CM विष्णुदेव साय द्वारा ज़िला भाजपा कार्यालय का भूमिपूजन, गोपाल मोदी की भूमिका पर क्यों है विशेष चर्चा?

कोरबा। संगठनात्मक राजनीति में उपलब्धियाँ अक्सर शोर नहीं मचातीं, वे चुपचाप इतिहास रचती हैं। ज़िला स्तर पर ऐसा ही एक महत्वपूर्ण क्षण तब सामने आया है, भारतीय जनता पार्टी के ज़िला कार्यालय के नए भवन का भूमिपूजन प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के करकमलों से संपन्न होना। यह केवल एक भवन का भूमिपूजन नहीं, बल्कि संगठनात्मक परिपक्वता, निरंतर प्रयास और नेतृत्व क्षमता की स्वीकृति है। विशेष रूप से इसलिए भी कि यह उपलब्धि भाजपा ज़िलाध्यक्ष गोपाल मोदी के कार्यकाल में संभव हो सकी।
जब ज़्यादातर लोग सत्ता के इर्द-गिर्द रहकर राजनीति सीखते हैं, तब गोपाल मोदी ने कार्यकर्ता की भूमिका से राजनीति को जिया। बूथ स्तर से लेकर मंडल और फिर ज़िला संगठन तक, उन्होंने हर ज़िम्मेदारी को अवसर की तरह लिया, न कि सीढ़ी की तरह। ऐसे दौर भी आए जब संगठन में उनके योगदान को नज़रअंदाज़ किया गया, जब अपेक्षित स्थान नहीं मिला, जब मेहनत का श्रेय किसी और के खाते में चला गया। लेकिन ठीक उसी तरह जैसे कहा गया है, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन..” गोपाल मोदी ने परिणाम की चिंता किए बिना कर्म को ही अपना धर्म बनाए रखा। वे न तो शिकायत करते दिखे, न ही संगठन के बाहर अपनी पीड़ा व्यक्त की। जो लोग शोर मचाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, उनके उलट गोपाल मोदी चुपचाप काम करते रहे। ज़िला स्तर पर भाजपा को मज़बूत करने में उनकी भूमिका निर्णायक रही। कार्यकर्ताओं के बीच संवाद, वरिष्ठों के साथ संतुलन और विरोधियों के बीच स्पष्ट वैचारिक रेखा यह सब उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा। चुनाव हों या संगठनात्मक कार्यक्रम, वे हमेशा सबसे आगे काम करते दिखे, लेकिन श्रेय लेने में सबसे पीछे।
राजनीति में पद मिलना अलग बात है और पद को सार्थक बनाना अलग। गोपाल मोदी का नेतृत्व इसी दूसरे पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने ज़िलाध्यक्ष के रूप में संगठन को केवल चुनावी दृष्टि से नहीं, बल्कि संरचनात्मक और वैचारिक रूप से मज़बूत करने पर बल दिया। ज़िला कार्यालय का निर्माण उसी सोच का परिणाम है, जहाँ संगठन को स्थायित्व, पहचान और एक सशक्त केंद्र देने की भावना निहित है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में यह भूमिपूजन इस बात का संकेत है कि ज़िला संगठन का कार्य और अनुशासन प्रदेश नेतृत्व की नज़र में भी महत्वपूर्ण है। आमतौर पर ऐसे कार्यक्रम तभी प्रदेश स्तर पर महत्व पाते हैं, जब ज़मीनी संगठन सक्रिय, अनुशासित और परिणाम देने वाला हो। गोपाल मोदी के नेतृत्व में ज़िला भाजपा ने यही विश्वास अर्जित किया है।
यह उपलब्धि अचानक नहीं आई। इसके पीछे वर्षों का संगठनात्मक अनुभव, कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर संवाद और नेतृत्व के साथ संतुलित समन्वय रहा है। गोपाल मोदी ने ज़िलाध्यक्ष के रूप में कार्यकर्ताओं को केवल निर्देश नहीं दिए, बल्कि उन्हें साथ लेकर चलने की कार्यशैली अपनाई। यही कारण है कि ज़िला कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण प्रकल्प को लेकर संगठन के भीतर सर्वसम्मति और उत्साह देखने को मिला।
ज़िला भाजपा कार्यालय केवल एक इमारत नहीं होगा, बल्कि आने वाले समय में यह विचार, संगठन और रणनीति का केंद्र बनेगा। कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण से लेकर चुनावी तैयारियों तक, यह भवन संगठन को नई ऊर्जा देगा। ऐसे में इसका भूमिपूजन मुख्यमंत्री द्वारा होना न केवल सम्मान की बात है, बल्कि ज़िला संगठन के भविष्य के लिए एक मजबूत आधार भी है।
गोपाल मोदी के ज़िलाध्यक्ष कार्यकाल की यह उपलब्धि बताती है कि जब नेतृत्व निष्ठा, धैर्य और समर्पण से काम करता है, तो परिणाम स्वतः सामने आते हैं। यह उन कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा है जो वर्षों से बिना किसी पद की अपेक्षा के संगठन के लिए कार्य करते हैं। आज ज़िला भाजपा कार्यालय का भूमिपूजन उसी संगठनात्मक तपस्या का प्रतिफल है।
कहा जा सकता है कि यह कार्यक्रम केवल एक दिन की घटना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा को मज़बूत करने वाला क्षण है। और इस क्षण के केंद्र में गोपाल मोदी का नेतृत्व, उनकी कार्यशैली और संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
जब ज़्यादातर लोग सत्ता के इर्द-गिर्द रहकर राजनीति सीखते हैं, तब गोपाल मोदी ने कार्यकर्ता की भूमिका से राजनीति को जिया। बूथ स्तर से लेकर मंडल और फिर ज़िला संगठन तक, उन्होंने हर ज़िम्मेदारी को अवसर की तरह लिया, न कि सीढ़ी की तरह।
ऐसे दौर भी आए जब संगठन में उनके योगदान को नज़रअंदाज़ किया गया, जब अपेक्षित स्थान नहीं मिला, जब मेहनत का श्रेय किसी और के खाते में चला गया। लेकिन ठीक उसी तरह जैसे कहा गया है, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन..” गोपाल मोदी ने परिणाम की चिंता किए बिना कर्म को ही अपना धर्म बनाए रखा। वे न तो शिकायत करते दिखे, न ही संगठन के बाहर अपनी पीड़ा व्यक्त की। जो लोग शोर मचाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, उनके उलट गोपाल मोदी चुपचाप काम करते रहे।
ज़िला स्तर की भाजपा को मज़बूत करने में उनकी भूमिका निर्णायक रही। कार्यकर्ताओं के बीच संवाद, वरिष्ठों के साथ संतुलन और विरोधियों के बीच स्पष्ट वैचारिक रेखा यह सब उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा। चुनाव हों या संगठनात्मक कार्यक्रम, वे हमेशा सबसे आगे काम करते दिखे, लेकिन श्रेय लेने में सबसे पीछे।

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