अमित सिंघल : आर्थिक सर्वेक्षण का संकेत – “चतुर नेतृत्व सावधानी से खेल रहा है वैश्विक खेल
इस वर्ष का आर्थिक सर्वेक्षण बतलाता है कि वर्ष 2025 की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि भारत ने पिछले कई दशकों में अपनी सबसे मजबूत आर्थिक स्थिति का प्रदर्शन किया है, लेकिन साथ ही उसे एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है, जहां अब मजबूत अर्थव्यवस्था होने के बावजूद मुद्रा की स्थिरता, विदेशी पूंजी का प्रवाह या रणनीतिक सुरक्षा अपने आप नहीं मिलती।
सर्वेक्षण आगे लिखता है कि आर्थिक वृद्धि सुदृढ़ है; भविष्य की सम्भावनाये अनुकूल बानी हुई है; महंगाई कंट्रोल में है; वर्षा और कृषि की संभावनाएं सहायक हैं; बाहरी देनदारियां कम हैं; बैंक स्वस्थ हैं; लिक्विडिटी (बाजार में कैश की उपलब्धतता) की स्थिति आरामदायक है; क्रेडिट ग्रोथ (बैंक से उधारी) सम्मानजनक है; कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत है; और उद्योग-व्यापार क्षेत्र में धन का प्रवाह अच्छा बना हुआ है। सरकार की नीतियां और सक्रिय शासन इस स्थिति को और सुदृढ़ कर रहे हैं।
इसके बावजूद, रुपये का मूल्यांकन भारत की मजबूत आर्थिक नींव या स्थिति को सही तरह से नहीं रिफ्लेक्ट करता है। दूसरे शब्दों में, रुपया अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन कर रहा है।
निसंदेह, इन दिनों कम वैल्यू वाले रुपये का होना नुकसानदायक नहीं है, क्योंकि यह भारतीय उत्पादों पर ऊंचे अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कुछ हद तक कम करता है, और साथ ही, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा फिलहाल नहीं है।
बेसिकली, आर्थिक सर्वेक्षण स्वीकार कर रहा है कि रुपये के मूल्य को सरकार एवं RBI जानबूझकर गिरने दे रहे है I
एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था में जहां अब मजबूत अर्थव्यवस्था होने के बावजूद मुद्रा की स्थिरता, विदेशी पूंजी का प्रवाह या रणनीतिक सुरक्षा (ध्यान दीजिए – रणनीतिक सुरक्षा) अपने आप नहीं मिलती है।
मैंने पिछले 16 दिसंबर को लिखा था कि ट्रम्प टैरिफ से भारत ने ऐसे निपट रहा है। तभी भारत अमेरिका से ट्रेड डील करने में कोई उतावलापना नहीं दिखा रहा है। राष्ट्र की जिम्मेवारी अत्यधिक बुद्धिमान, चतुर, घाघ एवं राष्ट्रवादी नेतृत्व के पास है। उन पर विश्वास बनाये रखे।


