मिनी चेक डैम हादसा: मुख्यमंत्री के कोरबा दौरे से बढ़ी आस, क्या लापरवाही की होगी जांच?

कोरबा। जिले में 20 नवंबर 2025 को हुए मिनी चेक डैम हादसे ने बिजली उत्पादन व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया था। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के दर्री स्थित एचटीपीएस संयंत्र के पीछे बने चेक डैम के तटबंध में आई दरार के कारण 1.7 मेगावाट के मिनी हाइडल पावर प्लांट में पानी घुस गया था। इससे संयंत्र का संचालन कई घंटों तक ठप रहा और करोड़ों रुपये के संभावित नुकसान की स्थिति निर्मित हुई थी।
अब जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रविवार को कोरबा प्रवास पर आ रहे हैं, इस घटना को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री इस मामले में लापरवाही की जांच के आदेश देंगे?

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बरगद का पेड़ बना हादसे की जड़
जिस स्थान पर थर्मल पावर प्लांट का गर्म रॉ वॉटर एकत्र किया जाता है, वहां वर्षों से खड़ा बरगद का पेड़ धीरे-धीरे फैलता रहा। उसकी जड़ें तटबंध तक पहुंच गईं और दीवार को कमजोर कर दिया। समय रहते सिविल विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसका नतीजा तटबंध में दरार और भारी जल रिसाव के रूप में सामने आया।
यही पानी तेज बहाव के साथ मिनी हाइडल पावर प्लांट में घुस गया, जिससे मशीनों के डूबने का खतरा पैदा हो गया था। अग्निशमन विभाग और कर्मचारियों की कड़ी मशक्कत से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन संयंत्र को फिलहाल बंद करना पड़ा था।
लापरवाही या सिस्टम फेलियर?
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स्पष्ट है यह एक प्राकृतिक जोखिम नहीं, बल्कि  संचारण-संधारण (O&M) एवं सिविल विभाग द्वारा जानबूझकर निर्मित लापरवाही का क्लासिक उदाहरण है। सूत्रों के अनुसार इस पर भी घटना व नुकसान की जिम्मेदारी किस पर होगी, विभाग यह तय नहीं कर पाया है। इसकी स्पष्ट जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाना चाहिए। कोयला सप्लाई, स्क्रैप की बिक्री और ओईएम कंपनियों से कार्य निर्धारण के विषय मे भ्रष्टाचार के भी बड़े आरोप आने वाले समय में सामने आने की बात के सूत्रों द्वारा कही जा रही है
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यह घटना किसी प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं, बल्कि स्पष्ट प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पेड़ की कटाई या तटबंध की मजबूती पर ध्यान दिया गया होता, तो यह स्थिति कभी उत्पन्न नहीं होती।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज रही थी।कि एक साधारण सिविल मेंटेनेंस निर्णय की अनदेखी ने करोड़ों के उत्पादन नुकसान का खतरा पैदा कर दिया।
मुख्यमंत्री के दौरे से बढ़ी आस
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कोरबा आगमन को लेकर अब आशा की जा रही है कि वे इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह न केवल दोषियों की जवाबदेही तय करेगा, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए एक कड़ा संदेश भी देगा।
अब निगाहें मुख्यमंत्री के दौरे पर टिकी हैं..
क्या लापरवाही पर कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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