योगी अनुराग : लौकिक संस्कृत साहित्य में सूर्यदेव
लौकिक संस्कृत साहित्य की सुदीर्घ एवं वैविध्यपूर्ण परम्परा में भगवान् सूर्य का स्वरूप अत्यन्त दीप्तिमान, महिमामण्डित एवं बहुआयामी रहा है।
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