योगी अनुराग : लौकिक संस्कृत साहित्य में सूर्यदेव

लौकिक संस्कृत साहित्य की सुदीर्घ एवं वैविध्यपूर्ण परम्परा में भगवान् सूर्य का स्वरूप अत्यन्त दीप्तिमान, महिमामण्डित एवं बहुआयामी रहा है।

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अमित सिंघल : आर्थिक सर्वेक्षण का संकेत – “चतुर नेतृत्व सावधानी से खेल रहा है वैश्विक खेल

इस वर्ष का आर्थिक सर्वेक्षण बतलाता है कि वर्ष 2025 की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि भारत ने पिछले

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सुरेंद्र किशोर : प्रखर श्रीवास्तव की पुस्तक ‘‘हे राम’’

प्रखर श्रीवास्तव की पुस्तक ‘‘हे राम’’ के बारे में ————————— हमें किसी नेता,दल और विचारधारा को खुले मन-मिजाज से देखना

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