राष्ट्रगीत के सम्मान से लेकर अनुच्छेद 370 तक, रविशंकर प्रसाद बोले: राष्ट्रहित से समझौता क्यों?

स्वतंत्रता दिवस के दिन कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के अपमान के बाद कल गोवा में भी कांग्रेस ने पुनः ‘वंदे मातरम’ का अपमान किया। यह कांग्रेस के असली चरित्र को दर्शाता है।

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Veerchhattisgarh

कांग्रेस ‘वंदे मातरम’ का सम्मान नहीं कर सकती तो उसे आज़ादी के आंदोलन की विरासत पर एकाधिकार का दावा करना बंद कर देना चाहिए।

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मोदी जी ने ‘दिमागी नक्सलियों’ से सावधान रहने की बात कही थी, किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन कांग्रेस का खुद को इससे जोड़ना उसकी मानसिकता को उजागर करता है।

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भारत रत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 1950 में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत का सम्मान दिया था, लेकिन आज कांग्रेस उसी विरासत से मुंह मोड़कर अपने ही स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का अपमान कर रही है।

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ट्रिपल तलाक का विरोध, शाह बानो का विरोध, अभी ‘जन गण मन’ में वॉकआउट और आर्टिकल 370 में वॉकआउट। राष्ट्रहित के जितने सवाल होते हैं, अगर उनकी टकराहट वोट बैंक से हो जाती है, तो कांग्रेस पार्टी पीछे चली जाती है।

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मूल संविधान में भगवान राम, श्रीकृष्ण, हनुमान जी और गुरु गोविंद सिंह जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों को स्थान मिला है, फिर कांग्रेस को अपनी ही विरासत से आपत्ति क्यों है?

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यह पब्लिक है, सब जानती और समझती है। हमें लगता था कि कांग्रेस पार्टी कभी तो सबक लेगी लेकिन उनके नेता ही अराजकता के प्रतीक बन चुके हैं।

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भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया और कांग्रेस पर राष्ट्रीय प्रतीकों और अपने ही स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों से समझौता करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत है और डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रीय हितों से पीछे हटने तथा नक्सलवाद के वैचारिक समर्थन का आरोप लगाया।

श्री प्रसाद ने कहा कि 15 अगस्त को कांग्रेस के मुख्यालय में जिस तरह का एम्बैरसिंग इवेंट हुआ, जिसमें सोनिया गांधी पूरे वंदे मातरम गाने का विरोध कर रही थी और बाद में उनकी बौद्धिकता से गुणी मीडिया हेड ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी खोजी जा रही थी, यह बिल्कुल बकवास था। कल मल्लिकार्जुन खड़गे जब गोवा गए, तो वहाँ भी पार्टी के कार्यक्रम में दो स्टैंजा ही गाया गया। आज हम पूरी कांग्रेस की मानसिकता पर एक सवाल उठाना चाहते हैं। कांग्रेस अगर इस तरह की हरकत करती है, तो कृपया वह भारत के आज़ादी आंदोलन का एकमात्र ठेका लेने का अपना दंभ बंद कर दे। अगर कांग्रेस पार्टी महान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के साथ ऐसा कर रही है, तो बेहतर होगा कि वह आज़ादी की लड़ाई की एकमात्र संरक्षक होने का दावा करना छोड़ दे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वंदे मातरम भारत की आज़ादी का एक प्रमुख गीत था, जो प्रेरणा देता था। भारत माँ को पहली बार माँ के स्वरूप में महान कवि बंकिम चंद्र चटर्जी जी ने रखा था। इसे पहले रवींद्रनाथ ठाकुर और शायद उसके पहले हेमंत ठाकुर ने 1896 में गाया था। फिर बाद में बाल गंगाधर तिलक ने इसको और आगे बढ़ाया और यह देश की आज़ादी का मूल मंत्र बन गया। 1936-37 में कांग्रेस का मुस्लिम लीग से पैक्ट हुआ था और संभवतः इसी कारण से मुस्लिम लीग के द्वारा दबाव बनाया गया कि आप सिर्फ दो स्टैंजा गाइए, बाकी में हमारी धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। उसके बाद तो मुस्लिम लीग के लोग पाकिस्तान चले गए, मोहम्मद अली जिन्ना के पीछे और जिन्ना एक साल में दुनिया छोड़कर चले गए। लेकिन इस देश के प्रथम राष्ट्रपति और महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में बैठक में साफ-साफ घोषणा की कि ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय गान, ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत। डॉ. राजेंद्र प्रसाद तो कांग्रेस के ही थे और संविधान सभा के अध्यक्ष थे, जो बाद में भारत के राष्ट्रपति बने। तो यह जो नया बदलाव किया गया, ‘Prevention of Insults to National Honour Act’ जो 1971 में बना, उस समय कांग्रेस की सरकार थी और इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। इसमें कहा गया कि तिरंगा हो या जन गण मन, इसका कोई इंसल्ट करेगा तो तीन साल तक की सजा होगी।

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