए जाएं?
आप कश्मीर, लद्दाख की ओर जा रहे हैं तो यह मान कर जाना होगा कि परेशानी हो सकती है। यदि आपको दिल्ली और कश्मीर में अंतर नहीं सूझता तो बज्र मूर्ख हैं आप… और यदि पहाड़ों पर कहीं लंबा जाम है, तो वह भी आपके जैसे पर्यटकों की भीड़ के कारण ही है, तो आपको इंतजार करना ही होगा… इससे झुंझला कर आप सेना के काम में दखल नहीं दे सकते।
कितने फूहड़ तरीके से इस बदतमीज ने कहा कि ये कश्मीरियों के साथ भी ऐसा करते रहे और अब हमारे साथ कर रहे हैं। वही पाकिस्तान परस्त बामी एजेंडा…
कश्मीर के चौक चौराहों पर खड़े जवान, सीमा रेखा पर खड़े लड़कों में भी नई पीढ़ी की बड़ी संख्या है। जो शत्रु की गोलियों के आगे छाती तान कर खड़े हैं वे जेन जी नहीं कहलाएंगे क्या? वे क्या इसीलिए हैं कि तुम्हारी बदतमीजियों पर अपनी जान न्योछावर करें?
वहां जो लड़के खड़े हैं उन्होंने वर्षों तक पसीना बहाया है तब देह पर वर्दी आई है। दिन दिन भर की कठोर ट्रेनिंग से गुजर कर पत्थर बनाया है देह को, तब खड़े हैं। और खड़े हैं ताकि तुम्हारे जैसे लोग सड़कों पर सुरक्षित चल सकें। देश जानता है कि यदि वे घंटे भर के लिए हट जाएं तो क्या होगा… और आप अपना मुंह लेकर कूद पड़ी हैं कि हम पैसा लगा कर घूमने आए हैं, हम कहीं भी जाएंगे। “वी कांट टॉलरेट दिस…” तोरा मा…
कश्मीर में चेकिंग में हुई एक भूल कितनी जानें ले सकती है, यह कहा नहीं जा सकता। वहां सरकारें बनती बदलती हैं, पर खतरा कभी समाप्त नहीं होता। खतरा बढ़ता है, कम होता है, पर कभी समाप्त नहीं होता। खतरा यदि कम हुआ है तो यह उसी सेना का परिश्रम है, वे आज ढीले पड़ जाएं तो कश्मीर आज नब्बे के दशक में चला जाएगा।
ऐसे लोगों को उसकी बेहूदगी के लिए कठोर दंड मिलना चाहिए। आप कोई भी हों, यदि सेना के साथ बदतमीजी कर रहे हैं तो देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

Veerchhattisgarh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *