कौशल सिखौला : यत्र तत्र सर्वत्र.. यह पहला चुनाव है जहां…

चुनाव में आ गए शहंशाह भी और दो दो शहजादे भी । औरंगजेब भी , हिटलर भी , पाकिस्तान भी और तू तड़ाक़ भी । अब तो भेट द्वारिका , तीनों सेनाध्यक्ष , सनातन , हिन्दू , हिन्दुत्व चुनाव में मिल गए हैं । शब्दकोश निकाल लीजिए , जितने भी तीखे शब्द हैं , लोकसभा चुनाव में तलाश लीजिए । जाति आधारित जनगणना , मुस्लिमों को आरक्षण , संपत्ति की जांच , मंगलसूत्र , गोल्ड बंटवारा , आरक्षण , नौकरियों में आरक्षण आदि और भी ना जानें क्या क्या । क्या बताएं कितना सड़ गया चुनाव प्रचार अभियान।

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सच कहें तो राहुल की जुबान पर ब्रेक नहीं है कि मोदी कहता है , मोदी थर थर कांप रहा है , मोदी डर गया है , इस बार मोदी तो गया , जैसे शब्दों से इतर उनके पास कुछ बोलने को नहीं है । जाहिर है मोदी के मंचों से भी राहुल को जवाब आना लाजमी हैं । हम पहले चर्चा कर चुके हैं कि तमाम स्टार नेताओं के पास जितना भी कुछ था , वह सब कुछ कह दिया है , बोलने को कुछ बचा नहीं।

यह पहला चुनाव है जहां एक पार्टी के खिलाफ इंडी गठबंधन के रूप में बड़ा अजीब गठबंधन सामने है । अजीब इसलिए कि कोई भी संयोजक , कोई भी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम , कोई एक ध्वज , कोई एक चुनाव चिन्ह गठबंधन के पास नहीं । हर राज्य में अपने अपने राग । हां निशाना जरूर एक है । वह है पिछले चुनाव में 54% तक वोट शेयर कर चुकी पार्टी का नेता पीएम नरेंद्र मोदी । चुनाव कहीं मोदी बनाम राहुल है , कहीं तेजस्वी बनाम मोदी तो कहीं ममता बनाम मोदी । यानि मोदी सर्वत्र है । तो जो पार्टी सर्वत्र है वही यत्र तत्र सर्वत्र होगी । शब्दों का मतलब भी समझ लीजिए और चुनाव की दिशा भी।

राहुल गांधी अब मंचों से खुले आम कह रहे हैं – मोदी तू तो गया । अपने से कहीं बड़े , ज्यादा प्रतिभावान , प्रधानमंत्री के पद पर बैठे मोदी के प्रति राहुल के मन में घोर नफ़रत है तो ठीक है । इसके बावजूद शब्द मर्यादा किसी को नहीं भूलनी चाहिए न राहुल को और न मोदी को । लेकिन राहुल की वाणी बचकानी है , एकदम अमर्यादित है । दरअसल वे खुद को 4 जून के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा देखने लगे हैं । 2019 में भी उनका माइंड सेट उन्हें पीएम कुर्सी पर ही देख रहा था । तभी उन्होंने अपनी कैबिनेट बनाने का काम भी परिणाम से पूर्व पूरा कर लिया था । वैसे तो अब कुछ बचा नहीं , न ही कहने सुनने का समय बचा है । बस ! आखिरी मतदान के बीच बचे 26 दिन गुजर जाएं तो यह हाहाकार तो समाप्त हो ?

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