परख सक्सेना : ट्रम्प वॉर..मोदी के बाद भारत शून्य नेतृत्व की स्थिति में भावी संकट
ये तो बिल्कुल पागलपन है कि मोदीजी ट्रम्प को कॉल करें और तब ही ट्रेड डील होंगी, भारत को यदि अमेरिका की जरूरत है तो अमेरिका को भी भारत की जरूरत है। भारत किसी का पिछलग्गू नहीं है हम अपने फैसले अपने हिसाब से लेते है।
समस्या कॉल करने मे नहीं है 2025 मे 8 बार दोनों नेताओं की बात हुई है मगर डोनाल्ड ट्रम्प का बड़बोलापन सबसे बड़ी समस्या है। अंतर्राष्ट्रीय शिष्टाचार को वे तिलांजलि दे चुके है, यदि नरेंद्र मोदी कॉल पर उनसे साधारण बात भी करें तो वो उसे बढा चढ़ाकर कुछ और ही बोल देंगे।
कुछ समय पहले उन्होंने साऊथ अफ्रीका के राष्ट्रपति की बाते भी लीक की फिर कोरियन नेता से हुई चर्चा लीक करवा दी। इसलिये इस समय सबसे मुश्किल काम है कि डोनाल्ड ट्रम्प को आप हेलो भी कहे। नरेंद्र मोदी जैसे नेता जिनकी अप्रूवल रेटिंग बड़ी है उन्हें दिक्कत नहीं आती लेकिन जिन नेताओं की कम है उनके लिए संकट है।
आप सोचकर देखिये यदि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होते और ट्रम्प उनके बारे मे ये कहते तो भारत मे निराशा का क्या आलम होता?
मोदी सरकार पर लोगो को भरोसा था लेकिन ट्रम्प अब एक दर्जन देशो के पीछे पड़ गए है। सोलर अलायंस तो छोड़िए वे नाटो से निकलने के मूड मे है, ऐसे मे जिन देशो मे नेता लोकप्रिय नहीं है वहाँ पेनिक है। ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण लीजिये, एक ऑसी पत्रकार को ट्रम्प ने धमकी दी थी कि एंथनी की कुर्सी नहीं बचेगी।
जापान जिसके साथ वे फ्री ट्रेड डील कर चुके है उस तक पर 15% टेरीफ लगा रखे है, ऊपर से जापान को बार बार रक्षा समझौता तोड़ने की धमकी दे रहे है। एक बार जापानी बनकर सोचिये कि आपके पड़ोस मे रूस और चीन घात लगाए बैठे हो और आपकी सुरक्षा कर रहा अमेरिका आपको छोड़ जाए।
पूरी दुनिया मे पेनिक मचा है लेकिन भारत मे मोदीजी की अप्रूवल रेटिंग की वजह से अभी सब उसे हंसी खेल मे ले रहे है। मोदीजी की अब तक की राजनीति बहुत स्पष्ट है, गुजरात दंगों के बाद से उन्होंने तत्काल प्रतिक्रिया से खुद को बचाया है। सही समय का इंतजार करते है और अचानक से हमला करते है।
इस बार जवाब देना भी नहीं चाहिए क्योंकि ऐसा लग रहा है कि अमेरिका एक बड़े युद्ध की तैयारी कर रहा है। अमेरिका का रक्षा बजट 1500 अरब डॉलर हो गया है जबकि भारत का 100 अरब डॉलर भी नहीं पहुंचा है, अमेरिका की नीति एकदम स्पष्ट है वे रूस, चीन, बेलारूस, ईरान और कोलाम्बिया को मिटाना चाहते है।
भारत आज भी ट्रम्प का टारगेट नहीं है, उन्होंने ज़ब चीन से ट्रेड वॉर किया था तो चीन बस एक ही मोर्चे पर हावी था और उसने अमेरिका की क़ृषि कम्पनियों को नुकसान किया था। ट्रम्प चाहते है भारत अपना क़ृषि बाजार खोल दे ताकि वे अब चीन से खुलकर लड़ सके।
ट्रम्प का अगला निशाना ईरान है, ईरान के निर्वासित राजा पहलवी को अमेरिका बुलाना शुरू कर दिया है। पहलवी ईरान की जनता को सड़को पर आने को कह रहे है और जनता सड़क पर है भी, बेलारूस और नॉर्थ कोरिया भी निशाने पर आएंगे। 1500 अरब डॉलर मे तो ट्रम्प कितने ही देशो को नर्क बना सकते है।
जिन देशो के पास परमाणु बम नहीं है जिनमे पाकिस्तान भी शामिल है क्योंकि पाकिस्तान के परमाणु बम वैसे भी अमेरिका का उधार है, ऐसे सभी देशो पर अमेरिका आज नहीं तो कल बम गिरायेगा। यदि आप पाकिस्तान का नाम सुनकर हतप्रभ है तो मत चौकिये, बलूचिस्तान के नेता यदि ट्रम्प को कोई प्रलोभन दे देंगे तो ये भी हो जायेगा।
भारत की स्थिति अलग है, भारत अभी वैश्विक व्यापार के लिए जरूरी है ऊपर से भारत के पास परमाणु बम भी है। भारत पर सिर्फ टेरीफ की मार पड़ सकती है और वही पड़ेगी भी, भारत का हित इसी मे है कि जिस तरह मलेशिया, कनाडा और तुर्की को निपटाया है उसी तर्ज पर अमेरिका को भी निपटाया जाए।
भारत पर बाहरी आक्रमण नहीं हो सकते, सिर्फ गृहयुद्ध हो सकता है लेकिन नरेंद्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री है जिन्हे एक कदम पीछे खींचो तो वे ढाई चाल आगे बढ़ जाते है। प्रयास पूरे होंगे कभी अरावली सामने आएगी, कभी दिल्ली का प्रदूषण आड़े आएगा, कभी सड़क के कुत्तो का मैटर बड़ा होगा तो कभी वोट चोरी के नाम भड़काया जाएगा।
लेकिन जिस तरह से चुनावों के नतीजे सामने आ रहे है भारत सुरक्षित है, कई लोगो की इच्छा है कि अमेरिका भारत पर आक्रमण करके मोदी सरकार को हटा दे लेकिन ये सिर्फ ख्याली पुलाव है। फिलहाल तो अगला नंबर ईरान का ही प्रतीत हो रहा है, विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ रहे है।
लेकिन ये आँच चीन तक पहुंचेगी और भारत के लिए नरेंद्र मोदी के स्वेच्छा से जाने का इंतजार होगा। नरेंद्र मोदी के बाद यदि कोई लोकप्रिय नेता नहीं बैठा तो संकट निश्चित है।
✍️परख सक्सेना✍️
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