सुरेंद्र किशोर : 1960 की नीति, 2026 की चुनौती: अब सरकार चला रही है ‘खेत बचाओ अभियान’

आजादी के तत्काल बाद की सरकार ने रासायनिक
खाद के जरिए देश की मिट्टी को जहरीला बनाया,
मौजूदा सरकार के समक्ष ‘‘खेत बचाओ’’ की समस्या
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सन 1960–केंद्र सरकार ने किसानों से अपील की थी और उन्हें निदेश दिया था कि वे अधिक से अधिक रासायनिक खाद-
कीटनाशक का उपयोग अपने खेतों में करें।

कुपरिणाम से अनजान किसानों ने अधिक पैदावार के लोभ में वैसा किया भी।
नतीजतन इस देश की मिट्टी बड़े पैमाने पर जहरीली हो गई।भूजल आर्सेनिकयुक्त हुआ।करोड़ों लोग कैंसर से ग्रस्त होने लगे
तो ‘‘अब पछताए होत का.जब चिड़िया चुग गई खेत !!
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सन 2026–आज के अखबारों में सरकार ने एक बड़ा विज्ञापन छपवाया है।उसका शीर्षक है—
खेत बचाओ अभियान।प्राकतिक खेती,उर्वर मिट्टी,सुरक्षित भविष्य।
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यानी, मौजूदा सरकार मानने लगी है कि आज की पीढ़ी का भविष्य -स्वास्थ्य सुरक्षित नहीं है।ऐसा क्यों हुआ ?
क्योंकि 1960 के दशक में आयातित रासायनिक उर्वरकों का व्यापक उपयोग राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया।
वैसा कांग्रेस के अदूरदर्शी नेतृत्व के कारण हुआ।क्योंकि सर्वोच्च नेतृत्व जमीन से पूरी तरह कटा हुआ था।
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क्या इसलिए हुआ ताकि कुछ लोग आयात के जरिए से नाजायज कमाई करके अमीर बन सके !पता नहीं !
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साठ के दशक की तीन-चार बातें
1.-आजादी के समय हमारे देश के करीब मात्र 20 प्रतिशत खेतों के लिए सिंचाई जल उपलब्ध था।जैविक खाद यानी गोबर खाद का इस्तेमाल होता था।
डा.लोहिया ने नेहरू सरकार ने अपील की थी कि 700 करोड़ रुपए की फेज वाईज योजना बनाकर पूरे देश में सिंचाई का प्रबंध करिए।
उसके बदले केंद्र सरकार ने रासायनिक खाद और उन्नत बीज के नाम पर खेतों में जहर फैलाया और पुराने पौष्टिक अनाज को दरकिनार किया।हाईब्रिड के नाम पर पुराने पौष्टिक अन्न को समाप्त किया।उस जमाने के छोटे -छोटे दाने वाले गेहूं से बनी रोटी का बेहतरीन स्वाद मुझे याद है।वह आज उपलब्ध नहीं है।
2.-साठ के दशक में आचार्य रजनीश का पटना में भाषण मैं सुन रहा था।एक खास प्रसंग में उन्होंने कहा कि अमेरिका में
दुकानों में अनाज के बोरे में ऊपर तख्ती लगी होती है जिस पर लिखा रहता है–यह अनाज जैविक खाद के जरिए उपजाया हुआ है।
यानी, अमेरिका के लोग जब रासायनिक खाद की बुराइयांें को पहचान कर सावधान हो चुके थे ,उस समय हमारी सरकार ने मिट्टी को जहरीला बनाने का काम शुरू किया।आज स्थिति ऐसी है कि यह कहना कठिन है कि कहां की मिट्टी जहरीली है और कहां की नहीं है।
3.-मेरे पुश्तैनी गांव वाले चुनाव क्षेत्र गड़खा (सारण)से 1969 में कांग्रेस के जगलाल चैधरी विधायक थे।वे गांव -गांव जाकर किसानों से भोजपुरी में कहते थे–आप लोग रासायनिक खाद खेत में मत डालिए।इससे खेत खराब और फसल जहरीला हो जाएगा।मैंने उनको हमारे दरवाजे पर भी यही बात मेरे किसान पिता से कहते सुना था।चैधरी जी चैथे वर्ष तक एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई कलकत्ता मेडिकल काॅलेज में पढ़ चुके थे।उसी बीच पढाई छोड़कर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे।
चैधरी जी ने जो कहा,वही दुष्परिणाम हमारे अदूरदर्शी नेताओं के कारण हमारा देश झेल रहा है।
कैंसर के मरीजों के संख्या तेजी से बढ़ रही है।
गैर सरकारी स्तर पर भी अनेक संगठन ,खासकर सद्गुरु जग्गी वासुदेव (इशा फाउंडेशन )मिट्टी बचाओ अभियान चला रहे हैं।

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