भूपेंद्र सिंग : वैश्विक परिदृश्य में मोदी के अप्रूवल रेटिंग 70 होने के मायने.. जब सारी दुनिया में नेताओं की अप्रूवल रेटिंग 20-30 से कम है…
मोदी जी को सब कुछ सिखाइये लेकिन कृपया राजनीति न सिखाइये। उनसे राजनीति सीख सकते हैं तो सीखिए। न पारिवारिक पृष्ठभूमि, न आर्थिक पृष्ठभूमि, न जातीय पृष्ठभूमि, बावजूद इसके वह दुनिया में राजनीति के शिखर पर हैं। समकालीन राजनेताओं में पुतिन और सी ज़िपिंग बिना चुनाव वाले नेता हैं। ट्रम्प गद्दी से चार साल के लिए हटाए गए। जब सारी दुनिया में नेताओं की अप्रूवल रेटिंग 20-30 से कम है तब मोदी लगातार 70 के ऊपर बने हुए हैं। यहाँ तक की MOTN का देशी सर्वे भी बता रहा है कि 52% भारतीय उनको प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।
भारत जैसे बहुरंगी बहुभाषी देश में इस तरह की स्वीकार्यता अपने आप में एक चमत्कार है। विपक्ष उनकी छवि ऐसी बनाना चाहता है मानो वह विपक्ष को समाप्त करना चाहते हैं बावजूद इसके विपक्ष के नेता उनको तू तड़ाक करके खुले आम सुनाते हैं और अब तो अपने मंचों से वह गाली भी दे रहा हैं।
पत्रकार उन पर आरोप लगाते हैं कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दमन करने वाले हैं लेकिन उनकी यह अभिव्यक्ति सब लोग खुलकर सुनते हैं। ब्राह्मणवादी उन पर दलित तुष्टिकरण का आरोप लगाते हैं और दलित उन पर ब्राह्मणवादी होने का आरोप लगाते हैं। मुसलमान उन पर मुस्लिमविरोधी होने का आरोप लगाते हैं तो महाकट्टर हिंदू उन पर मुस्लिमपरस्त होने का आरोप लगाते हैं। खालिस्तानी उनको सिक्ख विरोधी बताते हैं तो खालिस्तान विरोधी उनको सिक्ख तुष्टिकरण का मास्टर बताते हैं। ऐसे दोहरावों को धारण करना बहुत बड़ी उपलब्धि है।
राजनीति को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि “दोहराओं का प्रबंधन राजनीति है”। वह दुनिया भर में बुद्ध का संदेश देते हैं और भारत में कहते हैं कि शांति का रास्ता शक्ति से गुजरता है। नक्सली गैंग मानता है कि वह उनके शत्रु हैं जबकि महाकट्टर मानते हैं कि देश में सिस्टम तो आज़ भी पुराना ही चल रहा है। समर्थक कहते हैं कि उन्होंने जाटों का तुष्टिकरण किया और जाटों के नेता कहते हैं कि मोदी जाट विरोधी है।
भला इतने दोहराओं को मैनेज करने वाला नेता किसी ने कहीं देखा है? मैंने तो नहीं देखा। मोदी जी जीवन यात्रा सीखने लायक़ है, टिप्पणी करने लायक़ नहीं।
आप मोदी के विचार से असहमत हो सकते हैं लेकिन इस बात से नहीं कि वह अद्भुत मेहनती व्यक्ति है, सफलतम राजनेता है, शून्य से शिखर की यात्रा तय की है, उसने अपने पार्टी को वास्तविक अर्थों में राष्ट्रीय पार्टी बनाया है। उस व्यक्ति ने सभी हिंदू समाज में पार्टी को पहुंचाया है।
आज़ आपको लगता है कि कुछ सीट कम आई तो आप मोदी पर चढ़ाई कर देंगे और कारण देंगे कि काम तो किया पर जैसा मैंने सोचा बिल्कुल वैसा नहीं किया, मेरे टाइम लाइन के हिसाब से नहीं किया, देर में किया। तो यह आपकी राजनीतिक समझ नहीं बतलाता है बल्कि आपकी अधीरता अथवा आपके मन में उसके खिलाफ चल रहा सूक्ष्म विरोध बताता है।
आप मोदी के विरोध में हैं लेकिन नैतिक दबाव में कह नहीं पा रहे हैं। यह जो मोदी का विरोध करते समय आपको नैतिक दबाव महसूस होता है, वहीं मोदी की सबसे बड़ी कमाई है। मोदी जी चर्चा के नहीं बल्कि समझने की विषय वस्तु हैं। बस थोड़ा अपने सोच में ठहराव लाइए, चित्त स्थिर रखिए और उससे बढ़कर अपना मन साफ़ रखिए। सब स्पष्ट दिखेगा।
