कौशल सिखौला : बीजेपी – चीनी वामपंथ भेंट से कांग्रेस बेचैन क्यों? दोहरा मापदंड क्यों?

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक डेलिगेशन ने भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय आकर बीजेपी नेताओं से भेंट की । बीजेपी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है , लगातार जीतकर सत्ता हासिल कर रही है । बेशक पहली बार ही सही चीन जैसे एकमात्र कम्युनिस्ट देश ने पार्टी डेलिगेशन को भारत भेजा तो इसमें बुरा क्या है ?

अच्छा हो यदि पार्टी स्तर पर बातचीत दोनों देशों के बीच संबंधों को तनावमुक्त रखने की राह आसान कर सके । खास बात यह है कि चीनी डेलिगेशन ने आरएसएस के चीफ नंबर 2 दत्तात्रेय हंसबोले से भी लम्बी बात की । संघ और ओरिजनल वामपंथियों के बीच नजदीकियां बढ़ाने का यह उपक्रम सचमुच आश्चर्यजनक है । दक्षिणपंथ और वामपंथ के बीच यह मिलन कितना सुखदाई अथवा दुःखदाई है , यह जानने में अभी वक्त लगेगा ।

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आश्चर्य की बात है कि बीजेपी और चीनी वामपंथियों के इस मिलन से कांग्रेस नाराज है । पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत तो लम्बे लम्बे हाथ फेंकते हुए बयान दे रहे हैं । सब जानते हैं कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राहुल गांधी के नेतृत्व में चीनी दूतावास जाकर चीनी प्रतिनिधियों से मिल चुका है । जब विपक्षी दल रहते हुए जब कांग्रेसी चीन से मिल सकते हैं , तब सत्तारूढ़ पार्टी ऑफिशियल तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी से भला क्यों नहीं मिल सकती ?

चीन निश्चित रूप से भारत का दुश्मन नंबर 1 है , तो कांग्रेस के लिए भी है और बीजेपी के लिए भी । कांग्रेस तो वामपंथियों से यूपीए और इंडी गठबंधन से पहले से दोस्ती रखती आई है । अब यदि चीन में सत्तारूढ़ पार्टी भारत में सत्तारूढ़ पार्टी से मिलने आई है तो किसी के पेट में दर्द क्यूँ ? उल्टे उन्हें तो खुश होना चाहिए कि उनकी राह सही थी ? पार्टी स्तर पर भेट का कितना महत्व होता है ? यह बात वही समझ सकते हैं जो कैडर बेस पार्टियां चलाते हैं । बीजेपी और वामपंथी दोनों ऐसे ही हैं ।

दक्षिणपंथ और वामपंथ दो विपरीत ध्रुव माने जाते हैं । वैसे भी भारत को चीन ने कम दर्द नहीं दिए । इस समय भी पीओके में पाकिस्तान द्वारा चीन को दी गई जमीन पर चीन निर्माण कर रहा है । पाकिस्तान कितना बड़ा कर्जदार है चीन का यह सबको पता है । चीन को खुश करने के लिए उसे अपना कलेजा छलनी कराने से भी परहेज नहीं ।

और फिर हमारे देश को लद्दाख और अरुणाचल में भी चीन से जूझना पड़ता है । हाल ही में शंघाई शिखर सम्मेलन में पुतिन , मोदी और जिनपिंग के बीच वार्ता हुई थी । चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का डेलिगेशन यदि सचमुच संबंधों को मधुरता प्रदान करने आया है तो यह अच्छा संदेश है । सबसे बड़ी बात यह है कि चीन ने बीजेपी के आरएसएस जैसे मातृ संगठन से भेंट की । यह मामूली नहीं बड़ी बात है , बड़ा संकेत है ।

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