सुरेंद्र किशोर : नेहरू का आइडिया ऑफ इंडिया–1, उच्चत्तम स्तर के भ्रष्टाचार पर परदा

लंदन में भारत के उच्चायुक्त वी.के.कृष्ण मेनन पर सन 1949 में जीप घोटाले का गंभीर आरोप लगा।घोटाला 80 लाख रुपए का था।(तब के 80 लाख रुपए अब के कितने पैसे !)जांच कमेटी ने मेनन को सरसरी तौर पर दोषी माना।
इसके बावजूद केंद्र सरकार ने 30 सितंबर 1955 को यह घोषणा कर दी कि जीप घोटाले के इस मामले को बंद कर दिया गया है।
गृह मंत्री ने संसद में कहा कि प्रतिपक्ष चाहे तो अगले चुनाव में इसे मुद्दा बना कर चुनाव लड़ ले।
हद तो तब हो गई जब 3 फरवरी, 1956 को कृष्ण मेनन केंद्रीय मंत्री बना दिए गये।
क्या डर था कि मेनन को संतुष्ट नहीं किया गया तो घोटाले के असली सूत्रधार का नाम मेनन उजागर कर देंगे ?
केंद्र सरकार के इस निर्णय से देश के भ्रष्टाचारियों को कैसी प्रेरणा मिली ?
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(जारी)

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