गृह मंत्रालय की सुरक्षा नीति को NTPC जनसंपर्क विभाग की उपेक्षा बनाम चुनौती

कोरबा। गृह मंत्रालय सम्हालने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर अमित शाह ने कई दिशा निर्देश जारी किए हैं और आम नागरिकों को सोशल मीडिया, समाचार पत्रों, न्यूज़ चैनलों के माध्यम से लगातार एलर्ट भी जारी किया जाता है।
लेकिन ऐसा लगता है कि एनटीपीसी जनसंपर्क विभाग की ऊष्मा घोष अमित शाह की राष्ट्रीय सुरक्षा पर जारी दिशा-निर्देशों को ठेंगा दिखा कर गृह मंत्रालय की नीतियों को ही चुनौती दे रही हैं।
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संवेदनशील औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार लगातार अलर्ट मोड में है। गृह मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पावर प्लांट, परमाणु संयंत्र, सैन्य ठिकानों और रणनीतिक क्षेत्रों के आसपास ड्रोन उड़ानों पर सख्त प्रतिबंध लागू किए हैं। इसके बावजूद NTPC क्षेत्र में ड्रोन सुरक्षा को लेकर जिस तरह की चुप्पी और निष्क्रियता सामने आई है, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार NTPC प्रबंधन ने स्वयं प्रशासन को आवेदन देकर संयंत्र क्षेत्र और आसपास अवैध ड्रोन गतिविधियों पर चिंता जताई थी। जानकारी के अनुसार आवेदन में आशंका व्यक्त की गई थी कि अनधिकृत ड्रोन उड़ानों से तकनीकी निगरानी, जासूसी, संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने और संयंत्र सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसील न्यायालय ने क्षेत्र को “नो-फ्लाई ज़ोन” घोषित करते हुए बिना अनुमति ड्रोन संचालन पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील प्रतिष्ठान की सुरक्षा से जुड़ा है, तब आम लोगों को सतर्क करने के लिए व्यापक सार्वजनिक सूचना अभियान क्यों नहीं चलाया गया?
जानकारी के अनुसार तहसील न्यायालय द्वारा आदेश जारी होने के लगभग 2 महीने के बाद भी न तो बड़े स्तर पर चेतावनी जारी की गई, न सार्वजनिक स्थानों पर सूचना बोर्ड लगाए गए और न ही मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। परिणामस्वरूप आम नागरिक अनजाने में ड्रोन उड़ाते रहे और कोई बड़ी घटना घट गई, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी..?
न्यायालय द्वारा आदेश जारी कर देने के बाद एनटीपीसी प्रबंधन की विशेष रूप से जिम्मेदारी तय हो जाती है कि संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जनजागरूकता, स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय और लगातार चेतावनी अभियान भी निरंतर चलाया जाता, लेकिन राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ऐसा कोई भी एलर्ट एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा जारी नहीं किया गया।
मामले में जब NTPC की जनसंपर्क अधिकारी ऊष्मा घोष को कॉल करने पर तहसीलदार के आदेश के संबंध में जानकारी मांगे जाने पर उन्होंने कथित तौर पर इसे “गोपनीय प्रकृति” का मामला बताते हुए विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया, 13 मई 2026 को जब उन्हें समझाया गया कि लोकहित का आदेश है, इसकी कॉपी कोई भी तहसील से निकाल सकता है। समझ में आने पर उन्होंने  ईमेल आईडी भेजी। उनके द्वारा भेजे गए ईमेल आईडी, व्हाट्सएप पर तहसील न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश की जानकारी मांगने के लिए कॉल करने के बाद व्हाट्सएप, ईमेल के माध्यम से जानकारी मांगी गई, इसके बाद SMS कर जानकारी मांगी गई। लेकिन जानकारी अब तक अप्राप्त है, आश्चर्य है कि ऐसा जनसंपर्क विभाग एनटीपीसी का है।

हालांकि यह दायित्व मुख्य रूप से जनसंपर्क विभाग का है, तात्कालिक तौर पर NTPC की जनसंपर्क अधिकारी ऊष्मा घोष को इस संबंध में पहल करना चाहिए था।
मामले में जब NTPC की जनसंपर्क अधिकारी ऊष्मा घोष को
कॉल करने पर तहसीलदार के आदेश के संबंध में जानकारी मांगे जाने पर उन्होंने कथित तौर पर इसे “गोपनीय प्रकृति” का मामला बताते हुए विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया, 13 मई 2026 को जब उन्हें समझाया गया कि लोकहित का आदेश है, इसकी कॉपी कोई भी तहसील से निकाल सकता है। समझ में आने पर उन्होंने  ईमेल आईडी भेजी। उनके द्वारा भेजे गए ईमेल आईडी, व्हाट्सएप पर तहसील न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश की जानकारी मांगने के लिए कॉल करने के बाद व्हाट्सएप, ईमेल के माध्यम से जानकारी मांगी गई, इसके बाद SMS कर जानकारी मांगी गई। लेकिन जानकारी अब तक अप्राप्त है, आश्चर्य है कि ऐसा जनसंपर्क विभाग एनटीपीसी का है।
इसके बाद 2 बार मोबाईल कॉल करके भी संपर्क करने का प्रयास करने पर जनसंपर्क अधिकारी ऊष्मा घोष ने कॉल रिसीव नहीं की और न कॉल बैक करके कोई जानकारी देने का प्रयास उनके द्वारा किया गया।
यहीं से सुरक्षा के अति महत्वपूर्ण विषय पर NTPC की जनसंपर्क व्यवस्था की लापरवाही और प्रशासनिक सक्रियता सवालों के घेरे में आ गई है।

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