कोरबा में 1600 मेगावाट विस्तार पर बवाल: INTUC ने पर्यावरण स्वीकृति रद्द करने की उठाई मांग

कोरबा की ज़मीन, कोरबा का पानी और कोरबा की हवा पर फिर से बोझ डालने की तैयारी और जिन परिवारों की जमीन पर उद्योग खड़ा हुआ, उन्हें आज तक रोजगार नहीं। कोरबा में 1600 मेगावाट के प्रस्तावित ताप विद्युत विस्तार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Korba Power Limited द्वारा प्रस्तावित चरण-III परियोजना के खिलाफ श्रमिक संगठन इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) ने मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने आरोप लगाया है कि पूर्व चरणों में पुनर्वास और रोजगार के दायित्व पूरे किए बिना नई पर्यावरण स्वीकृति मांगना कानून, नीति और जनविश्वास तीनों का उल्लंघन है। इस मुद्दे ने न केवल पर्यावरणीय मानकों बल्कि सामाजिक न्याय के सवाल को भी केंद्र में ला दिया है। 27 फरवरी 2026 की जनसुनवाई से पहले दर्ज कराई गई यह आपत्ति अब प्रशासन और पर्यावरणीय प्राधिकरणों के लिए सीधी चुनौती बन गई है।

कोरबा। जिला कोरबा में प्रस्तावित 2×800 मेगावाट (1600 मेगावाट) ताप विद्युत विस्तार परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जिला अध्यक्ष इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस शशांक दुबे एवं जिला सचिव संजय कुमार पटेल ने औपचारिक आपत्ति दर्ज करते हुए चरण-III विस्तार को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
यह आपत्ति 27 फरवरी 2026 को आयोजित जनसुनवाई के संदर्भ में प्रस्तुत की गई है, जो Korba Power Limited (KPL) द्वारा ग्राम सरगबुंदिया, धनधनी, पलाड़ी, खोड्डल, पहंदा एवं पताड़ी, तहसील करतला, जिला कोरबा में प्रस्तावित विस्तार से संबंधित है। KPL वर्तमान में Adani Power Limited की सहायक कंपनी है।

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रोजगार और पुनर्वास पर गंभीर आरोप

आपत्ति पत्र में आरोप लगाया गया है कि:
वर्ष 2004–2007 (चरण-I) एवं 2012–2013 (चरण-II) के भूमि अधिग्रहण के दौरान प्रभावित परिवारों को अब तक रोजगार नहीं दिया गया।
जिला कलेक्टर, कोरबा द्वारा 11.11.2022 को जारी आदेश के बावजूद रोजगार संबंधी निर्देशों का पालन नहीं हुआ।
छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति 2004-2009 एवं 2009-2014 के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया।
INTUC का कहना है कि पूर्व दायित्वों का पालन किए बिना नए विस्तार की अनुमति देना “जनविश्वास और पर्यावरणीय न्याय के विरुद्ध” होगा।

रोजगार सृजन के दावों पर सवाल

प्रारूप EIA रिपोर्ट के अनुसार:
चरण
स्थायी रोजगार
संविदा रोजगार
वर्तमान + निर्माणाधीन
630
3186
प्रस्तावित (चरण-III)
270
1200
यूनियन का तर्क है कि 1600 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता के बावजूद रोजगार सृजन का अनुपात घट रहा है, जिससे परियोजना को “अत्यधिक पूंजी-प्रधान, परंतु सामाजिक रूप से सीमित लाभकारी” बताया गया है।

प्रदूषण नियंत्रण पर स्पष्टता का अभाव

आपत्ति में कहा गया है कि EIA रिपोर्ट में निम्न बिंदुओं पर स्पष्ट तकनीकी विवरण नहीं है :
SO₂ नियंत्रण हेतु FGD प्रणाली का उल्लेख नहीं है।
NOx नियंत्रण के लिए केवल सामान्य “SOFA” का जिक्र है।
मरकरी उत्सर्जन नियंत्रण की रणनीति का अभाव है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि 07.12.2015 को Ministry of Environment, Forest and Climate Change द्वारा अधिसूचित उत्सर्जन मानकों के अनुपालन पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

कोयला और जल दोहन पर चिंता

वर्तमान कोयला आवश्यकता : 8.54 मिलियन टन/वर्ष
प्रस्तावित अतिरिक्त : 6.5 मिलियन टन/वर्ष
कुल: 15.04 मिलियन टन/वर्ष
जल आवश्यकता : 86 MCM/वर्ष
स्रोत : हसदेव नदी
यूनियन का कहना है कि इससे वायु प्रदूषण, फ्लाई ऐश, मरकरी उत्सर्जन और जल संकट की समस्या और गंभीर होगी। कोरबा पहले से ही देश के प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों में गिना जाता है।

भूमि आवश्यकता पर अस्पष्टता

EIA में कुल भूमि 505.58 हेक्टेयर दर्शाई गई है, परंतु ऐश डाइक, कोयला भंडारण, कूलिंग अवसंरचना और पर्यावरण संरक्षण प्रणालियों के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता स्पष्ट नहीं की गई है।

प्रमुख मांगें…
INTUC ने सरकार से मांग की है कि :-

चरण-III विस्तार की पर्यावरण स्वीकृति तत्काल निरस्त की जाए।
या कम से कम तब तक रोकी जाए जब तक :-
सभी भूमि प्रभावित परिवारों को रोजगार न दिया जाए,
उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक का विस्तृत खुलासा न किया जाए,
पुनर्वास अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत न की जाए।
भूमि अधिग्रहण, औद्योगिक नीति प्रावधानों और पर्यावरणीय अनुपालन की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

कोरबा पावर लिमिटेड के प्रस्तावित विस्तार को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। अब निगाहें राज्य एवं केंद्र के पर्यावरणीय प्राधिकरणों पर टिकी हैं कि वे जनसुनवाई में उठाए गए इन गंभीर प्रश्नों पर क्या निर्णय लेते हैं..!!

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