शिवाय हॉस्पिटल : स्वास्थ्य सेवाओं की नई सुबह, दिल की जांच और इलाज से रायपुर या बिलासपुर जाने की भागदौड़ से मुक्ति

कोरबा के लोगों के लिए अब बेहतर इलाज किसी दूर शहर की मजबूरी नहीं रह गया है। शिवाय हॉस्पिटल और CSEB के बीच हुए समझौते ने हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है, जहां अब कैशलेस और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं अपने ही शहर में उपलब्ध होंगी। खासकर दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए शुरू हुई 2D ECHO जांच ने समय पर पहचान और इलाज का रास्ता आसान कर दिया है। अब मरीजों को रायपुर या बिलासपुर जाने की भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी। 24×7 इमरजेंसी सेवाएं और अनुभवी डॉक्टरों की मौजूदगी हर मुश्किल घड़ी में सहारा बनेंगी। अपने शहर, अपने लोगों के बीच इलाज मिलने से मरीजों को मानसिक सुकून भी मिलेगा। यह पहल कोरबा को स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में एक नई पहचान दे रही है।

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​कोरबा। बीमारियाँ सिर्फ शरीर को नहीं तोड़तीं, वे एक हँसते-खेलते परिवार की कमर भी तोड़ देती हैं। एक अदद बेहतर इलाज की खातिर अपनों को एम्बुलेंस में लादकर बड़े शहरों की ओर भागना, रास्ते भर थमी हुई सांसों के साथ दुआएं मांगना और अनजाने शहरों के बड़े अस्पतालों में खुद को लाचार महसूस करना । कोरबा के मध्यमवर्गीय परिवारों और विशेषकर ऊर्जा कर्मियों के लिए यह कोई नई बात नहीं है।
​लेकिन अब, उम्मीद की एक नई किरण कोरबा की माटी में ही जागी है।

​ एक करार, जिसने दूर कीं कई चिंताएं

​कोरबा के ऊर्जा विभाग (CSEB) के उन हज़ारों कर्मचारियों के लिए यह खबर एक सुकून भरी ठंडी छाँव की तरह आई है, जो दिन-रात शहर को रोशन रखने के लिए पसीना बहाते हैं। शिवाय हॉस्पिटल और CSEB के बीच हुआ यह अनुबंध महज एक कागजी समझौता नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ है जो आपात स्थिति में अपनों को बचाने के लिए दर-दर भटकते थे। अब कैशलेस सुविधा के जरिए, पैसे की चिंता किए बिना उन्हें वह सम्मानजनक और आधुनिक इलाज मिलेगा, जिसके वे हकदार हैं।

अब दिल की धड़कनें नहीं होंगी बेगानी

​अक्सर देखा गया है कि दिल की बीमारी का नाम सुनते ही मरीज से ज्यादा उसका परिवार सहम जाता है। ऊपर से जाँच के लिए रायपुर या बिलासपुर जैसे मेट्रो शहरों के चक्कर काटना किसी सजा से कम नहीं था। लेकिन शिवाय हॉस्पिटल ने 2D ECHO (इकोकार्डियोग्राफी) की सुविधा शुरू कर कोरबा को एक बड़ा तोहफा दिया है।
​अब आपके बुजुर्गों या अपनों के दिल का हाल जानने के लिए किसी दूसरे शहर की धूल नहीं फांकनी होगी। मेट्रो सिटी की तर्ज पर होने वाली यह जाँच अब आपके अपने शहर में, आपकी अपनी भाषा समझने वाले डॉक्टरों की देखरेख में होगी। यह तकनीक केवल बीमारी नहीं पकड़ती, बल्कि समय पर इलाज शुरू कर एक ‘जिंदगी’ बचाती है।

पराये शहर की बेरुखी से मिलेगी मुक्ति

​जब अपना कोई अस्पताल में भर्ती होता है, तो घर का खाना, घर के लोग और अपनी मिट्टी की खुशबू मरीज को आधा ठीक कर देती है। शिवाय हॉस्पिटल की यह पहल मरीजों को उसी ‘अपनेपन’ के एहसास से जोड़े रखेगी। 24×7 इमरजेंसी सेवाएं और अनुभवी डॉक्टरों की मौजूदगी यह भरोसा दिलाती है कि अब आधी रात को कोई भी पिता अपने बच्चे के लिए, या कोई बेटा अपनी मां के लिए अकेला महसूस नहीं करेगा।

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