सर्वेश तिवारी : हिट होने की चाहत में पौराणिक कथाओं का कबाड़ा, बॉलीवुड आखिर किसे मूर्ख बना रहा है ?
सिनेमा इंडस्ट्री किसी विषय के पीछे पड़ती है तो एकदम टूट कर पड़ती है। सन दो हजार में भगत सिंह पर फिल्म बनाने की अंधी दौड़ शुरू हुई तो एक ही साथ पांच फिल्में बनीं। अजय देवगन, बॉबी देओल, सोनू सूद, कुणाल गोस्वामी, ने भगत सिंह की भूमिका निभाई और सारी फिल्में एक साथ रिलीज हुईं। उसके बाद होना वही था जो हुआ, सारी फिल्में पिट गईं।

आजकल पौराणिक विषयों पर फिल्में बनाने का चलन आया है, और इंडस्ट्री जैसे रामकथा के पीछे हाथ धो कर पड़ी हुई है। पहले मुंतशिर साहब ने प्रभाष के साथ आदि पुरुष बना कर कबाड़ा किया, उसके बाद रणवीर कपूर आ ही रहे थे कि अंजलि अरोड़ा आ गईं रामकथा दिखाने… फ्रेंच कट वाले हनुमान जी, चश्मा वाले बानर सैनिक… मतलब लक्ष्य यही था कि निगेटिव पब्लिसिटी के बल पर ही गाड़ी खींच ली जाए। यह चार सौ बीसी कितनी चलेगी?फेसबुक पर कुछ क्लिप दिखी है, उस हिसाब से कह सकते हैं कि इससे बेहतर अभिनय रामलीला वाले कलाकार करते हैं। यह फिल्म भी पिटनी ही है।
एक नई बात भी कही जा रही है आजकल, फलां हीरो ने डेढ़ साल तक चप्पल नहीं पहना, फलां डायरेक्टर ने डेढ़ साल तक नॉनवेज छोड़ दिया, फलां ने फिल्म के दौरान केवल फलाहार किया… किसको मूर्ख बना रहे हो भाई? अब अंजलि अरोड़ा के लिए भी कोई बवाल उड़ा दो… इससे फिल्म चल जाएगी क्या? फिल्म हिट कराने के लिए जिस चीज का सुंदर होना सबसे जरूरी है, वह चीज फिल्म ही है भाई…
अभी एक फिल्म आई जिसमें छठ को जोड़ कर भूत प्रेत का खेल दिखाया गया। छठ का गीत देखिए, उसमें सबकुछ दिखेगा सिवाय छठ के… गांव दिख रहा है दक्षिण भारत का, पर्व दिखा रहे हो पूर्वांचल का… किसी बकचट लेखिका का नाक से सिंदूर वाला बयान सुन कर मान लिया कि इतना ही छठ है। अर्घ का दृश्य पद्मावत के जौहर वाले दृश्य से कॉपी मार लिया है। लाल रंग की साड़ी पहन के सब एक साथ जल में उतर रही हैं। हद ही है। सोचा होगा कि एक छठ पर्व दिखा कर पूर्वांचल को लूट लेंगे… ओ भाई! यूपी बिहार को लूटने के लिए हमारे नेता लोग नहीं हैं क्या जो तुम भी कूद पड़े?
कुछ अच्छी फिल्मों के बाद भी लगता है कि सनीमा वाले हिन्दू पौराणिक कथाओं को बख्श दें तो ही बेहतर… सौ में निन्यानबे बार तो ये गोबर ही करेंगे…


