ध्रुव कुमार : अमित शाह की बदली हुई बॉडी लैंग्वेज : थीटा वेव्स, विज़नरी माइंड और जाग्रत अवचेतन की शक्ति और आत्मविश्वास की यात्रा

क्या आपने कभी गौर किया है कि सबसे सफल, आत्मविश्वासी और ताकतवर लोग Steeple मुद्रा में क्यों बैठते हैं ?

जैसे अमित शाहजी का बॉडी लैंग्वेज पिछले कुछ वर्षों में एकदम बदल गया है। पहले जब मैं उन्हें देखता था तो वे जब Steeple मुद्रा में बैठने की कोशिश करते थे तो उनकी हथेली ज्यादा देर तक पिरामिड नही बना पाती थीं बल्कि अपने आप बंध जाती थीं….

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लेकिन कुछ वर्षों में वो जब भी बैठते है वो अक्सर इस मुद्रा में बैठते हैं। जो यह दर्शाता है कि उनका आत्मविश्वास अपने चरम पर है और वो पूरे नियंत्रण में हैं। कुछ भी उनके कंट्रोल के बाहर नहीं है ना ही उन्हें किसी बात का कोई डर है….

मोदीजी इस मुद्रा में बैठने के माहिर हैं, एलन मस्क से लेकर अडानी तक को मैं इस मुद्रा में बैठे देखा हूँ। आपने भी नोटिस किया होगा।

वास्तव में हम जो बोलते हैं। वह कम्युनिकेशन का सिर्फ 7% हिस्सा होता है बाकी 93% हमारी बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशन से संचार होता है ….

यदि हमारे द्वारा बोले गए शब्द हमारे एक्सप्रेशन व बॉडीलैंग्वेज से मैच नहीं करते हैं तो उस अवस्था मे हमारा संचार कभी सफ़ल नहीं हो सकता….

हम चाहे जितने तर्क दें, चाहे जितनी अच्छी बातें बोले, उनका तब तक कोई मतलब नहीं है जब तक वह सामने वाले व्यक्ति को आपके एक्सप्रेशन और बॉडीलैंग्वेज में वह नजर नहीं आता है ….

दरसअल Steeple वह अवस्था होती है जिस मुद्रा में बैठा हुआ व्यक्ति अपने हाथों और उंगलियों से पिरामिड की आकृति बनाता है। इसके साथ ही उसकी आंखें स्थिर होती है व दोनों पैर खुले हुए होते हैं …

इस अवस्था में व्यक्ति के मस्तिष्क के न्यूरॉन “थीटा वेब” फायर करते हैं जोकि नॉर्मल अवस्था मे केवल गहरी नींद में आते हैं।

ये थीटा वेब जाग्रत अवस्था मे केवल उसी व्यक्ति में आ सकते हैं जो “विजनरी, और भविष्य को देखने वाला हो, जिसका अवचेतन मन उसकी जाग्रत अवस्था मे भी सक्रिय हो।

इस विषय पर “The art of Reding mind’s” सबसे शानदार किताब है जिसमें यहीं बताया गया है कि व्यक्ति के शरीर की कौन सी मुद्रा किस एक्सप्रेशन को व्यक्त करती है ….

जैसे आंखों की गति की अपनी भाषा होती है, चेहरे के भावों की अपनी भाषा होती है, पैरों की अपनी भाषा होती है। बल्कि आप किसी से मिलते ही उसके हाथ मिलाने से ही उसके साथ होने वाले संवाद का भविष्य जान लेंगे कि बात सफ़ल होगी या नहीं …

व्यक्ति जिस तरह की बॉडी लैंग्वेज करता है उसी के अनुसार उसके मस्तिष्क के न्यूरॉन फायर करते हैं और उसी तरह के हार्मोन रिलीज होते हैं ….

अब अगर आप जबरन वो बॉडीलैंग्वेज करने की कोशिश करते हैं आप जिसके लिए तैयार नहीं हैं या आपका मस्तिष्क जिसे आपको उसके लिए अभी परफेक्ट नहीं मानता है तो वह पूरी तरह बनावटी लगेगा और दूसरा व्यक्ति आपके असहजता को तत्काल पकड़ लेगा ….

हां एक बात और अब यदि कोई जबरन Steeple मुद्रा में बैठने की कोशिश करे तो वह कसम से नमूना और बंदर लगने लगता है क्योंकि उसका मस्तिष्क उसके इस बनावटीपन को अस्वीकार कर देता है। विश्वास न हो तो करके देख सकते हैं।

साभार : ध्रुव कुमार।

चित्र इंटरनेट से साभार।

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