देवेन्द्र सिकरवार : चौथा ?

जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता माचाडो ने मोदीजी की प्रशंसा की तो हमेशा की तरह के मूर्खता की हद तक भोले मोदी प्रशंसक शीघ्रस्खलित हो गये थे जबकि मेरा ये मानना है कि नोबेल पुरुस्कार, मैगसेसे पुरुस्कार आदि और कुछ नहीं पश्चिम के डीप स्टेट जिसे मैं ‘अंतर्राष्ट्रीय गुंडों’ का गिरोह कहता हूँ, का सिर्फ एक हथियार है।
अगर झेलेन्सकी जल्द युद्ध नहीं छेड़ता तो उसे भी नोबेल पुरुस्कार दिया जाता लेकिन वह डीप स्टेट के जाल में नोबेल के चारे के बिना फंस गया।
अब यह पूर्णतः स्पष्ट हो चुका है कि ‘एपस्टीन फाइल्स’ में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण में ट्रम्प के खिलाफ पक्के प्रमाण हैं और उन्हीं के आधार पर ट्रम्प डीप स्टेट द्वारा ब्लैकमेल होकर पूरी तरह उसके बंधक बन चुके हैं।
– रूस यूक्रेन युद्ध से हथियार लॉबी संतुष्ट है और युद्ध के बाद अमेरिकी माइनिंग माफिया के अवसर होंगे। चूँकि पुतिन युद्ध बंद न करके और यूक्रेन के खनिज इलाकों पर भी कब्जे को प्रतिश्रुत दिखते हैं इसलिए वैनेजुएला के तेल को और सस्ता कर रूस की अर्थव्यवस्था को निबटाकर युद्ध रोकने को दवाब बनाने का तरीका भर है यह अभियान।
-बांग्लादेश और भारत के पूर्वोत्तर की जरूरत अमेरिकी डीप स्टेट को चीन पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर वहाँ जमीन से चीन के खिलाफ दूसरा मोर्चा खोलने के लिये है।
शेख हसीना अमेरिकी बेस बनाने हेतु द्वीप देने के लिये नहीं मानी इसलिए मुहम्मद युनुस की ओट में छात्र आंदोलन को हाईजैक किया गया।
अब बारी भारत की है और आप समझ गये होंगे कि भारत में डीप स्टेट का एजेंट कौन है।
समस्या यह है कि कितने भी ठोस सुबूत हों सरकार जैसे ही गिरफ्तार करेगी, मीडिया के गिद्ध शोर मचाने लगेंगे और हिंदुत्ववादी हिंदुओं का ही एक वर्ग तुरंत इस धूर्त परिवार से सहानुभूति दिखाना शुरू कर देगा।
इसे निबटाने का एक ही उपाय है और वह है इस धूर्त और भारत विरोधी सोच के देशद्रोहियों को सत्ता से दूर रखना।
इसलिए जाति का चक्कर छोड़कर हाथों में हथियार कस कर पकड़ लो।

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