परख सक्सेना : क्या विपक्ष का आंदोलन जनता से कट चुका है?
जंतर मंतर की नौटंकी के बीच एक बात ठीक हो गयी कि शरद पवार और एमके स्टालिन लगभग NDA मे शामिल हो गए।
NDA का असली नंबर भी आपको इस बिल पर पड़ने वाले वोटस से मिल जाएगा, इंडी गठबंधन की तीन ही सबसे बड़ी ताकत थी शरद पवार, नीतीश कुमार और ममता बनर्जी। नीतीश साथ है, ममता समाप्त हो चुकी, उसने जो सांसद जिताये थे वे बीजेपी के साथ है ऐसे मे सिर्फ शरद पवार बचे थे और ये आखिरी स्तम्भ भी गिर गया।
मोदी जी का इंस्टा पेज 100 मिलियन पार हो गया, जंतर मंतर की नौटंकी का कोई असर जमीन पर तो नहीं है। निजी रूप से मेरी बहस उन्ही से हो रही है जो पहले भी बीजेपी के विरोधी थे, कोई ऐसा नए समर्थक को विरोधी बनते या मेसिव शिफ्टिंग तो कुछ है नहीं।
अन्ना हजारे का आंदोलन जिन्होंने बहुत करीब से देखा है वे समझ सकेंगे कि ये वो आंदोलन नहीं है। अन्ना हजारे के समय हमने एक सरकारी स्कूल मे जाकर आंदोलन के समर्थन मे हस्ताक्षर किये थे, उस समय शहर के लगभग सभी स्कूल के बच्चे वहाँ थे। दुकानदार अन्ना हजारे के बोर्ड बाहर लगाकर बैठे थे। सेना के पूर्व अधिकारी, जज और अफसर भी उसका हिस्सा थे।
बड़ी बात ये थी कि अन्ना हजारे के समय हर राज्य की राजधानी मे एक जंतर मंतर चल रहा था, जो पारा दिल्ली मे था वही भोपाल और जयपुर जैसी जगहों मे था। CJP ज़ब से बनी है लोग तब ही से बोल रहे है कि ये अरविन्द केजरीवाल द्वारा प्रायोजित है, लेकिन इसमें राजनीति या लेफ्ट विंग का प्रत्यक्ष सबूत कुछ नहीं था।
सोनम वांगचुक नाम का तोता ज़ब मरने लगा तो सबको बिल से बाहर आना पड़ा, इस आंदोलन मे अब जो है विपक्ष और वामपंथ ही है, समर्थक भी वे ही है जो हर मोदी विरोधी मुहीम मे समर्थन करते है।
ना कुछ नया है ना कुछ बहुत पुराना, जैसे किसान आंदोलन किसानों का नहीं था, खिलाड़ियों का आंदोलन खिलाड़ियों का नहीं था वैसे ही ये छात्र आंदोलन छात्रों के अलावा शेष सभी का है।
अन्ना आंदोलन के समय जंतर मंतर भरा हुआ था, खुद कांग्रेस के घटक दल उसके विरुद्ध होने लगे थे। सुषमा स्वराज उन दिनों नेता विपक्ष थी, उन्होंने बीजेपी को अन्ना आंदोलन से दूर रखा था क्योंकि दूर की सोची भी थी। मोहन भागवत ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी बल्कि एक रणनीति के तहत गुजरात के विकास का मॉडल प्रचारित करवा दिया था।
ये वो दौर था ज़ब नरेंद्र मोदी एक विकल्प बनकर उभरने लगे थे, RSS-BJP ये बताने मे जुट गए थे कि उनके पास एक आदर्श राज्य गुजरात है जहाँ हिन्दू सुरक्षित है और विकास भी चहुमुखी है। BJP के अंदर जो मर्जी भीतरघात था मगर RSS स्पष्ट था कि अब आडवाणी को जाना होगा।
उन दिनों सोशल मीडिया नया नया था और CAG रिपोर्ट्स के बारे मे लोग जानते नहीं थे इसलिए सुषमा स्वराज जी ने देश भर मे पेम्पलेट बटवाकर कांग्रेस की चूले हिला दी। अन्ना हजारे के आंदोलन से केजरीवाल भी जन्मा, यदि उसने 2013 मे कांग्रेस से गठबंधन ना किया होता तो आज स्थिति बीजेपी के लिए उतनी सहज ना होती।
अन्ना हजारे का आंदोलन किसी ने भी फंड किया हो मगर वो आक्रोशित जनता की आवाज थी, ये नंबर मे भी दिखा 2009 मे कांग्रेस का वोट प्रतिशत 28% के करीब था जो 2014 मे गिरकर 19% तक पहुँच गया। ये ऑर्गनिक वोटस टूटे थे, कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव तब ही हारने शुरू कर दिये थे।
तब से आज मे जमाना बदल गया है, उस समय लोग हस्ताक्षर करने किसी केंद्र पर जाते थे अब इन्हे लग रहा है कि मेटा एड्स चला देने से आंधी आ जाएगी। जिन लोगो को हम सालो से बीजेपी के विरोध मे देख रहे है वे ही बोल रहे है कि अब परिवर्तन आएगा। अरे भाई परिवर्तन वो तय करता है जो बदल रहा हो।
ये एक ही युद्ध है जिसे कारण बदल बदल कर लड़ा जा रहा है, भविष्य मे फिर कोई ऐसी ही एक नौटंकी खड़ी करेंगे और सत्ता पक्ष का ही काम आसान करेंगे। कुणाल, अरुनधति और अरविन्द केजरीवाल जैसे लोगो का शुक्रिया बनता है क्योंकि उनकी उपस्थिति से अब ये कोई जन आंदोलन रहा नहीं।
ये अपने अंत के मुहाने पर खडे वामपंथ और सत्ता के शिखर पर बैठे दक्षिणपंथ की एकतरफा लड़ाई है। 20 जुलाई के लिए अपना दिमाग आप तैयार रखिये, ये लोग आत्मदाह जैसा कोई षड़यंत्र भी रच सकते है। पुलिस के डंडो से कौन कैसा अपाहिज होगा, कौन जियेगा कौन मरेगा ये सब स्क्रिप्टेड है।
ये आंदोलन वामपंथ की एक आखिरी उम्मीद है वही दक्षिणपंथ के लिए एक टेस्ट है। यदि सत्ता पक्ष इसे क्रूरता से कुचल दे तो जो तानाशाही हम सभी चाहते थे ये उसी का औपचारिक आगाज होगा। ये आंदोलन तो नहीं मगर इसका आउटकम अन्ना हजारे आंदोलन जितना ही कीमती होगा।
यहाँ आप हारे तो भी खोयेंगे कुछ नहीं, लेकिन यदि जीत गए तो एक न्यू नॉर्मल सेट कर पाएंगे। बाकि NDA का कुनबा 318 तक तो आधिकारिक आ ही गया है, मुझे निजी रूप से लग रहा है कि ये 365 के आसपास होंगे क्योंकि अभी इसमें स्टालिन और शरद पवार बाकी है। इस तरह 2019 से भी बड़ा बहुमत बीजेपी के पास होगा।
✍️परख सक्सेना✍️
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