राजीव मिश्रा : भारत की इंप्रेसिव ग्रोथ पर चर्चा, सेंटर में मोदी राज्य के लिए फायदेमंद।

पिछले दिनों साथ में एक जूनियर डॉक्टर था, कोई 28-30 वर्ष का. केरल का क्रिश्चियन था. हम लोग भारत बनाम इंग्लैंड के pros and cons डिस्कस कर रहे थे. वह भारत की पिछले कुछ वर्षों की तरक्की से बहुत प्रभावित था और इंग्लैंड की डूबती नैया से डरा हुआ था. उसने मुझसे पूछा, भारत के बारे में क्या सोचता हूँ?
मैंने कहा – भारत की प्रगति बहुत इंप्रेसिव है, पर इसका पॉलिटिकल फाउंडेशन बहुत कमजोर है. इंडिया के लोगों का भरोसा नहीं, कब उन्हें बदलाव की खुजली उठे और राहुल गाँधी पीएम बन जाए. यह तरक्की राहुल गाँधी का एक टर्म सरवाइव नहीं कर सकती. यह प्रोग्रेस बहुत ही ज्यादा मोदी पर आश्रित है, यह वन मैन शो है. मैं यही एक कमजोर नस देखता हूँ.

उसने कहा है – मैं केरल से हूँ और केरल में बीजेपी को बहुत ज्यादा पसंद नहीं किया जाता. लेकिन मैं यह मानता हूँ कि सेंटर में मोदी के होना हमारे स्टेट के लिए भी अच्छा है.
मैंने पूछा – जब तुम यह बात जानते हो तो तुम्हे बीजेपी को सपोर्ट करने से क्या रोकता है?
उसने कहा – मुझे बीजेपी के हिन्दूवादी पॉलिटिक्स से समस्या है. मैं क्रिश्चियन हूँ, केरल में क्रिश्चियन और मुस्लिम बहुत बड़ी संख्या में हैं और उन्हें यह पसंद नहीं है.

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मैंने पूछा – अच्छा, तुम बीजेपी सरकार का एक डिसीजन बता दो जिससे सिर्फ हिन्दू को कोई मटेरियल फायदा हुआ हो. मैं कल्चरल डिसीजन जैसे मंदिर बनने की बात अभी नहीं कर रहा, सिर्फ मटेरियल फायदे की बात कर रहा हूँ. अगर इकॉनमी अच्छी हुई है या डिफेन्स मजबूत हुआ है तो यह क्या सिर्फ हिन्दू का फायदा है?

उसने माना, ऐसा कोई डिसीजन उसे दिखाई नहीं देता. फिर मैंने कहा, अब मैं कल्चरल डिसीजंस पर आता हूँ. एक ऐसा डिसीजन बता दो जिससे तुम्हारा कोई नुकसान हुआ हो. क्या एक हिन्दू मेजॉरिटी कंट्री में सरकार को ऐसे डिसीजन नहीं लेने चाहिए जो मेजॉरिटी कल्चर के सेंटीमेंट्स का ख्याल रखें? अगर कोर्ट के निर्णय से मंदिर बनने का फैसला हो गया, और पब्लिक की फंडिंग से मंदिर बनने का पैसा जमा हो गया तो सरकार का काम नहीं है कि वह मंदिर बनने को फैसिलिटेट करे? यह क्या किसी और को अपना मंदिर या चर्च बनाने से रोकता है? यह कुछ ऐसा नहीं है कि मैं शिकायत करूँ कि इंग्लैंड में क्रिसमस क्यों मनाया जाता है?

उसने माना कि यह उचित है, सरकार का हिन्दू सेंटीमेंट्स का ख्याल रखने में कोई बुराई नहीं है. उसने माना कि बीजेपी के प्रति सेंटीमेंट बदल रहा है, लेकिन इसमें समय लगेगा. खासतौर से केरल में इस्लामिक पार्टी एक्टिव हो रही है और दबी जुबान में यह भी कहा कि केरल के क्रिश्चियन इससे घबराए हुए हैं.

मैंने कहा – देखो! बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसे हिन्दू कुछ हद तक अपनी पार्टी की तरह देख सकता है, लेकिन एक सामान्य हिन्दू बीजेपी को वोट इसलिए देता है कि बीजेपी के शासन में उसका अपना जीवन पहले से बेहतर हुआ है. अगर मेरा अपना जीवन खराब होगा तो मैं बीजेपी को सिर्फ हिन्दू पार्टी के नाम पर वोट नहीं दूँगा. लेकिन क्रिश्चियन और मुस्लिम के साथ ऐसा नहीं है… उनके लिए अपनी पॉलिटिकल आइडेंटिटी अपने पर्सनल इंटरेस्ट से बड़ी चीज है. वे बीजेपी को वोट नहीं देंगे, चाहे उसके लिए अपना कितना भी नुकसान हो जाए. यह हिन्दू का क्रिश्चियन और मुस्लिम से बेहद फंडामेंटल अन्तर है और इसमें बीजेपी का कोई दोष नहीं है.

आज राम मंदिर पर भगवा ध्वज लहरा रहा है.. यह बात कुछ दिलों पर सांप लौटने के लिए काफी है. आज हमारी खुशी शत्रु मानसिकता के लोगों के लिए प्रेरक तत्व है.. हमें अपनी खुशी भी बचानी है और अपनी समृद्धि भी जिससे हमारी सारी खुशियाँ जुड़ी हैं.

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