अमित सिंघल : “मेरे पीछे 25 पत्रकार घूमे, या 25 विधायक?”

प्रधानमंत्री वाजपेयी जी ने अनंत कुमार को सितम्बर 2001 में शहरी विकास मंत्रालय में शिफ्ट कर दिया था।

तब मैं मंत्रालय में प्रेस अफसर एवं सरकारी प्रवक्ता था। मंत्री महोदय अधिकतर समय कर्णाटक रहते थे और राजनीतिक कार्यक्रम में व्यस्त रहते थे। जब दिल्ली में होते थे तो उनसे प्रति सप्ताह दो-तीन बार मिलता था और मीडिया कवरेज एवं सम्बंधित विषयो पर ब्रीफ़िंग होती थी।

Veerchhattisgarh

अनंत कुमार के चार्ज लेने के कुछ माह पश्चात समाचारपत्रों में HUDCO – जो मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है – की सरकारी कारो का मंत्रालय एवं HUDCO द्वारा भारी दुरुपयोग की न्यूज़ छपने लगी थी।

मंत्रालय का अपना सॉलिड केस था। मैं पत्रकारों को ब्रीफ़िंग करता था; लेकिन वांछनीय कवरेज नहीं मिल रही थी। मंत्री महोदय चिंतित थे। लेकिन उस समय कर्णाटक स्थित अपने चुनाव क्षेत्र में अधिकतर समय रहते थे।

मंत्री महोदय कुछ दिनों के लिए दिल्ली आये और सरकारी कार्यक्रमों, कैबिनेट एवं पार्टी मीटिंग्स इत्यादि में व्यस्त हो गए थे।

कई पत्रकार मंत्री जी का इंटरव्यू करना चाहते थे। हिंदुस्तान टाइम्स का उस समय दिल्ली में सर्वाधिक प्रचलन था और दिल्ली के समाचारो को प्रमुखता से कवर करता था।

एक कार्यक्रम से लौटते समय मंत्री महोदय ने मुझे अपनी कार में बैठने को कहा और रास्ते में HUDCO विवाद को डिसकस करने लगे।

मैंने मंत्री महोदय को ऐसे कई पत्रकारों की लिस्ट दी और सुझाव दिया कि इन्हे मंत्री जी द्वारा स्वयं ब्रीफिंग दी जाए। शार्ट नोटिस के बाद भी आसानी से 20-25 पत्रकार आ जाएंगे। मंत्री महोदय ने समय की कमी के कारण असमर्थता जताई। उन्हें कर्णाटक के लिए उसी दिन निकलना था।

मैंने जोर दिया कि एयरपोर्ट निकलने के पहले अगर मंत्री जी केवल हिंदुस्तान टाइम्स की पत्रकार को इंटरव्यू के लिए सहमत हो जाए तो मंत्रालय का पक्ष अगले दिन उनकी फोटो के साथ मुखपृष्ठ पर प्रमुखता से छपेगा।

तब अनंत कुमार ने एक बात कही जो मुझे आज तक वस्तुतः याद है।

उन्होंने कहा, “सिंघल जी,” – वे मुझे ऐसे ही बुलाते थे – “मेरे पीछे 25 पत्रकार घूमे, या 25 विधायक? आप के अनुसार मेरे भविष्य के लिए क्या उचित है?”

मैं समझ गया था कि दिल्ली के विवाद का कर्णाटक में कोई असर नहीं है।

अभी काक्रोच पार्टी के ऑनलाइन फॉलोवर्स (जिनमे से अधिकतर भारतीय ही नहीं है) की संख्या पर अराजक तत्व फूल-पिचक रहे है। उन्हें लगता है कि यूपी एवं केंद्र में चुनाव जीत जाएंगे।

लेकिन ग्राउंड पर राजनीतिक वर्क की कोई काट नहीं है।

तभी प्रधानमंत्री मोदी स्वयं लगातार पब्लिक रैली के द्वारा प्रत्यक्ष जनसंवाद करते है। क्षितिज पर कोई चुनाव ना होने के बाद भी रोड शो करते है। उनकी टीम – अमित शाह, योगी जी, हिमंता जी, नितिन नबीन, अनेको सांसद एवं विधायक, राजनीतिक सहयोगी, इत्यादि – लगातार जनसम्पर्क बनाये रखते है। सरकार एवं भाजपा की योजनाओ एवं विज़न के बारे में बतलाते है। आतंकी-नक्सल हिंसा एवं घुसपैठियों के विरूद्ध बोलते है। भारत के विकास, भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार-विस्तार की बात रखते है।

और विपक्ष?

अपना छोड़कर, काक्रोच पार्टी का प्रचार आभासी संसार में कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *