परख सक्सेना : फ्रीबिज हमें त्यागना होगा
पेपर पर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल है मगर बॉडी लेंग्वेज कहती है कि संचालन दिल्ली से अमित शाह करते है। मध्यप्रदेश मे बीजेपी कभी नहीं हारेगी, हारेगी भी तो कांग्रेस से तो नहीं हारेगी।
हर समय मुस्कुराते इस प्रदेश का एक बहुत बड़ा दर्द ये भी है कि यहाँ आर्थिक प्रगति अच्छी हुई है लेकिन ये कुछ वैसी है कि सहवाग ने 110 गेंदों पर शतक लगाया हो। मतलब राज्य ने प्रगति अच्छी की है मगर जो चाल है वो सामर्थ्य के आगे प्रगति ना होने जैसी है।
भारत के हर व्यक्ति को जीवन मे कम से कम एक बार दिल्ली या फिर मुंबई मे एक महीने के लिए रहना और काम करना चाहिए, क्योंकि इन दो शहरों मे आकर ज़ब आप वापस अपने राज्य को देखते है तो पता चलता है कि यहाँ के नेता और लोग कितने बड़े फर्जी है।
ईश्वर का परम आशीर्वाद था जो मैंने दोनों महानगरो का अनुभव किया, दिल्ली का बच्चा ai टूल्स की बाते कर रहा है, मुंबई का बच्चा भी कुछ नया कर रहा है। लेकिन इसके विपरीत यहाँ बच्चा SSC क्लर्क निकाल दे तो इनका बस ना चले वरना द्रोपदी मुर्मू को पत्र लिखकर बधाई माँगने लग जाए।
अंग्रेजो के जमाने मे अफसर धौंस जमाता था और खुद को भूरा बाबू समझता था, वो परम्परा आज तक कायम है। कोई परीक्षा निकल जाए तो यहाँ ढोल नगाड़े पीटे जाते है।
8 करोड़ की आबादी मे 16 लाख से ज्यादा तो सरकारी नौकरी नहीं होंगी, चलो 25 लाख मान लिया। यदि युवा 4 करोड़ भी है तो बाकी पौने चार करोड़ क्या करेंगे? और इसमें सरकार जितनी दोषी है उतने ही राज्य के लोग भी है, मानसिकता तो आप ही को बदलनी होंगी सरकार तो बस प्रतिबिम्ब है।
ज़ब विधायक निधि का प्रयोग गरीब की शादी कराने मे होने लगे, महिलाओ को मुफ्त के पैसे बांटे जाने लगे तो ये फ्रीबीज नहीं है जहर है। हम मजबूरी समझते है आप फ्रीबीज नहीं दोगे तो राक्षस राज्य मे घुस आएंगे, लेकिन जितना फ्रीबीज दे रहे हो उसके आधे उद्योग भी तो दो।
मध्यप्रदेश मे उद्योग कई अन्य विकासशील राज्यों की तुलना मे बहुत अच्छे है, मध्यप्रदेश की सड़के निःसंदेह बहुत बढ़िया है, नीतियों का क्रियान्वयन भी बुरा तो नहीं है। लेकिन बात वही है कि ऐसा लगता है जैसे हम ठहर रहे है।
ज़ब तक उद्योग नहीं मांगोगे नहीं मिलेगा, 2028 मे विधायकों से यही रिपोर्ट मांगो कि वो क्षेत्र मे कितने रोजगार लाया? सड़क शिक्षा और सुरक्षा कोई विकास नहीं है बल्कि मूलभूत आवश्यकता है, लाड़ली बहना के नाम पर भीख लेनी बंद कर दो। वो तो नहीं रोक सकते क्योंकि उनके राजनीतिक कारण है।
लेकिन हमें भी कुछ करना पड़ेगा, मध्यप्रदेश की एक बड़ी आबादी अपने अपने विधायकों से नाराज है। कांग्रेस को वोट दे नहीं सकते क्योंकि धर्म आड़े आ जाता है, बाकि विकल्प उतने अच्छे नहीं है। लेकिन एक बात तय है कि ज़ब समाज खुद जागरूक हो जायेगा तो नेता भी सुधर जाएंगे।
दुनिया को फ्रीबीज हमने सीखाई, अब समय आ गया है कि हम ही इसका त्याग करें। महिलाओ से आग्रह है कि 3500 का लालच छोड़ दीजिए ये आप पर 20 हजार की महंगाई का बोझ लाद रहा है। ये फ्री का पैसा कैंसर है।
अमित शाह जी से निवेदन है, मध्यप्रदेश बुरे समय मे भी बीजेपी को सीटें जीताता आया है। कुछ ऐसा कॉर्पोरेट प्रशिक्षण या तकनीकी प्रशिक्षण को विकसित कराओ कि जनता फ्रीबीज और सरकारी नौकरी के जाल से बाहर निकले।
एक तो जनता थोड़ी जागे दूसरा अमित शाह को हस्तक्षेप करना होगा। मध्यप्रदेश मे उद्योगो को गति मोहन यादव अकेले नहीं दिला सकते, कर्मठ है मेहनती है मगर अमित शाह की कॉर्पोरेट मे जो अप्रूवल रेटिंग है वो ज्यादा सहायक होंगी।
मोदीजी ज़ब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब मध्यप्रदेश के भी चुनाव प्रभारी थे और तब बीजेपी ने 173-38 के अंतर से कांग्रेस को परास्त किया था। इतनी अक्ल हमें भी है कि अंबानी मुंबई और अडानी अहमदाबाद छोड़कर इंदौर या जबलपुर नहीं आयेंगे।
क्या हम ऐसा रास्ता निकाल सकते है कि सीरिया, यमन या फिर वेनेजुएला जैसे देशो से भागे बड़े उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश मे शरण दे सके। हो सकता है इस आइडिया मे 2% भी दम ना हो मगर इस तरह के कुछ रास्ते निकाले तो जा सकते है।
हम किसी भी दल को समर्थन दे मगर हम एक नागरिक है, शासन की निष्पक्ष समीक्षा करते रहना चाहिए।
✍️परख सक्सेना✍️
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