कौशल सिखौला : स्मित मच्छार की सराहना विपक्ष ने क्यों नहीं किया..?

कुर्ते पर जनेऊ पहनने का अर्थ यदि अग्निहोत्री ब्राह्मण होना है तो पंडित स्मित मच्छार के अदम्य साहस पर एक ट्वीट तो कीजिए राहुल गांधी जी.?

पीडीए में पीडी का अर्थ यदि पंडि जी है तो पंडित स्मित मच्छार के विश्वचर्चित कारनामें पर एक ट्वीट तो बनता है अखिलेश यादव जी..?

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स्मित मच्छार बच जाएंगे, दुनिया के सैकड़ों करोड़ लोगों की भावनाएं उनके साथ हैं । भारत में जगह जगह हो रहे अनुष्ठान गंभीर रूप से घायल उस युवा को बचा लेंगे । पर कल्पना कीजिए मच्छार के प्रयास विफल हो जाते और 9/11 जैसा कोई हादसा कराने में आतंकवादी ओमानी पायलट कामयाब हो जाता तो हमारे देश में क्या होता ? क्या दिग्विजय सिंह जैसी लॉबी हाथ में कलावा बांधे स्मित मच्छार को हिन्दू आतंकवादी घोषित कर देते ?? सोचकर भी दहशत होती है ? जो लॉबी साध्वियों , वैज्ञानिकों और सैन्य अधिकारियों को हिन्दू आतंकवाद से जोड़ने में शर्म नहीं करते , तो वे क्या क्या नहीं करते ?

भगवान का लाख लाख शुक्र है कि मच्छार सकुशल हैं । घायल हैं , अरब में बढ़िया इलाज मिल रहा है । शीघ्र ही वे भारत लौटेंगे , मुंबई में उनके घर पर उनका भारी स्वागत किया जाएगा । लेकिन हमारा सवाल अब दूसरा है और हम नाम लेकर यह सवाल पूछेंगे । हमारा सवाल ओबेसी से नहीं है । सवाल है राहुल गांधी , अखिलेश यादव , ममता , तेजस्वी या विपक्ष के किसी बड़े नेताओं से ? क्या किसी ने 200 परिवारों का जीवन बचाने वाले स्मित मच्छार की सराहना की ? क्या किसी वामपंथी अथवा विधर्मी बौद्धिक ने स्मित मच्छार के वैश्विक स्वागत पर दो शब्द बोले या ट्वीट किया ? क्या 180 इजरायलियों का जीवन बचाने पर 140 करोड़ देशवासियों को गर्व नहीं हुआ ?

सीधी बात करें तो भारत के कितने सेकुलर मित्रों और कांग्रेसियों को यहूदियों के बचने पर खुशी हुई ? कितनी विधर्मियों ने डाली , कितने ट्वीट किए या इंस्टग्राम पर कितनों ने खुशियां मनाई ? क्या अनेक विधर्मी देशों को खुशी तब मिलती जब यह प्लेन क्रैश हो जाता , 180 यहूदी मारे जाते ? साथ ही आतंकवादियों के दौर को इंडियन आतंकवाद की ओर मोड़ने का वक्त मिल जाता ? घोर निराशा हुई हमारे कांग्रेसी , वामपंथी मित्रों और सेकुलर मित्रों को जब यहूदी बच गए । उन्हें बचा लिया भारतीय “हिन्दू” कैप्टन स्मित मच्छार ने । मच्छार यानि एक गुजराती ने । ये गुजराती – शाह मोदी अडानी अंबानी और अब स्मित मच्छार ? सारे गुजराती ? हद हो गई ?

दुःख की बात है कि इतने प्रमुख कारनामें को यहूदी – मुस्लिम की नजर से देखा जा रहा है ? विपक्ष प्रतिक्रिया देते हुए इसलिए डर रहा है कि कहीं पास के मुस्लिम वोट न खिसक जाएं । बेशक इसके लिए अपने जांबाज कैप्टन की उपलब्धि पर पर्दा क्यूँ न डालना पड़े ? यही अलगाव है , यही छद्मवाद , यही वोटवाद है जो भारत के लिए मुसीबत बना हुआ है । अपने नायकों को , अपने राष्ट्रवाद को , वन्देमातरम को सम्मान देने में भी यदि वोट बैंक का गणित आड़े आएगा तो मुश्किल होगी ? बड़ी मुश्किल ? सन्नाटा तोड़िए विपक्षी मित्रों , एक भारतीय पायलट की कामयाबी पर कुछ तो बोलिए ? या बस वोट बैंक ही माई बाप बनकर रह गया है ???????

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