अमित सिंघल : बक्शी राम की देन Co-0238, जिसने गन्ने से चीनी उत्पादन को दी नई रफ्तार
कोयम्बटूर स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान के निदेशक बक्शी राम ने गन्ने की एक क़िस्म Co-0238 विकसित की जिसने गन्ने के क्षेत्र में क्रांति ला दी है।
2012-13 के क्रशिंग सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में उत्तर प्रदेश के किसानों ने 24.24 लाख हेक्टेयर भूमि पे गन्ना उगाया था और चीनी मिलों ने इस गन्ने से 74.85 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था।
वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती 22.57 लाख हेक्टेयर में हुई थी जिससे एक करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
2025–26 शुगर सीज़न में भारत में गन्ने की खेती लगभग 57.31 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है। इससे कुल चीनी उत्पादन 3.44 करोड़ टन (इथेनॉल डाइवर्जन से पहले) है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन से लगभग 16% अधिक है।
पिछले एक दशक में प्रति हेक्टेयर गन्ना के उत्पादन में 23.6 प्रतिशत वृद्धि मुख्य रूप से Co-0238 गन्ने के कारण हुई है। साथ ही इस गन्ने से चीनी उत्पादन भी पहले की तुलना में अधिक हो रहा है। Co-0238 गन्ना अन्य किस्मों की तुलना में हर टन अधिक चीनी देता है।

राष्ट्र में चीनी की कुल खपत लगभग 2.85 करोड़ टन है और इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का अनुमान लगभग 34 लाख टन है।
50 लाख टन का पिछले सीजन का स्टॉक और 2025–26 शुगर सीज़न के आखिर में बची चीनी (25 लाख टन) को मिलाकर, देश के पास लगभग 75 लाख टन अतिरिक्त चीनी का स्टॉक है।
अतः, भारत एक चीनी बहुल राष्ट्र है।


