अमित सिंघल : आरक्षण
यूजीसी अधिसूचना के अनुसार समता समिति में 9 सदस्य एवं एक सचिव होगा। केवल तीन सदस्य अनिवार्य रूप से OBC, SC, ST होने चाहिए। इनमे से एक महिला एवं एक दिव्यांग भी हो सकता है। अगर नहीं, तब भी केवल न्यूनतम 5 सदस्यों का 5.7 के अनुसार होना अनिवार्य है।
5.7 में कहाँ लिखा है कि केवल नॉन सवर्ण मेंबर ही हो सकते है? केवल उनके प्रतिनिधित्व की बात की गयी है। क्या दिव्यांगजन एवं महिला को आप किसी वर्ग में रख सकते है?
OBC, SC, ST महिला एवं दिव्यांग का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। यह नहीं लिखा की सभी सदस्य इन्ही पांच केटेगरी से होने चाहिए। अगर ऐसा करना होता तो इसका उल्लेख 5(6) में ही किया जाता। सीधे-सीधे लिखते की सभी 9 सदस्य एवं सचिव इन्ही 5 वर्ग से आएंगे।
पैरा 3(G) में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा दी गयी है जो संविधान के अनुच्छेद 15 एवं 16 के अनुरूप है। तभी SC-ST-OBC को जाति के आधार पर आरक्षण दिया जाता है; अन्य वर्गो को नहीं।
इसमें क्या आपत्तिजनक है?
रोहित वेमुला की माता जी एवं एक अन्य महिला की पेटिशन पर सर्वोच्च न्यायलय के निर्देश पर यह अधिनियम लाया गया है। अतः इन प्रावधानों का उल्लेख आवश्यक था। एक बार समाचापत्र पढ़ लीजिये।
अगर सवर्णो को यह प्रावधान चाहिए तो संविधान के अनुच्छेद 15 एवं 16 में संशोधन करवाइये। उसमे सवर्ण के विरूद्ध भेदभाव का क्रिटेरिया जुड़वाइये। लेकिन ऐसा होते ही जाति आधारित आरक्षण का संवैधानिक आधार ही ध्वस्त हो जाएगा। अतः यह भेदभाव नहीं जुड़ेगा।
इसके लिए आपको अन्य क़ानूनी धाराओं का प्रयोग करना होगा। जैसे की धार्मिक भावनाओ को जानबूझकर ठेस पहुँचाना।
न्यूट्रल भाषा में तथ्य सामने रख रहा हूँ। एक रियलिटी को स्वीकार करना होगा – किसी को भी सत्ता में ले आये, आरक्षण एवं SC-ST एक्ट नहीं निरस्त होने वाला है।
एक प्रश्न स्वयं से पूछिए – क्या एक भी राजनीतिक दल का सवर्ण सांसद आपकी मांग के समर्थन में खड़ा है? उसने संसद से विरोध में रिजाइन कर दिया है? ऐसा क्यों है?


