दिलीप सी मंडल : मोदी किसके हैं..? मोदी कब तक हैं..?

जनरल कटेगरी और ओबीसी दोनों के कुछ अतिवादियों का क्लेम है कि मोदी सिर्फ उनके वर्ग के कारण सत्ता में पहुंचे हैं और जब इनमें से कोई एक वर्ग अपना हाथ खींच लेगा तो मोदी युग का अंत हो जाएगा. तो सवाल है कि कौन है मोदी का असली वोट बैंक?

1. जनरल कटेगरी का क्लेम है कि 1980-1990 के दौर में कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार, शाहबानो मैटर में मजहबी तुष्टिकरण और राममंदिर आंदोलन के कारण उन्होंने कांग्रेस को छोड़ दिया और बीजेपी के टिकाऊ समर्थक बन गए (इस विषय पर पढ़िए Arvind Kumar को). कांग्रेस के दौर की समाजवादी अर्थव्यवस्था की सुस्त गति से भी वे नाराज थे और बीजेपी खासकर मोदी में उनको संभावना दिखी.

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2. वहीं ओबीसी कहता है जब मोदी के कारण हम बीजेपी की तरफ झुके तभी मोदी अजेय हो गए और बीजेपी मजबूत हुई. ओबीसी का ये भी कहना है कि राममंदिर आंदोलन के अग्रणी योद्धा तो वे हैं. कांग्रेस के समीकरण से ओबीसी हमेशा बाहर थे और बीजेपी के उभार के साथ ही वे उससे जुड़ने लगे. पर ये रफ्तार मोदी के आने के बाद तेज हो गई.

3. आदिवासियों और दलितों का भी यही क्लेम है कि हमारे बिना कोई “मोदी स्टोरी” नहीं बनती. आंकड़े भी इसे प्रमाणित करते हैं कि इन सभी वर्गों का ज्यादातर वोट मोदी के लिए पड़ता है. बीजेपी को इन वर्गों में निश्चित बढ़त है.

ये सभी क्लेम आंशिक रूप से ही सत्य हैं. इनमें असत्य कुछ भी नहीं है.

लेकिन मोदी का असली और सबसे टिकाऊ वोट बैंक? वो यहां है. 🔽

2013 में मोदी ने एक सपना दिया और 12 साल में ये हो गया है कि

– भारत में कोई आदमी भूखा नहीं सोता. ये सरकार की गारंटी है. अनाज चाहिए? ले लो.
– हर गांव में बिजली और सड़क पहुंचाने का काम पूरा हो चुका है. गिने-चुने बचे हैं तो वो भी हो रहा है.
– ऐसे घर गिने-चुने हैं, जहां शौचालय नहीं हैं. इससे महिलाओं की जिंदगी बदल गई.
– आज लगभग हर परिवार के पास बैंक खाता और मोबाइल फोन है. आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा है.
– बैंक लोन लेकर अपना काम या बिजनेस करने वाले 50 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं.
– ऐसे एलिजिबल किसान नहीं हैं जिन्हें किसान सम्मान निधि नहीं मिलती. ऐसी सैकड़ों चीजें सबसे पीछे छूट गए लोगों के लिए हुई है, खासकर महिलाओं के लिए.
– इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का बड़ा लाभार्थी ये वर्ग है.

मोदी का वोट बैंक वही है जिसने कभी मार्गरेट थैचर और डोनाल्ड रेगन को सफल बनाया था. सूत्र ये है कि जो करोड़ों लोग पीछे छूट गए हैं, उनकी जिंदगी सुधारो. वो लोग आपको टिकाए रखेंगे.

हालांकि इससे एक समस्या तो हुई है. पहले ऐसे मजदूर मिलते थे, जो सिर्फ खाना खिला देने पर काम कर देते थे. अब मजदूर महंगे हो गए हैं. उन पर डांट-डपट करने पर वे कहीं और काम करने चले जाते हैं. सामाजिक ढांचा बदल गया है. महिलाओं का सम्मान सुनिश्चित हुआ है. मिडिल क्लास का साइज बड़ा हो रहा है.

तो मोदी कब तक हैं?

जब तक वे पीछे रह गए वर्गों की हालत बेहतर करने के लिए धन का बंदोबस्त कर पाएंगे, तब तक वे बने रहेंगे. इसलिए उनका सर्वाधिक जोर अर्थव्यवस्था पर है. मोदी ने इस बीच न जरनल कटेगरी को खोया है और न ही एससी-एसटी और ओबीसी को. बल्कि उन्होंने महिला और नए उभरते मिडिल क्लास के रूप में दो वोट बैंक बनाया है. वे सबके हैं.

-°श्री दिलीप सी मंडल के पोस्ट से साभार।

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