अमित सिंघल : “सवाल सरकार का नहीं, हमारे चरित्र का है”

वर्ष 2024 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 4,67,967 थी। प्रति दिन 1279 दुर्घटना।

इन दुर्घटनाओं में 1,75,142 लोगो की मृत्यु हो गयी थी। प्रति दिन 479 व्यक्ति सड़क दुर्घटना में मारे गए थे।

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सर्वाधिक 22,923 लोगो की मृत्यु यूपी में हुई थी। प्रति दिन 74 व्यक्ति सड़क दुर्घटना में अकाल मृत्यु की चपेट में आ गए थे।

लखनऊ में 600 लोगो की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में हो गयी थी। आगरा, कानपुर, प्रयागराज – प्रत्येक शहर में मृत्यु का आंकड़ा 550 छू गया या पार कर गया था।

अधिकतर (61.2%) सड़क दुर्घटनाएँ तेज़ गति के कारण हुईं, जिनमें 1,01,649 लोगों की मौत हुई और 2,83,162 लोग घायल हुए। खतरनाक/लापरवाही से गाड़ी चलाने या ओवरटेकिंग के कारण 26.0% सड़क दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें 46,132 लोगों की मौत हुई और 1,12,504 लोग घायल हुए थे।

कुल सड़क दुर्घटनाओं में से 31.2% (1,46,232 मामले) रिहायशी इलाकों के पास हुईं। ध्यान दीजियेगा, रिहायशी इलाकों के पास।

क्या ओवरस्पीडिंग एवं खतरनाक/लापरवाही से गाड़ी चलाने या ओवरटेकिंग के लिए सरकारी कर्मी जिम्मेवार है। क्या वे आपकी गाड़ी चला रहे थे?

भारत में किसी भी रिहायशी या व्यावसायिक बिल्डिंग में सुरक्षा के नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ा कर अतिरिक्त कमरे बनवा लिया जाते हैं। जो जगह खुली होनी चाहिए थी उसे कवर कर दिया जाता है तथा दुकान के आगे सार्वजानिक स्थल पे सामान लगा कर, गलत पार्किंग कर कर मुख्य मार्ग पर भी बांधा डाल दी जाती है। अगर कभी आग लग जाए तो, मार्ग पर अतिक्रमण होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को वहां तक आने में काफी दिक्कत आती है और जान बचाने का कुछ मिनट का मूल्यवान समय बर्बाद हो जाता है।

जब नियमानुसार बेसमेंट नहीं बनवाया जा सकता तब भी दुकानदार गैरकानूनी तरीके से बेसमेंट बनवा देते हैं. उन्हें यह समझ में नहीं आता कि बेसमेंट पर प्रतिबंध किन्ही कारणों से लगाया गया है। अगर बरसात से पानी भर गया तो बेसमेंट में रखे सामान को नुकसान होगा ही तथा वहां पर लगे हुए बिजली के उपकरणों से करंट फैलने और आग लगने का भी खतरा है।

लेकिन लखनऊ के गोमती नगर के दुकानदारों ने गैरकानूनी तरीके से बेसमेंट भी बनवाया है उसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण को घूस भी दी है और हर साल घूस देने के लिए बाध्य हैं क्योंकि उनकी दुकान की नींव ही गैरकानूनी तरीके से पड़ी है। उस घूस का पैसा वह अपने प्रोडक्ट या सेवाओं के दाम बढ़ाकर वसूलना चाहते हैं और फिर वह शिकायत करते हैं कि कहीं और सामान सस्ता मिल जाता है।

अगर सरकारी कर्मी कार्यवाई करेगा तो लखनऊ के गोमती नगर के पत्रकारपुरम चौराहे के आस-पास स्थित सभी लगभग दुकाने एवं व्यावसयिक बिल्डिंग तोड़ दी जायेगी या सील कर दी जायेगी।

गोमती नगर का उदाहरण इसलिए लिया क्योकि यह पिछले तीन दशक में बना है। इस नए क्षेत्र को भी हमने अनियमता, लापरवाही, अतिक्रमण, बदबू एवं गन्दगी में डुबो दिया है।

अधिकतर दुर्घटनाये (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो – NCRB – के आंकड़ों के मेरे आंकलन के अनुसार लगभग 90%) हमारे भ्रष्ट व्यवहार एवं नियमो की जानबूझकर अवहेलना से होती है। सरकारी कर्मी भी हमारे बीच से आते है। गाड़ी भी हम चलाते है, व्यावसायिक बिल्डिंग भी हम बनवाते है।

भ्रष्टाचार हमारी नसों में घुस गया है. लेकिन हम उस तथ्य को स्वीकार करने से हिचकते हैं।

इस भ्रष्टाचार को हम externalise या बाहरी रूप दे देते है कि सरकारी कर्मी भ्रष्ट; जिस बिल्डिंग में आग लगी उसका स्वामी भ्रष्ट है। केवल हम सत्यनिष्ठ है। और संतुष्ट हो जाते है।

अगर इस भ्रष्टाचार और इससे जनित दुर्घटनाओं से निपटना है तो क्यों नहीं आज, अभी से ट्रैफिक नियमो का सत्यनिष्ठ पालन करना शुरू कर दे। यह तो हमारे हाथ में है; हमारे कण्ट्रोल में है। अन्य सेक्टर्स में भी सुधार दिखने लगेगा।

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