गोपाल मोदी चेहरे के पीछे का चेहरा..  और लोग “अंटी का पैसा ढीला हो रहा है..”

कोरबा में रंगों के पर्व होली के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर होली मिलन समारोह आयोजित किए गए, जिनमें लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इसी क्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह भी चर्चा का विषय रहा।जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और शहरवासी शामिल हुए।


इस दौरान गोपाल मोदी ने लोगों से आत्मीय मुलाकात की और कई नागरिकों की समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली।
उन्होंने मौके पर ही कुछ जरूरतमंदों की मदद करते हुए आधुनिक दौर में गोपाल की तरह सुदामा की सहायता करने की मिसाल पेश की। गोपाल मोदी के सामाजिक-राजनीतिक चेहरे के पीछे भी एक चेहरा और छिपा हुआ है, जिसके विषय में लोग कम ही जानते हैं।

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सहपाठी मित्र के रूप में मैं जानता हूं कि भाई गोपाल मोदी ने आरंभ से ही जनसेवा की बातें करने के साथ इस क्षेत्र में काम भी किया। जीवन को जनसेवा का लक्ष्य बना चुके भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी अपने दरवाजे पर आए लोगों समस्याओं के निराकरण के लिए के लिए तत्पर रहते हैं।


सबसे बड़ी बात यह भी है कि जब गोपाल भाई किसी के साथ कोई सहयोग करते हैं, तो उस बात की चर्चा भी किसी से नहीं करते और उनकी यही विशिष्टता उनकी शिष्टता व नम्रता का आधार है, जो धीरे धीरे राजनीतिक जीवन के साथ सामाजिक जीवन में भी बड़ी सुदृढ़ता से स्थापित करता जा है।

संस्कारित पारिवारिक वातावरण में मिला समाजसेवा का यही भाव उन्हें अग्रवाल समाज कोरबा के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष के रूप में भी स्थापित कर अग्रवाल सभा के इतिहास में गोपाल मोदी का नाम स्थापित कर गया।

मैं चर्चा करने जा रहा हूं वर्ष 2010 की एक घटना की जो कि मेरे सामने ही घटी। बिना किसी लाग लपेट के 15,000 रुपये तत्काल देकर गोपाल मोदी ने किसी के मात्र कहें में मदद की और साथ में और भी आगे सहयोग करने की बात की।

मैंने तब इस घटना को लेकर कहा कि – “इसे तो समाचार पत्रों में भेजना चाहिए।”

गोपाल भाई बोले – “छोटी सी बात है होती रहती है।”

वर्तमान में जो लोग यह देख रहे हैं कि गोपाल मोदी राजनीतिक जीवन में आज ऊंचाई पर हैं तो उन्हें यह भी जानना आवश्यक है कि इसके पीछे सेवाभाव भी एक प्रमुख कारण है।

16 बरस पहले 15,000 रुपये की भी बड़ी वैल्यू थी।

16 बरस पूर्व की इस घटना को मेरे द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र ” वीर छत्तीसगढ़ ” में प्रकाशित भी किया था, वह अक्षरसः आपके समक्ष text में प्रस्तुत है।

100-200 रूपए के फल बांटकर अखबारों में फोटो खिंचवाने वाली अनेक समाजसेवी संस्थाएं और कुछ स्वयंभू सामाजिक संगठन नगर में बहुतेरे हैं, लेकिन इन सबके बीच भी कुछ शख्सियतें ऐसी हैं, जो अपने किए गए सद्कार्यों का बोल कभी नहीं पीटते। ट्रांसपोर्ट नगर के एक गुमटी व्यवसायी खत्री ने वार्ड क्र.- 7 के पार्षद टीकम राठौर से गुहार लगाई कि उसकी बीमारी के इलाज के लिए रायपुर के रामकृष्ण हॉस्पिटल में जमा करने के लिए 15 हजार रूपये कम पड़ रहे हैं, उसे प्रशासनिक सहायता दिलवाई जाए। तब श्री राठौर उसे लेकर भाजपा के युवा नेता गोपाल मोदी के पास गए और कहा कि प्रशासनिक मदद जल्दी मिले, इसके लिए आप अपनी ओर से थोड़ा प्रयास करवा देते। गोपाल मोदी ने थोड़ी देर बैठने को कहा और अपने ऑफिस से पीछे घर जाकर तत्काल 15 हजार रूपये लाकर खत्री के हाथों में थमा दिए। उन्होंने कारण स्पष्ट किया कि प्रशासनिक मदद जितने समय में हासिल होगी, मर्ज तक तक और भी ज्यादा बढ़ जाएगा, इसलिए तत्काल ही रायपुर जाकर इलाज की व्यवस्था करवाइए और कुछ मेरी मदद की जरूरत हो तो निःसंकोच कहिएगा। इस वाक्यात् को हुए करीब चार माह होने जा रहे हैं और अभी तक इस बाबत उन्होंने कोई शोरगुल नहीं मचाया, कोई विज्ञति नहीं बांटी और न ही परेशान खत्री को रूपये देते वक्त फोटो भी खिंचवाया। इसे कहते हैं ‘नेकी कर और दरिया में डाल।’ दान करो तो ऐसे कि दूसरे हाथ को पता भी न चले कि पहला हाथ क्या दे रहा है। यहां उन लोगों को भी सीख लेनी चाहिए, जो शासन का चेक हितग्राहियों को सौपते वक्त फोटो छाती तानकर खिंचवाकर यूं विज्ञप्तियां बांटते हैं और ऐसा शो करते हैं जैसे कि उनकी अंटी का पैसा ढीला हो रहा है।

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