परख सक्सेना : सबसे सफल प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामना, ‘न्यू नॉर्मल’.. मोदी युग ने बदल दी अपेक्षाओं की परिभाषा
नेहरू जी से आप शिकायत रख सकते है कि उन्होंने हाइवे क्यों नहीं बनवाए लेकिन 1960 के समय तो खाने को अनाज मिलता वो शायद बड़ी बात थी। हम न्यू नॉर्मल मे बहुत जल्दी शिफ्ट होते है, हमें स्लो चलते मोबाइल फोन पसंद नहीं आते जबकि हमारी ही पीढ़ी ने लैंडलाइन का जमाना भी देखा है।
देखा जाए तो किसी भी नेता को एंटी इनकमबेंसी से ज्यादा न्यू नॉर्मल से डर लगता है। इसी न्यू नॉर्मल को मोदीजी कभी मात देते है और कभी कभी इससे घायल भी होते है।

आज मोदीजी का जन्मदिन है, मोदीजी चिरंजीवी हो और हमेशा शासन करते रहे। जिन लोगो से इतिहास भूले नहीं भूलता वे लोग कभी नरेंद्र मोदी की उपलब्धि नहीं भूल पाएंगे। फेसबुक ने मेरी 9/11 वाली पोस्ट ब्लॉक कर दी हालांकि आप उसे चैनल पर पढ़ सकते है।
उसमे लिखा था कि ज़ब 26/11 का हमला हुआ तब मन मे सबसे बड़ी टीस यही थी कि हमने अमेरिका की तरह कार्रवाई क्यों नहीं की? उस समय वैश्विक राजनीति समझ नहीं आती थी मगर आज भी देखने जाए तो कम से कम सर्जिकल स्ट्राइक तो कर सकते थे। 120 करोड़ की आबादी वाला देश अमेरिका और जॉर्ज बुश का मुँह ताकता रहा।
आज शिकायत है कि सर्जिकल स्ट्राइक की थोड़ा और अंदर घुस जाते, ये है न्यू नॉर्मल। कल को पूरा पाकिस्तान भी कब्जा लिया तो भी शिकायते रुकने वाली नहीं है। लेकिन बतौर सत्ताधीश ये ही आपकी विजय है।
G-20 के समय मुझे याद है कि मनमोहन सिंह को कोने मे खड़ा किया जाता था और G-7 का तो न्योता भी नहीं आता था आज शिकायत है कि आप गले क्यों मिलते हो? ये एक और न्यू नॉर्मल है।
जहाँ सड़क मे गड्ढे नहीं गड्ढों मे सड़के होना भी विकास था वहाँ शिकायत है कि हाइवे मे गड्ढे क्यों हो गए, हाइवे बोलकर आप खुद कह चुके है कि ये न्यू नॉर्मल हो चुका है। न्यू नॉर्मल भी विकास को परखने का महत्वपूर्ण मापदंड है।
मोदीजी के जन्मदिन पर प्रार्थना है कि शिकायते भले ही चलती रहे मगर ये न्यू नॉर्मल वाला ट्रेंड कभी खत्म ना हो, धन्यवाद एक ऐसे न्यू नॉर्मल के लिए जहाँ मेट्रो मे बम फटने का डर नहीं लगता। धन्यवाद उस न्यू नॉर्मल के लिए जहाँ हम खुलकर इस्लामिक आतंकवाद पर बोल पाते है।
धन्यवाद उस न्यू नॉर्मल के लिए जहाँ फ्लाइट और A/C कोच की शिकायते हम कर पा रहे है जबकि कांग्रेस राज मे जनरल के धक्के भी विकास थे। शिकायते भी है, UGC वाली बात यदि सेवातीर्थ की सहमति से हुई तो ये गलत किया। विरोधियों को पिंजरे मे डालना चाहिए था। खैर शिकायते है इसका मतलब ये भी नहीं कि आपका विकल्प ढूंढ़ने निकला जाए, दिल्ली की गद्दी को अलंकृत कीजिए और ज़ब इच्छा हो उसे अगले स्वयंसेवक के लिए छोड़ प्रजा मंडल मे शेष जीवन बिताइये।
आज़ाद भारत के सबसे सफल प्रधानमंत्री को, अमेरिका से जापान तक जन्मदिन की बधाईयों के ताता के बीच एक छोटी सी शुभकामना हमारी ओर से भी।
✍️परख सक्सेना✍️
https://t.me/aryabhumi
-आंशिक संशोधित।


